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Smart City: मोदी सरकार देगी 32 लाख लोगों को नौकरी, देखें, किन शहरों के लोगों को मिलेगा ये मौका
सार
औद्योगिक शहरों की योजना में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और आगरा जैसे शहर शामिल हैं। इससे धार्मिक नगरी प्रयागराज के स्थानीय कौशल को औद्योगिक ढांचा प्रदान करने में मदद मिलेगी। आगरा के चमड़ा उद्योग की शिथिलता भी औद्योगिक विकास से जुड़ने पर पुनर्जीवित हो सकेगी।
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- फोटो : https://www.pmindia.gov.in/en/image-gallery/
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विस्तार
केंद्र सरकार ने मोदी 1.0 से ही मूलभूत ढांचे में भारी निवेश को विकास के लिए अपना मूलमंत्र बना रखा है। आज जब केंद्र सरकार देश को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है, आज भी उसने मूलभूत ढांचे में निवेश को ही प्राथमिकता देना जारी रखा है।
बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में जिन 12 औद्योगिक स्मार्ट शहरों को बनाने की बात कही गई है, उससे देश के प्रमुख क्षेत्रों को औद्योगिक विकास से जोड़ने की कोशिश की गई है। इसमें 28,500 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया है। सरकार का दावा है कि इससे 12 लाख प्रत्यक्ष और लगभग 20 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के निर्माण का भी दावा किया गया है। इससे बेरोजगारी को कम करने में मदद मिलेगी। इन औद्योगिक शहरों के विकास के बाद नई औद्योगिक इकाइयों के जरिये स्थाई रोजगार के निर्माण को भी बल मिलेगा।
औद्योगिक शहरों की योजना में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और आगरा जैसे शहर शामिल हैं। इससे धार्मिक नगरी प्रयागराज के स्थानीय कौशल को औद्योगिक ढांचा प्रदान करने में मदद मिलेगी। आगरा के चमड़ा उद्योग की शिथिलता भी औद्योगिक विकास से जुड़ने पर पुनर्जीवित हो सकेगी। बिहार के गया को एक बार फिर उसके पुराने टेक्सटाइल उद्योग की ताकत दिलाने की योजना है, लेकिन इसके साथ-साथ क्षेत्र को इंजीनियरिंग और कृषि उत्पादन को भी उद्योगों से जोड़ने की योजना है। इससे पूर्वांचल के इलाके में नई तकनीक में दक्ष हो रहे युवाओं को आधुनिक नौकरियों के अवसर मिलेंगे।
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इसके पहले केंद्र सरकार ने देश में सौ स्मार्ट शहरों का निर्माण करने की योजना बनाई थी। सरकार का दावा है कि इन शहरों में विकास कार्यों में लगातार प्रगति हो रही है। इनका लाभ शहरों के लोगों को मिल रहा है, साथ ही इसके कारण अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है। अब औद्योगिक शहरों का निर्माण कर विभिन्न क्षेत्रों को औद्योगिक विकास का हिस्सेदार बनाने की योजना है। केंद्र सरकार ने यूपी बिहार के साथ साथ उत्तराखंड, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, केरल और पश्चिम बंगाल के एक दर्जन शहर शामिल हैं। इनमें उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक के राज्य शामिल हैं। इनमें भाजपा शासित प्रदेशों के साथ साथ सहयोगी और विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य भी शामिल हैं। यह बात इस अर्थ में महत्वपूर्ण है कि पिछले दिनों विपक्षी दलों ने आरोप लगाया जाता था कि सरकार विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों से निवेश में भेदभाव कर रही है।
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार ने आर्थिक विकास का जो लक्ष्य रखा है, उसे हासिल करने के केंद्र के पास केवल दो रास्ते हैं। पहला यह कि वह मूलभूत ढांचे में भारी निवेश कर अर्थव्यवस्था की गति बनाये रखे। इसके साथ-साथ उसे निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने की नीति अपनानी होगी जिससे युवाओं को स्थाई रोजगार दिया जा सके।
इसके अलावा उसे विकसित देशों की अर्थव्यवस्था का मूलमंत्र 'सेवाओं के अवसरों में वृद्धि' करनी होगी। उनका मानना है कि औद्योगिक शहरों के निर्माण का जो खाका सरकार ने पेश किया है, उसमें ये दोनों महत्वपूर्ण पहलू एक साथ हासिल करने का लक्ष्य दिखाई दे रहा है। लेकिन सरकार को यह ध्यान रखना होगा कि ये लक्ष्य तभी हासिल होंगे जब इन योजनाओं को ईमानदारी से जमीन पर उतारा जाए।
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बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में जिन 12 औद्योगिक स्मार्ट शहरों को बनाने की बात कही गई है, उससे देश के प्रमुख क्षेत्रों को औद्योगिक विकास से जोड़ने की कोशिश की गई है। इसमें 28,500 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान लगाया गया है। सरकार का दावा है कि इससे 12 लाख प्रत्यक्ष और लगभग 20 लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के निर्माण का भी दावा किया गया है। इससे बेरोजगारी को कम करने में मदद मिलेगी। इन औद्योगिक शहरों के विकास के बाद नई औद्योगिक इकाइयों के जरिये स्थाई रोजगार के निर्माण को भी बल मिलेगा।
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औद्योगिक शहरों की योजना में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और आगरा जैसे शहर शामिल हैं। इससे धार्मिक नगरी प्रयागराज के स्थानीय कौशल को औद्योगिक ढांचा प्रदान करने में मदद मिलेगी। आगरा के चमड़ा उद्योग की शिथिलता भी औद्योगिक विकास से जुड़ने पर पुनर्जीवित हो सकेगी। बिहार के गया को एक बार फिर उसके पुराने टेक्सटाइल उद्योग की ताकत दिलाने की योजना है, लेकिन इसके साथ-साथ क्षेत्र को इंजीनियरिंग और कृषि उत्पादन को भी उद्योगों से जोड़ने की योजना है। इससे पूर्वांचल के इलाके में नई तकनीक में दक्ष हो रहे युवाओं को आधुनिक नौकरियों के अवसर मिलेंगे।
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इसके पहले केंद्र सरकार ने देश में सौ स्मार्ट शहरों का निर्माण करने की योजना बनाई थी। सरकार का दावा है कि इन शहरों में विकास कार्यों में लगातार प्रगति हो रही है। इनका लाभ शहरों के लोगों को मिल रहा है, साथ ही इसके कारण अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है। अब औद्योगिक शहरों का निर्माण कर विभिन्न क्षेत्रों को औद्योगिक विकास का हिस्सेदार बनाने की योजना है। केंद्र सरकार ने यूपी बिहार के साथ साथ उत्तराखंड, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, केरल और पश्चिम बंगाल के एक दर्जन शहर शामिल हैं। इनमें उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक के राज्य शामिल हैं। इनमें भाजपा शासित प्रदेशों के साथ साथ सहयोगी और विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्य भी शामिल हैं। यह बात इस अर्थ में महत्वपूर्ण है कि पिछले दिनों विपक्षी दलों ने आरोप लगाया जाता था कि सरकार विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों से निवेश में भेदभाव कर रही है।
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार ने आर्थिक विकास का जो लक्ष्य रखा है, उसे हासिल करने के केंद्र के पास केवल दो रास्ते हैं। पहला यह कि वह मूलभूत ढांचे में भारी निवेश कर अर्थव्यवस्था की गति बनाये रखे। इसके साथ-साथ उसे निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने की नीति अपनानी होगी जिससे युवाओं को स्थाई रोजगार दिया जा सके।
इसके अलावा उसे विकसित देशों की अर्थव्यवस्था का मूलमंत्र 'सेवाओं के अवसरों में वृद्धि' करनी होगी। उनका मानना है कि औद्योगिक शहरों के निर्माण का जो खाका सरकार ने पेश किया है, उसमें ये दोनों महत्वपूर्ण पहलू एक साथ हासिल करने का लक्ष्य दिखाई दे रहा है। लेकिन सरकार को यह ध्यान रखना होगा कि ये लक्ष्य तभी हासिल होंगे जब इन योजनाओं को ईमानदारी से जमीन पर उतारा जाए।
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