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CAG Report: 'इंफ्रा प्रोजेक्ट्स भाजपा के करीबी दोस्तों को दिए गए', कैग रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस का बड़ा आरोप

Sun, 03 Sep 2023 08:45 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 03 Sep 2023 08:45 PM IST
सार

CAG Report: भारत माला परियोजना से जुड़ी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक हालिया रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस ने  रविवार को केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि अवसंरचना से जुड़ी परियोजनाएं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के करीबी मित्रों और पार्टी को चंदा देने वालों को दे दी गईं।

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Infrastructure projects given to 'close friends' of BJP: Congress hits out at CAG report
Jairam Ramesh (File) - फोटो : Social Media

विस्तार

भारत माला परियोजना से जुड़ी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक हालिया रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस ने  रविवार को केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि अवसंरचना से जुड़ी परियोजनाएं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के करीबी मित्रों और पार्टी को चंदा देने वालों को दे दी गईं।

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कांग्रेस ने कहा कि केवल संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि ‘भारतमाला परियोजना’ का मकसद देशभर में माल ढुलाई को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 35 हजार किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग विकसित करना है।

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उन्होंने आरोप लगाया, 'अभी तक इस परियोजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता वह दक्षता रही है जिसके साथ लागत को बढ़ाया गया है और परियोजनाओं को प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) के करीबी दोस्तों और उनकी पार्टी के चुनावी बॉन्ड दाताओं को सौंप दिया गया है, जैसा कि 2017-21 की अवधि वाली हालिया सीएजी रिपोर्ट में दिखाया गया है।'
 

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कांग्रेस नेता ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने तेलंगाना में सूर्यापेट और खम्मम के बीच 250 किलोमीटर की चार-लेन परियोजना एक कंसोर्टियम को सौंपी थी, जिसमें 74 प्रतिशत कार्य हिस्सेदारी के साथ अडाणी ट्रांसपोर्ट प्रमुख भागीदार था।
 

उन्होंने कहा कि कैग के अनुसार अडाणी ट्रांसपोर्ट ने राजमार्ग निर्माण के पांच साल के अनुभव के संदर्भ में ‘प्रस्ताव के लिए अनुरोध’ की शर्त को पूरा नहीं किया है।
 

उन्होंने आरोप लगाया, “बोली लगाने के लिए पूरी तरह से अयोग्य होने के बावजूद अडाणी ट्रांसपोर्ट को एक बार फिर मोदी के जादू का फायदा हुआ।” उन्होंने कहा कि एनएचएआई ने 20 फरवरी, 2019 को घोषणा की कि अडाणी ट्रांसपोर्ट बोली लगाने के लिए योग्य है (बिना कारण बताए) और आठ मार्च, 2019 को 1,566 करोड़ रुपये की लागत पर परियोजना अडाणी के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को सौंप दी गई।
 

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘अन्य परियोजनाएं भाजपा से मजबूत संबंध रखने वाली एक कंपनी को और चार अन्य कंपनियों को प्रदान की गईं, जो भाजपा की प्रमुख चंदा दाता रही हैं, जैसा कि पार्टी के अपने वित्तीय विवरणों में दिखाया गया है।’’
 

रमेश ने कहा कि इससे कई सवाल उठते हैं जैसे कि क्या मोदी सरकार द्वारा नियंत्रित एनएचएआई द्वारा इन परियोजनाओं को आवंटित करने के पीछे कोई लेन-देन नहीं है? क्या भाजपा पिछले नौ वर्षों के दौरान चंदा देने वालों की पूरी सूची जारी करेगी? रमेश ने आरोप लगाया कि कैग की रिपोर्ट ने मोदी सरकार में गहरे तक व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रकाश डाला है।

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