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क्यों फ्लाइट्स के लिए खतरा बनते हैं पावर बैंक: पहले कब हुईं फटने की घटनाएं, भारत में साथ ले जाने के क्या नियम?

Tue, 05 May 2026 08:37 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 05 May 2026 08:37 PM IST
सार

इंडिगो की हैदराबाद से चंडीगढ़ आ रही फ्लाइट में पावर बैंक फटने से हड़कंप मच गया। बताया गया है कि पावर बैंक में आग लगने और इसके बाद हुए धमाके से फ्लाइट के अंदर भगदड़ मच गई। इस दौरान इमरजेंसी गेट खुला और वहां से कुछ यात्री नीचे उतरने लगे।

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Indigo Flight Power Bank Blast How and Why mechanism of Lithium Ion Battery know DGCA FAA ICAO Rules incidents
इंडिगो की हैदराबाद से चंडीगढ़ आ रही फ्लाइट में हुआ धमाका। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंडिगो की एक फ्लाइट में मंगलवार को बड़ा हादसा टल गया। दरअसल, हैदराबाद से चंडीगढ़ आ रही इंडिगो की फ्लाइट 6ई108 में लैंडिंग के दौरान अंदर ही पावर बैंक फट गया। यह घटना मोहाली स्थित शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दोपहर के बाद हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में पांच लोग घायल हुए हैं। हालांकि, घायलों की संख्या अभी बढ़ने की संभावना है। 
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मोहाली में पावर बैंक के फटने की इस घटना के बाद से ही देशभर में इस बात को लेकर हलचल है कि आखिर विमान में इस तरह का हादसा कैसे और क्यों हो सकता है? क्या इसे लेकर विमानन सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों ने कुछ नियम बनाए हैं? भारत में लोगों के पावर बैंक साथ ले जाने के क्या नियम बनाए गए हैं? आइये जानते हैं...
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क्या पावर बैंक फ्लाइट के लिए खतरा है?

विमानों में पावर बैंक को विस्फोटक नहीं माना जाता। हालांकि, इन्हें एक संभावित खतरे के तौर पर देखा जाता है। दरअसल, पावर बैंक में ऊर्जा को सुरक्षित स्टोर करने के लिए आम मोबाइल फोन की बैटरी क्षमता से भी बड़ी एक बैटरी होती है। यही बैटरी अपनी क्षमता के मुताबिक इतनी ज्यादा ऊर्जा को स्टोर करती है, जो कि मोबाइल को दो से चार बार तक चार्ज कर सकता है। जैसे 10 हजार एमएएच क्षमता वाले पावर बैंक आम 4000-6000 एमएएच बैटरी क्षमता वाले फोन को एक से दो बार चार्ज कर देते हैं। वहीं 20,000 एमएएच क्षमता वाले पावर बैंक यह काम ज्यादा बार कर सकते हैं। 
 

हालांकि, इनमें इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी असल चिंता का कारण बनती है। इसी वजह से विमानन अधिकारियों और एयरलाइंस द्वारा इन पर बहुत कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। दरअसल, पावर बैंक की लिथियम-आयन बैटरी में ऐसे तरल पदार्थ और हिस्से होते हैं जो जबरदस्त रूप से सक्रिय और ज्वलनशील होते हैं। 

बैटरी के बहुत अधिक गर्म होने, ओवरचार्ज होने, निर्माण में कुछ गड़बड़ी, पुराने होने या दबने/टूटने के कारण थर्मल रनअवे नाम की एक चेन रिएक्शन शुरू हो सकती है, जिससे बैटरी का तापमान अनियंत्रित रूप से बढ़ता है और उसमें विस्फोट या आग लग सकती है। सस्ते पावर बैंकों में ओवरचार्जिंग को रोकने के लिए कोई आंतरिक सुरक्षा प्रणाली (जैसे ट्रिकल सिस्टम) नहीं होती, जिससे इनका जोखिम और बढ़ जाता है।

क्यों विमान के अंदर बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकते हैं पावर बैंक?

लिथियम बैटरी से लगने वाली आग बेहद तीव्र और सेल्फ-सस्टेनिंग यानी खुद से ही जलती रहने वाली होती है, जिसे सामान्य तरीकों से बुझाना बहुत मुश्किल होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस आग पर पानी डालना खतरनाक हो सकता है। 

इतना ही नहीं, विमान के केबिन जैसी बंद जगह में यह आग विशेष रूप से खतरनाक होती है, क्योंकि इसके जलने से अत्यधिक जहरीली गैसें निकलती हैं। हवा में उड़ते हुए विमान को तुरंत खाली करना असंभव हो सकता है, इसलिए यह स्थिति यात्रियों और चालक दल के लिए जानलेवा बन सकती है।

फ्लाइट में पावर बैंक ले जाने के क्या हैं अंतरराष्ट्रीय नियम?

विमानन सुरक्षा से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने पावर बैंकों से होने वाले आग और थर्मल रनअवे के खतरों को देखते हुए कई सख्त नियम बनाए हैं। 




दक्षिण कोरिया के नए नियमों के तहत यात्रियों को पावर बैंक अपनी सीट की जेब में या सीट के नीचे रखना होगा और शॉर्ट सर्किट से बचने के लिए इसके सॉकेट्स (टर्मिनल्स) को टेप या प्लास्टिक पाउच से कवर करके रखना होगा।
 

क्या भारत में भी पावर बैंक को लेकर कोई नियम?

भारत में विमानन नियामक संस्था नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पावर बैंक और लिथियम बैटरी वाले अन्य उपकरणों को लेकर कड़े सुरक्षा नियम लागू किए हैं। 

1. केवल हैंड लगेज में ले जाने की अनुमति
पावर बैंक और अतिरिक्त (स्पेयर) लिथियम बैटरी को आप केवल अपने हैंड लगेज (कैरी-ऑन बैग) में ही ले जा सकते हैं। इन्हें चेक-इन लगेज यानी कार्गो में जाने वाले बड़े बैग में रखना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

2. ओवरहेड कंपार्टमेंट में रखने पर सख्त रोक
पावर बैंक को विमान में यात्रियों की सीट के ऊपर बने ओवरहेड कंपार्टमेंट में नहीं रखा जा सकता। डीजीसीए का मानना है कि वहां रखे बैग के अंदर अगर बैटरी में आग लगती है या धुआं उठता है, तो क्रू सदस्यों और यात्रियों को इसका तुरंत पता लगाने में देरी हो सकती है, जिससे स्थिति जानलेवा बन सकती है।

3. उड़ान के दौरान चार्जिंग और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध
उड़ान के दौरान पावर बैंक का उपयोग करके मोबाइल या कोई भी अन्य गैजेट चार्ज करना पूरी तरह से मना है। इसके अलावा, विमान की सीट में दिए गए पावर आउटलेट (प्लग) का इस्तेमाल करके भी डिवाइस चार्ज करने पर रोक है। 

4. यात्रियों के लिए तत्काल रिपोर्टिंग का नियम
नियमों के अनुसार, अगर यात्री के पावर बैंक या किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से अत्यधिक गर्मी, धुआं या कोई अजीब गंध आती है, तो यात्री को तुरंत केबिन क्रू को इसकी सूचना देनी होगी।

5. एयरलाइंस और हवाई अड्डों के लिए अनिवार्य निर्देश
  • एयरलाइंस के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे उड़ान के दौरान यात्रियों को इन सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए घोषणाएं लगातार करें। 
  • हवाई अड्डों को निर्देश दिए गए हैं कि वे टर्मिनल एंट्री, चेक-इन काउंटर, सुरक्षा जांच और बोर्डिंग गेट पर लिथियम बैटरी के आग के खतरों के बारे में स्पष्ट संदेश और वीडियो दिखाएं। 
  • हवाई अड्डों और एयरलाइंस को यह भी कहा गया है कि वे यात्रियों को विमान में बोर्डिंग से ठीक पहले पावर बैंक से डिवाइस चार्ज करने से रोकें।

क्या पहले भी हुई हैं फ्लाइट्स में पावर बैंक फटने की घटनाएं?

पिछले साल अक्तूबर में दिल्ली एयरपोर्ट पर दीमापुर जाने के लिए उड़ान भरने की तैयारी (टैक्सीइंग) कर रही इंडिगो की एक फ्लाइट में भी यात्री के पावर बैंक में आग लग गई थी, हालांकि इसमें सभी यात्री सुरक्षित रहे थे।

दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पावर बैंक के फ्लाइट में फटने से जुड़ी कई घटनाएं दर्ज हुई हैं। 

जनवरी 2025: दक्षिण कोरिया के गिमहे इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एयर बुसान के एक विमान में टेकऑफ के इंतजार के दौरान आग लग गई थी। जांच से पता चला कि यह आग संभवतः पावर बैंक की बैटरी के अंदर इंसुलेशन के टूटने के कारण लगी थी।

जुलाई 2025: सिडनी से उड़ान भरने वाली 'वर्जिन ऑस्ट्रेलिया' की एक फ्लाइट में यात्री के 'कैरी-ऑन' लगेज (हैंड बैग) में रखे पावर बैंक के कारण आग लग गई थी। 

इसके अलावा चीन के हांगझोऊ से हांगकांग एयरलाइंस की एक उड़ान को अपना रास्ता बदलना पड़ा था, क्योंकि विमान के 'ओवरहेड कम्पार्टमेंट' में रखे एक पोर्टेबल चार्जिंग डिवाइस के कारण आग लग गई थी।

अमेरिका के संघीय उड्डयन प्रशासन (एफएए) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो दशकों में विमानों के अंदर लिथियम बैटरी से जुड़े धुएं, आग या अत्यधिक गर्मी के 500 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। 


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