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आधी आबादी: भारत में महिला शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ी, जापान-मिस्र को पीछे छोड़ दुनिया में तीसरे नंबर पर आया देश

Sat, 22 Jun 2024 05:22 AM IST
दीपक कुमार शर्मा एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 22 Jun 2024 05:22 AM IST
सार

भारत में पिछले 10 वर्षों में सक्रिय महिला शोधकर्ताओं की संख्या प्रति वर्ष 2 फीसदी की दर से बढ़ रही है। इस अवधि के दौरान केवल मिस्र और नीदरलैंड्स में महिला शोधकर्ताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई है।

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Indian women researchers number increased Japan and Egypt leaving behind and india came third in world
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत में महिला शोधकर्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इस वृद्धि में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है। बावजूद, शोध क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर लैंगिक असमानता के चलते पुरुषों के मुकाबले अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

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वैज्ञानिक सूचना प्रसारक एल्सेवियर ने ‘शोध और नवाचार में लैंगिक समानता की दिशा में प्रगति - 2024 की समीक्षा’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में यह खुलासा किया है। एल्सेवियर इंडिया में अनुसंधान एवं शैक्षणिक मामलों के उपाध्यक्ष प्रोफेसर संदीप संचेती के मुताबिक, भारत में महिला शोधकर्ताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि लैंगिक समानता के लिए चल रहे प्रयासों को उजागर करती है और यह वास्तव में उत्साहजनक है। उनका कहना है कि हालांकि, हमने अधिक समावेशी शैक्षणिक वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। 
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भारत में 10 वर्षों में 2 फीसदी वार्षिक दर से बढ़ी संख्या
भारत में पिछले 10 वर्षों में सक्रिय महिला शोधकर्ताओं की संख्या प्रति वर्ष 2 फीसदी की दर से बढ़ रही है। इस अवधि के दौरान केवल मिस्र और नीदरलैंड्स में महिला शोधकर्ताओं की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट में 20 वर्षों में कई विषयों और भौगोलिक क्षेत्रों में समावेश और विविधता का विश्लेषण करते हुए पाया गया कि भारत में अब महिलाएं सक्रिय शोधकर्ताओं का 33 प्रतिशत हिस्सा हैं। वहीं, जापान में यह 22 प्रतिशत और मिस्र में 30 प्रतिशत है। इसमें कहा गया है कि भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा शोध उत्पादक देश है।
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स्वास्थ्य विज्ञान में ज्यादा  सक्रियता
स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में भारत में 2022 में शोधकर्ताओं की संख्या में पुरुषों और महिलाओं की संख्या लगभग समान हो गई। सभी सक्रिय शोधकर्ताओं में से 41 प्रतिशत महिलाएं थीं। यह 40-60 प्रतिशत के बीच का संतुलन या लिंग समानता के तौर पर माना जाता है। वहीं,देश में जीवन विज्ञान के शोध क्षेत्र में लैंगिक समानता 2021 में हासिल कर ली गई थी। जीवन विज्ञान में 2022 तक महिला शोधकर्ताओं ने सक्रिय शोधकर्ताओं के 43 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व किया। उधर,वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य विज्ञान शोध के क्षेत्र में 2022 तक सक्रिय शोधकर्ताओं में महिला शोधकर्ताओं का हिस्सा 41 रहा। यह महिलाओं का स्वास्थ्य विज्ञान में मजबूत प्रतिनिधित्व था।

पेटेंट में पीछे है आधी आबादी
रिपोर्ट बताती है कि महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले बहुत कम पेटेंट आवेदन भी दायर किए हैं। साल 2022 तक किए पेटेंट आवेदनों में से तीन-चौथाई या तो अकेले पुरुषों ने या केवल पुरुषों वाली टीमों ने दायर किए गए हैं। लगभग सभी पेटेंट दाखिल करने वाली टीमों (97 प्रतिशत) में कम से कम एक पुरुष है। इसके उलट, 2022 तक केवल तीन प्रतिशत पेटेंट आवेदन केवल महिलाओं वाली टीमों ने दायर किए गए हैं।

यूएन में महिला शोधकर्ता सबसे अधिक
रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों पर काम करने वाले सक्रिय शोधकर्ताओं में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक है। वैश्विक स्तर पर जटिल चुनौतियों को हल करने के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले बहु-विषयक शोध में पुरुषों के मुकाबले में महिलाओं की संख्या थोड़ी अधिक है।


शोध में 2052 तक समग्र लैंगिक समानता की उम्मीद नहीं
रिपोर्ट बताती हैं कि बीते दो दशकों में महिलाओं ने शोध के क्षेत्र में प्रगति की है, लेकिन सभी क्षेत्रों में समान नहीं रही है। उदाहरण के लिए, भौतिक विज्ञान में सक्रिय शोधकर्ताओं में महिलाओं की संख्या महज 33 प्रतिशत ही है। रिपोर्ट कहती है कि वर्तमान दर पर वैश्विक स्तर पर शोध में लैंगिक समानता अभी दूर की कौड़ी है। अनुमान लगाया गया है कि शोध के क्षेत्र गणित, इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान में महिला शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ रही है। बावजूद इसके 2052 तक पूरी तरह से लैंगिक समानता की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

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