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Fraud: कनाडा में धोखाधड़ी के शिकार भारतीय छात्र निर्वासन आदेश के खिलाफ रख सकेंगे पक्ष, जानिये मामला
Tue, 30 May 2023 06:06 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Tue, 30 May 2023 06:06 AM IST
सार
कनाडाई इमिग्रेशन मंत्री शॉन फ्रेजर ने कहा, हम धोखाधड़ी की हालिया रिपोर्टों की जांच कर रहे हैं। हमारा ध्यान दोषियों की पहचान करने पर है, न कि पीड़ितों को दंड देने पर।
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धोखाधड़ी (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कनाडा में धोखाधड़ी के शिकार हुए अंतरराष्ट्रीय छात्रों को निर्वासन के खिलाफ अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। कुछ समय पहले कनाडा की सीमा सुरक्षा एजेंसी ने 700 से अधिक भारतीय छात्रों को निर्वासन नोटिस दिया था। शैक्षणिक संस्थानों में जमा इन छात्रों के प्रवेश पत्र फर्जी पाए गए थे।
कनाडाई इमिग्रेशन मंत्री शॉन फ्रेजर ने कहा, हम धोखाधड़ी की हालिया रिपोर्टों की जांच कर रहे हैं। हमारा ध्यान दोषियों की पहचान करने पर है, न कि पीड़ितों को दंड देने पर। धोखाधड़ी के शिकार लोगों को अपनी स्थिति प्रदर्शित करने और अपने मामले का समर्थन करने के लिए सबूत रखने का अवसर मिलेगा।
2018-2022 के दौरान फर्जी आवेदन मिले
जालंधर स्थित स्टडी फॉरेन फर्म को 2018 और 2022 के बीच छात्रों के 700 फर्जी वीजा आवेदनों की फाइलें मिली हैं। एक बार जब छात्र कनाडा में पहुंच गए तो उनको कॉलेजों में सीटें नहीं मिलीं और छोटे-मोटे कॉलेजों में प्रवेश लेना पड़ा।
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ये है मामला
सभी भारतीय छात्र 3 वर्ष पूर्व छात्र वीजा पर कनाडा गए थे। उन्हें धोखाधड़ी का पता तब चला, जब उन्होंने परमानेंट रेजिडेंस के लिए अर्जी दी। जांच में खुलासा हुआ कि संस्थानों के दिए गए शुरुआती ऑफर लेटर फर्जी थे।
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कनाडाई इमिग्रेशन मंत्री शॉन फ्रेजर ने कहा, हम धोखाधड़ी की हालिया रिपोर्टों की जांच कर रहे हैं। हमारा ध्यान दोषियों की पहचान करने पर है, न कि पीड़ितों को दंड देने पर। धोखाधड़ी के शिकार लोगों को अपनी स्थिति प्रदर्शित करने और अपने मामले का समर्थन करने के लिए सबूत रखने का अवसर मिलेगा।
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2018-2022 के दौरान फर्जी आवेदन मिले
जालंधर स्थित स्टडी फॉरेन फर्म को 2018 और 2022 के बीच छात्रों के 700 फर्जी वीजा आवेदनों की फाइलें मिली हैं। एक बार जब छात्र कनाडा में पहुंच गए तो उनको कॉलेजों में सीटें नहीं मिलीं और छोटे-मोटे कॉलेजों में प्रवेश लेना पड़ा।
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ये है मामला
सभी भारतीय छात्र 3 वर्ष पूर्व छात्र वीजा पर कनाडा गए थे। उन्हें धोखाधड़ी का पता तब चला, जब उन्होंने परमानेंट रेजिडेंस के लिए अर्जी दी। जांच में खुलासा हुआ कि संस्थानों के दिए गए शुरुआती ऑफर लेटर फर्जी थे।