फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Injected Dead body can be kept for three days 

इंजेक्शन लगाकर तीन दिन रख सकेंगे शव

Thu, 04 Jan 2018 05:34 AM IST
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Updated Thu, 04 Jan 2018 05:34 AM IST
विज्ञापन
Injected Dead body can be kept for three days 
इंजेक्‍शन - फोटो : डेमो फोटो
मौत के बाद अंतिम संस्कार में समय लगे तो पीड़ित के परिवार को शव खराब होने का डर रहता है। खासतौर पर तब, जब शव को लंबी यात्रा कर लेकर जाना हो। इसलिए परिजन पोस्टमार्टम के बाद शव के अंतिम संस्कार में जल्दी करते हैं। अब इस परेशानी से छुटकारा मिल गया है। दिल्ली के फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने इसका तोड़ निकाल लिया है। एंबामिंग चिकित्सा के जरिये शव को खराब होने से कुछ समय तक बचाया जा सकता है। अब तक एम्स में ही यह सुविधा उपलब्ध थी, अब कनॉट प्लेस स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में भी इसे शुरू कर दिया गया है। 
विज्ञापन


अस्पताल के फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. विवेक चौकसे बताते हैं कि शरीर के अंदर कई तरह के बैक्टीरिया होते हैं। जीवित अवस्था में ये शरीर के पोषण में सहायक होते हैं, लेकिन व्यक्ति की मौत के बाद ये निष्क्रिय होने लगते हैं और कुछ समय बाद शरीर को छोड़ने लगते हैं। इन्हीं की वजह से शव खराब होने का डर होता है। डॉक्टर चौकसे के मुताबिक, एंबामिंग में एक विशेष तरह का इंजेक्शन शव को लगाया जाता है। वह मृत शरीर में रक्त की जगह ले लेता है। 
विज्ञापन


पढ़ें- इंजेक्शन से ड्रग्स लेने वालों का जिला अस्पताल में मुफ्त इलाज
विज्ञापन
विज्ञापन


आमतौर पर सर्द मौसम में दो से तीन दिन और गर्मियों में एक से डेढ़ दिन तक यह शव को खराब होने से बचाए रखता है। उनके मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय हवाई मानकों में शव की एंबामिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। यानी विमान से शव ले जाना है तो उसकी एंबामिंग करनी पड़ेगी। इसका खर्च करीब 4 हजार तक आता है, लेकिन कुछ मामलों में यह राशि कम-ज्यादा हो सकती है। यह सुविधा भी हर मेडिकल कॉलेज या अस्पताल में मौजूद नहीं है। 

पांच तरह के होते हैं रसायन 

Injected Dead body can be kept for three days 
drug injection
एंबामिंग में पांच तरह के रसायन होते हैं, जो शव की उन कोशिकाओं में जगह बनाते हैं, जहां जीवित रहते समय रक्त प्रवाह होता था। कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां इस पद्घति के जरिये कई वर्ष तक शव को सुरक्षित रखा जा सकता है। 

परिजन की मंजूरी होना जरूरी 

फॉरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि किसी शव की एंबामिंग तभी की जा सकती है, जब उसके परिजन मंजूरी दें। इसके लिए कुछ कागजी कार्रवाई भी करनी पड़ती है। हालांकि कई बार लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती है। इस वजह से वे आपाधापी में रहते हैं। डॉ. चौकसे का कहना है कि उनके यहां हर सप्ताह 8 से 9 पोस्टमार्टम हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed