{"_id":"5b4e95564f1c1b3a748b565c","slug":"indians-are-turning-to-the-eb-5-visa-because-of-america-s-strictness","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमेरिका की सख्ती के चलते भारतीयों का रुख ईबी-5 वीजा की तरफ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
अमेरिका की सख्ती के चलते भारतीयों का रुख ईबी-5 वीजा की तरफ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 18 Jul 2018 06:48 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ट्रंप सरकार की ओर से वीजा नियमों में बरती जा रही सख्ती के बीच भारतीयों में अमेरिका में बसने और कारोबार करने की इच्छा रखने को लेकर ईबी-5 वीजा का आकर्षण बढ़ रहा है। कैनएम वित्तीय सेवा फर्म के मुताबिक ईबी-5 वीजा के तहत ग्रीन कार्ड पाने के लिए वित्त वर्ष 2017-18 में 700 भारतीयों ने भारी निवेश किया है। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति को 5 लाख से 10 लाख डॉलर का निवेश करना होता है। साथ ही कम से कम 10 नौकरियां भी पैदा करनी अनिवार्य होती हैं।
विज्ञापन
अमेरिका के ईबी-5 वीजा के तहत निवेश करने वाले विदेशी नागरिकों और उनके परिवार (उनके 21 वर्ष तक के बच्चे) को ग्रीन कार्ड और स्थायी निवास उपलब्ध कराया जाता है। पिछले वित्त वर्ष में सात सौ में से 100 के करीब भारतीयों को ईबी-5 वीजा मुहैया कराने वाले क्षेत्रीय केंद्र कैनएम निवेशक सेवा के उपाध्यक्ष अभिनव लोहिया ने कहा कि 2016 में ईबी-5 के जरिए 50 निवेशक प्राप्त हुए थे, जो 2017 में बढ़कर 97 हो गए।
विज्ञापन
इस साल इनके 200 तक पहुंचने की उम्मीद है। उन्होंने अनुमान जताया है कि 2017-18 (अक्तूबर-सितंबर) में ईबी-5 वीजा के लिए आवेदन करने वाले भारतीयों की कुल संख्या बढ़कर हजार से भी अधिक हो सकती है।
विज्ञापन
दिल्ली, मुंबई से सबसे अधिक आवेदक :
फर्म के मुताबिक इस प्रकार के वीजा के लिए आवेदन करने वाले भारतीयों में सबसे ज्यादा आवेदक मुंबई, दिल्ली और बंगलूरू के होते हैं। वहीं निवेश के सबसे अधिक प्रस्ताव जमीन जायदाद क्षेत्र से संबंधित होते हैं।
इन कारणों से बढ़े आवेदन :
फर्म के मुताबिक वित्त वर्ष 2014-15 में अमेरिकी सरकार को जहां 239 भारतीयों के आवेदन मिले थे वहीं वित्त वर्ष 2015-16 में यह संख्या बढ़कर 354 हो गई। फर्म के मुताबिक ईबी-5 आवेदनों की संख्या तेजी से बढ़ने की दो वजह हैं। पहला ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी पर नई नीति लाने के संकेत और दूसरा ईबी-5 वीजा के तहत निवेश की राशि 5 लाख डॉलर से बढ़ाकर 9,25,000 डॉलर किये जाने की संभावना।
चीन को पीछे छोड़ेगा भारत :
ईबी-5 वीजा के लिये आवेदन करने वालों की संख्या के लिहाज से भारत तीसरा सबसे बड़ा देश है। जल्द ही उसके दूसरे पायदान पर पहुंचने की संभावना है। मौजूदा समय पहले स्थान पर चीन और दूसरे पर वियतनाम है।