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Darshana Jardosh: रेलवे ने 84000 बोगियों का दिया ऑर्डर, माल ढुलाई में हिस्सेदारी 45 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य
Thu, 16 Feb 2023 03:07 AM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Thu, 16 Feb 2023 03:07 AM IST
सार
रेल राज्यमंत्री दर्शना जरदोश ने उद्योग मंडल एसोचैम के एक कार्यक्रम में कहा कि रेलवे को इस साल 150 करोड़ टन की अपनी सर्वोच्च वहन क्षमता हासिल करने की उम्मीद है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social Media
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विस्तार
रेल राज्यमंत्री दर्शना जरदोश ने बुधवार को कहा कि रेलवे ने वर्ष 2030 तक माल ढुलाई में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 45 प्रतिशत करने के लिए इस साल करीब 84,000 बोगियों का ऑर्डर दिया है, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। उद्योग मंडल एसोचैम के एक कार्यक्रम में रेल राज्यमंत्री ने कहा कि रेलवे को इस साल 150 करोड़ टन की अपनी सर्वोच्च वहन क्षमता हासिल करने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि रेल परिवहन का इस्तेमाल अमूमन थोक सामान ले जाने में होता रहा है लेकिन हाल में सड़क के रास्ते भी पहुंचाए जा सकने वाले कई उत्पादों की कंटेनरों में रेल के जरिये ढुलाई की जा रही है। जरदोश ने कहा, इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी को वर्ष 2030 तक 27 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए मूल रूप से चार चीजों-ट्रैक उपलब्धता, बोगी एवं रैक, टर्मिनल की उपलब्धता के अलावा विभिन्न ढुलाई योजनाओं की जरूरत होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बीते आठ वर्षों में इन सभी बिंदुओं पर जोर दिया है। मसलन, 2014 से 2021-22 के बीच सात किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से रेल ट्रैक की मंजूरी दी जाती रही और अब यह बढ़कर 12 किलोमीटर प्रतिदिन हो चुका है।
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उन्होंने कहा कि रेल परिवहन का इस्तेमाल अमूमन थोक सामान ले जाने में होता रहा है लेकिन हाल में सड़क के रास्ते भी पहुंचाए जा सकने वाले कई उत्पादों की कंटेनरों में रेल के जरिये ढुलाई की जा रही है। जरदोश ने कहा, इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी को वर्ष 2030 तक 27 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए मूल रूप से चार चीजों-ट्रैक उपलब्धता, बोगी एवं रैक, टर्मिनल की उपलब्धता के अलावा विभिन्न ढुलाई योजनाओं की जरूरत होगी।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने बीते आठ वर्षों में इन सभी बिंदुओं पर जोर दिया है। मसलन, 2014 से 2021-22 के बीच सात किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से रेल ट्रैक की मंजूरी दी जाती रही और अब यह बढ़कर 12 किलोमीटर प्रतिदिन हो चुका है।
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