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Cyber Attack: ऑनलाइन ठग रहें सावधान, फर्जी दस्तावेजों पर जारी सिम को पकड़ेगा स्वदेशी 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस'
Wed, 12 Mar 2025 05:20 PM IST
शिव शुक्ला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: शिव शुक्ला
Updated Wed, 12 Mar 2025 05:20 PM IST
सार
फिशिंग हमले के जरिए ठगों द्वारा लोगों के बैंकिंग पासवर्ड, उनका नाम, बैंक खाता जानकारी, क्रेडिट कार्ड नंबर और अन्य जानकारी चुराने का प्रयास किया जाता है। फिशिंग के जरिए ईमेल, टेक्स्ट मैसेज, फोन कॉल और कम्युनिकेशन के दूसरे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया जाता है।
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साइबर अपराध (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : फ्री-पिक
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विस्तार
साइबर अपराधी, ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम देने के लिए नए नए तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' भी एक अहम टूल है। फिशिंग हमलों से लोगों की सीक्रेट जानकारी चुराने में 'एआई' की मदद ली जा रही है। इसमें बैंक खाते का पासवर्ड, उपयोगकर्ता का नाम, क्रेडिट कार्ड नंबर और दूसरी अहम जानकारी शामिल है। द इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम द्वारा रिपोर्ट और ट्रैक की गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021, 2022, 2023 और 2024 के दौरान क्रमश: 523, 1714, 869 और 785 फिशिंग घटनाएं देखी गई हैं। एआई से ऑनलाइन ठगी करने वाले अब सावधान हो जाएं। फर्जी दस्तावेजों पर जारी सिम को पकड़ने के लिए स्वदेशी 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' तैयार किया गया है। इस काम में स्वदेशी 'एआई' के साथ बिग डेटा एनालिटिक्स टूल को भी शामिल किया गया है।
बता दें कि फिशिंग हमले के जरिए ठगों द्वारा लोगों के बैंकिंग पासवर्ड, उनका नाम, बैंक खाता जानकारी, क्रेडिट कार्ड नंबर और अन्य जानकारी चुराने का प्रयास किया जाता है। फिशिंग, यह भी एक साइबर हमला होता है। इसके जरिए ईमेल, टेक्स्ट मैसेज, फोन कॉल और कम्युनिकेशन के दूसरे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया जाता है। संसद सत्र में बुधवार को लोकसभा सदस्य प्रभाकर रेड्डी वेमिरेड्डी ने संचार मंत्री से सवाल पूछा था कि क्या मैकफी द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार 82 प्रतिशत लोग फर्जी संदेशों का शिकार हो रहे हैं। क्या यह भी सच है कि फिशिंग और टेक्सट मैसेज घोटाले बढ़ रहे हैं। सरकार, हाल की इस प्रवृत्ति को किस प्रकार देखती है कि ऑनलाइन जालसाज लक्ष्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का व्यापक रूप से उपयोग कर रहे हैं। इस खतरे से निपटने के लिए कोई योजना बना रहे हैं। क्या सरकार ने फरवरी 2025 के तीसरे सप्ताह के दौरान स्पैम कॉल के संबंध में कुछ दिशा निर्देश जारी किए हैं। अगर हां तो इसके जरिए साइबर घोटालों से लोगों को किस हद तक मदद मिलेगी।
संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने बताया, कुछ संगठनों द्वारा उनकी ओर से प्रकाशित अध्ययनों को सरकार द्वारा न तो वैद्यता प्रदान की जाती है और न ही प्रमाणित किया जाता है। कार्य आवंटन नियमावली के अनुसार, साइबर अपराध से संबंधित मामले गृह मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं। दूरसंचार विभाग, साइबर धोखाधड़ी के लिए दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के प्रयास कर रहा है। इसके अलावा भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, 'पुलिस और लोक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र '14सी' की स्थापना की है।
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द इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम द्वारा रिपोर्ट की गई और ट्रैक की गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021, 2022, 2023 और 2024 के दौरान क्रमश: 523, 1714, 869 और 785 फिशिंग घटनाएं देखी गई। आजकल जालसाज नए तरीकों का उपयोग कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 'एआई' उनमें से एक है। इस समस्या से निपटने के लिए विभिन्न कदम उठाए जाते हैं। इनमें जाली दस्तावेजों के आधार पर लिए गए सिम की पहचान करने के मकसद से स्वदेशी एआई और बिग डेटा एनालिटिक्स टूल का विकास शामिल है।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण 'ट्राई' ने 12 फरवरी 2025 को अवांछित वाणिज्यिक संचार 'यूसीसी' के विरूद्ध उपभोक्ता सुरक्षा को और ज्यादा सशक्त करने के लिए दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता विनियम 'टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशन कस्टमर प्रेफरेंस रेगुलेशन' 2018 में संशोधन किया है। संशोधित विनियमों का मकसद, दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग के बदलते हुए तरीकों से निपटना और उपभोक्ताओं के लिए अधिक पारदर्शी वाणिज्यिक संचार इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है।
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बता दें कि फिशिंग हमले के जरिए ठगों द्वारा लोगों के बैंकिंग पासवर्ड, उनका नाम, बैंक खाता जानकारी, क्रेडिट कार्ड नंबर और अन्य जानकारी चुराने का प्रयास किया जाता है। फिशिंग, यह भी एक साइबर हमला होता है। इसके जरिए ईमेल, टेक्स्ट मैसेज, फोन कॉल और कम्युनिकेशन के दूसरे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया जाता है। संसद सत्र में बुधवार को लोकसभा सदस्य प्रभाकर रेड्डी वेमिरेड्डी ने संचार मंत्री से सवाल पूछा था कि क्या मैकफी द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार 82 प्रतिशत लोग फर्जी संदेशों का शिकार हो रहे हैं। क्या यह भी सच है कि फिशिंग और टेक्सट मैसेज घोटाले बढ़ रहे हैं। सरकार, हाल की इस प्रवृत्ति को किस प्रकार देखती है कि ऑनलाइन जालसाज लक्ष्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का व्यापक रूप से उपयोग कर रहे हैं। इस खतरे से निपटने के लिए कोई योजना बना रहे हैं। क्या सरकार ने फरवरी 2025 के तीसरे सप्ताह के दौरान स्पैम कॉल के संबंध में कुछ दिशा निर्देश जारी किए हैं। अगर हां तो इसके जरिए साइबर घोटालों से लोगों को किस हद तक मदद मिलेगी।
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संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने बताया, कुछ संगठनों द्वारा उनकी ओर से प्रकाशित अध्ययनों को सरकार द्वारा न तो वैद्यता प्रदान की जाती है और न ही प्रमाणित किया जाता है। कार्य आवंटन नियमावली के अनुसार, साइबर अपराध से संबंधित मामले गृह मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं। दूरसंचार विभाग, साइबर धोखाधड़ी के लिए दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के प्रयास कर रहा है। इसके अलावा भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, 'पुलिस और लोक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र '14सी' की स्थापना की है।
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द इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम द्वारा रिपोर्ट की गई और ट्रैक की गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021, 2022, 2023 और 2024 के दौरान क्रमश: 523, 1714, 869 और 785 फिशिंग घटनाएं देखी गई। आजकल जालसाज नए तरीकों का उपयोग कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस 'एआई' उनमें से एक है। इस समस्या से निपटने के लिए विभिन्न कदम उठाए जाते हैं। इनमें जाली दस्तावेजों के आधार पर लिए गए सिम की पहचान करने के मकसद से स्वदेशी एआई और बिग डेटा एनालिटिक्स टूल का विकास शामिल है।
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण 'ट्राई' ने 12 फरवरी 2025 को अवांछित वाणिज्यिक संचार 'यूसीसी' के विरूद्ध उपभोक्ता सुरक्षा को और ज्यादा सशक्त करने के लिए दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता विनियम 'टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशन कस्टमर प्रेफरेंस रेगुलेशन' 2018 में संशोधन किया है। संशोधित विनियमों का मकसद, दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग के बदलते हुए तरीकों से निपटना और उपभोक्ताओं के लिए अधिक पारदर्शी वाणिज्यिक संचार इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है।