खान-पान में भारतीय बेहद शौकीन, खर्च करने के मामले में हैं न्यूयॉर्क से आगे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 17 Oct 2020 05:36 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

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भारतीय खाने-पीने के मामले में बेहद शौकीन होते हैं। भारतीयों के खाने-पीने पर खर्च की तुलना न्यूयॉर्क से करने पर हैरान करने वाले परिणाम सामने आए हैं। जहां औसनत भारतीय हर दिन अपनी दैनिक आय का 3.5 प्रतिशत खाने की थाली पर खर्च करते हैं।
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वहीं न्यूयॉर्क के नागरिक औसतन अपनी दैनिक आय का 0.6 प्रतिशत ही खाने की थाली पर खर्च करते हैं, जो भारतीय की तुलना में बेहद कम है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) द्वारा शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। 
रिपोर्ट के अनुसार, भोजन की सबसे मंहगी थाली दक्षिणी सूडान की है, जहां लोगों को औसतन अपनी दैनिक आय का 186 प्रतिशत जरूरी सामग्री पर खर्च करना होता है। खाने पर खर्च को लेकर दुनिया के 36 देशों की सूची में भारत 28वें स्थान पर है। रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय हर दिन भोजन की थाली पर अपनी दैनिक आय का 3.5 प्रतिशत खर्च करते हैं। वहीं न्यूयॉर्क के नागरिक हर दिन अपनी भोजन की थाली पर अपनी दैनिक आय का 0.6 प्रतिशत ही खर्च करते हैं। 
रिपार्ट में सामने आया कि उप-सहारा अफ्रीका के देश इस क्षेत्र में शीर्ष 20 में से 17वें स्थान पर हैं। इसमें कहा गया कि इन देशों में ज्यादातर खाद्य सामग्री बाहर से आयात की जाती है, जो आर्थिक रूप से विश्व में इन देशों को कमजोर बनाती है। इसके चलते इन देशों में भुखमरी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। श्रमिकों के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो जाता है। 

जलवायु परिवतर्न ने बढ़ाई मुश्किलें : 
रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील और विकसित देशों में रहने वाले लोगों की दैनिक आय का भोजन पर खर्च करने को लेकर भारी असमानताएं हैं। विकासशील देशों के नागरिकों को विकसित देशों की अपेक्षा भोजन के लिए अधिक श्रम करना पड़ता है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन ने कई देशों में लोगों का भोजन के प्रति संघर्ष और बढ़ा दिया है।

जिन देशों में लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है, वहां जलवायु परिवर्तन के चलते उपज कम हो रही है। वहीं ये लोग परिवार को खिलाने के लिए अनाज व अन्य खाद्य सामग्री खरीदने में असमर्थ होते हैं। अब वैश्विक महामारी कोरोना वायरस कम आय वाले श्रमिकों के सामने नई चुनौतियां दी हैं। बढ़ती बेरोजगारी, आर्थिक मंदी और कारोबारों के ठप रहने के चलते लोगों को पौष्टिक भोजन जुटाने मुश्किल हो रही है। 
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