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Report: संसदीय समिति की रिपोर्ट, योग्यता के बावजूद एम्स फैकल्टी में नहीं लिए जा रहे एससी-एसटी उम्मीदवार
Tue, 26 Jul 2022 07:50 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 26 Jul 2022 07:50 PM IST
सार
भाजपा सांसद किरीट पी सोलंकी की अध्यक्षता वाली समिति की मंगलवार को लोकसभा में प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया है कि एम्स में कुल 1,111 संकाय पदों में से, 275 सहायक प्रोफेसर और 92 प्रोफेसर के पद रिक्त हैं।
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एम्स दिल्ली
- फोटो : फाइल
विस्तार
संसदीय स्थायी समिति ने एक रिपोर्ट में कहा है कि उचित योग्यता होने के बावजूद अनुभवी एससी/एसटी उम्मीदवारों को एम्स में प्रारंभिक चरण में भी संकाय सदस्यों के रूप में शामिल होने की अनुमति नहीं है। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के कल्याण पर लोकसभा में पेश की गई स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह तब हो रहा है जब कुल 1111 संकाय पदों में से एम्स में 275 सहायक प्रोफेसर और 92 प्रोफेसर पद की रिक्तियां हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति का विचार है कि सभी मौजूदा रिक्त संकाय पदों को अगले तीन महीनों के भीतर भरा जाना चाहिए।
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संसदीय रिपोर्ट में की गई ये सिफारिश
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को संसद के दोनों सदनों में रिपोर्ट पेश करने की तारीख से तीन महीने के भीतर एक कार्य योजना प्रस्तुत करनी होगी। समिति का यह भी दृढ़ विचार है कि भविष्य में भी सभी मौजूदा रिक्तियों को भरने के बाद पदों पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कोई भी संकाय सीट किसी भी परिस्थिति में छह महीने से अधिक समय तक खाली नहीं रखी जाएगी। इन्हें शुरुआती चरण में भी संकाय सदस्यों के रूप में शामिल किया जाना चाहिए।
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भाजपा सांसद किरीट पी सोलंकी की अध्यक्षता वाली समिति की मंगलवार को लोकसभा में प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया है कि एम्स में कुल 1,111 संकाय पदों में से, 275 सहायक प्रोफेसर और 92 प्रोफेसर के पद रिक्त हैं। समिति ने आगे कहा कि वह सरकार के बार-बार स्टीरियोटाइप जवाब को स्वीकार नहीं करेगा कि पर्याप्त संख्या में उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिल सके। यह वास्तव में एससी / एसटी उम्मीदवारों के मूल्यांकन की सही तस्वीर नहीं है जो समान रूप से योग्य हैं। लेकिन उन्हें जानबूझकर उपयुक्त नहीं घोषित किया गया है क्योंकि चयन समिति द्वारा गलत पक्षपातपूर्ण मूल्यांकन सिर्फ एससी/एसटी उम्मीदवारों को वंचित करने के लिए किया जाता है।
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एम्स के साधारण निकाय में कोई एससी और एसटी सदस्य नहीं
समिति ने कहा कि संकाय का हिस्सा बनने का उनका वैध अधिकार है। समिति ने यह भी कहा कि वर्तमान में एम्स के साधारण निकाय में कोई एससी और एसटी सदस्य नहीं है, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया और नीतिगत और सेवा मामलों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के हितों की रक्षा और एससी/एसटी को उनके वैध अधिकार देने से वंचित कर रहा है।
समिति की यह वैध अपेक्षा है कि एससी/एसटी समुदाय को प्रतिनिधित्व देने करने और सेवा मामलों में उनके हितों की रक्षा करने के साथ-साथ निर्णय लेने का हिस्सा बनने के लिए एम्स के सामान्य निकाय में एक एससी/एसटी सदस्य होना चाहिए। यह देखते हुए कि आरक्षण को सुपर-स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में विस्तारित/लागू नहीं किया गया है, पैनल ने कहा कि इसलिए अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्य सुपर-स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश नहीं कर सकते हैं।