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ड्रोन को लेकर सुरक्षा एजेंसियों में नहीं है तालमेल, पाक ने बनाया आतंकियों की घुसपैठ का ये खास प्लान

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 10 Oct 2019 07:45 PM IST
weapons carrying from drone
weapons carrying from drone - फोटो : अमर उजाला
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पाकिस्तान की ओर से भारतीय सीमा में आ रहे ड्रोन को लेकर सुरक्षा एजेंसियां आपस में भिड़ रही हैं। सवाल ये है कि आखिर ड्रोन आने की जानकारी सबसे पहले किस एजेंसी के पास होनी चाहिए। दूसरा, अगर ड्रोन दिख रहा है, तो उसे जब्त करने या मार गिराने की जिम्मेदारी किसके पास है। इन सबके बीच लोकल प्रशासन कहता है कि हमारे पास ड्रोन गिराने की कोई तकनीक नहीं है। हम तो बीएसएफ को कह सकते हैं। वहीं, बीएसएफ की दलील है कि ड्रोन को देख पाने की हमारी एक सीमा है। इस मामले में एयरफोर्स बेहतर कर सकती है।
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उधर, एयरफोर्स की ओर से कहा जाता है कि ड्रोन ज्यादा ऊंचाई पर नहीं होते, इसलिए हमारा रडार वहां तक नहीं पहुंच सकता। गृह मंत्रालय ने इन सब बातों को एक बड़ी लापरवाही मानते हुए विभिन्न एजेंसियों से जवाब तलब किया है। दूसरी ओर पाकिस्तान ने ड्रोन की मदद से घुसपैठ का जो नया प्लान बनाया है, उसका पर्दाफाश हो गया है।

एजेंसियों में तालमेल की कमी

गृह मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि मीडिया में सीमा पार से आने वाले ड्रोन की जो गिनती सामने आ रही है, वह ठीक नहीं है। भारतीय सीमा में दर्जनों ड्रोन आ चुके हैं। जिन इलाकों में इन ड्रोन को देखा गया है, स्थानीय प्रशासन ने वहां के लोगों से भी इस बात की पुष्टि की है। अनेक ड्रोन तो रात के समय आए हैं। सूत्रों के मुताबिक, अभी तक ड्रोन को लेकर ऐसी कोई गाइडलाइंस जारी नहीं हुई हैं। ड्रोन की संख्या बताने, उसे मार गिराने या जब्त करने को लेकर विभिन्न एजेंसियों में तालमेल की भारी कमी है। सीमा सुरक्षा बल के एक अधिकारी का कहना है कि दिन में ड्रोन जैसी कोई भी वस्तु दिखती है, तो हम अपने कंट्रोल रुम को सूचित कर देते हैं। अगर वहां से आदेश आता है तो ड्रोन को मार गिराया जाता है। हालांकि यह सब इतना आसान नहीं है।

रात में ड्रोन पकड़ पाना मुश्किल

अगर ड्रोन पांच सौ मीटर से उपर है, तो उसे पकड़ पाना मुश्किल होता है। रात में हमारे पास ऐसा कोई उपकरण नहीं है, जिससे हम उसे देख सकें या गिराने में सफल हो जाएं। इंटेलीजेंस एजेंसी ने गृह मंत्रालय को दी अपनी रिपोर्ट में साफतौर पर कह दिया है कि ड्रोन के मामले में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां तालमेल नहीं कर पा रही हैं। ड्रोन की सही सूचना एकत्रित नहीं की गई है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई घुसपैठ के अपने मंसूबों में कामयाब हो जाएगी।

पाक का सर्दियों में ड्रोन की मदद से घुसपैठ प्लान

इंटेलीजेंस एजेंसी के सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तानी आईएसआई ने इस बार सर्दियों में ड्रोन की मदद से घुसपैठ की योजना बनाई है। इसके लिए आतंकियों की मददगार बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) को इस काम पर लगाया गया है। बैट दस्ते को जम्मू कश्मीर के अलावा राजस्थान बॉर्डर पर भी भेजा गया है। इन्हें चीन निर्मित हैवी ड्रोन चलाने का प्रशिक्षण मिला है। एक ड्रोन करीब 15 से 18 किलोग्राम तक का वजन लेकर उड़ सकता है। हाल ही में जितने भी ड्रोन मिल रहे हैं, उसे बैट का ही एक अभ्यास कहा जा रहा है।

पिछले माह पंजाब में ड्रोन के जरिए हथियार गिराए गए थे, यह करतूत भी आईएसआई और बैट के दिमाग की उपज थी। सर्दियों में बॉर्डर का वह हिस्सा जहां पर कंटीली तारें नहीं लगी हैं, वहां सेटेलाइट की मदद से ड्रोन के जरिए हथियार गिराने की तैयारी है।

आतंकियों को हथियारों की सप्लाई ड्रोन से

आईएसआई की योजना है कि इस बार आतंकियों को सीधे तौर पर बॉर्डर पार नहीं कराया जाएगा। वजह, ऐसा करने से वे भारतीय सुरक्षा बलों की गोलियों का निशाना बन जाते हैं। पाकिस्तान की ओर से पहले भी ऐसे प्रयास किए गए, लेकिन सीमा के निकट आते ही आतंकी मार गिरा दिए गए या वे वापस भाग गए। ऐसी सूचनाएं मिली है कि इस बार आतंकियों को सीमा पार के खेतों में एक दो माह पहले भेज दिया गया है। पाकिस्तानी सीमा में के निकट जो किसान खेती करते हैं, उनके साथ ये आतंकी घुल मिल गए हैं।

यह सब भारतीय सुरक्षा बलों की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है। जब सर्दियों में कोहरा पड़ेगा तो ये नदी या पहाड़ी के जरिए घुसपैठ करने की कोशिश करेंगे। जैसे ही ये घुसपैठ कर लेंगे, तो ड्रोन के जरिए इनके हथियार भी भेज दिए जाएंगे। गोला बारुद व दूसरी सामग्री भी ड्रोन के जरिए ही पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

कई एजेंसियां ड्रोन पर रखेंगी नजर

एनटीआरओ (राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन) और डीआरडीओ जैसे संगठनों को ड्रोन की जानकारी, उसे पकड़ने वाले रडार और मार गिराने वाला सिस्टम तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। ड्रोन को हथियार से मार गिराने की बजाए कोई ऐसा सिस्टम तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, जो ड्रोन के संचार सिस्टम को ही ठप कर देगा। जैसे ही ड्रोन सीमा के निकट आएगा, वह खुद ब खुद जमीन पर आ गिरेगा। हालांकि अभी यह सिस्टम विकसित होने में समय लगेगा, तब तक विभिन्न एजेंसियां ही ड्रोन पर नजर रखेंगी।

बीएसएफ के डीजी बनाएंगे रिपोर्ट

इस बाबत बीएसएफ के डीजी विवेक जौहरी, जो खुद लंबे समय तक रॉ में काम कर चुके हैं, वे ड्रोन की स्थिति से निपटने के लिए पंजाब और जम्मू कश्मीर गए हैं। वे उन सभी जगहों का दौरा करेंगे, जहां पर हाल ही में ड्रोन देखे जाने या गिराने के मामले सामने आए हैं। सूत्रों का कहना है कि बीएसएफ को रात में ड्रोन पर नजर रखने के लिए कौन से उपकरण दिए जाएं, इस पर वे एक रिपोर्ट तैयार कर उसे गृह मंत्रालय को सौंपेंगे।
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