भारतीय रेलवे: ट्रेनों में जल्द लगेंगे 'फायर प्रूफ' कोच, धुंआ उठते ही डिब्बों में बजने लगेंगे अलार्म
अधिकारियों ने आगे कहा, ट्रेनों में शार्ट सर्किट और आगजनी की घटना कैसे कम हो सकें, इसे देखते हुए रेल कोच फैक्ट्री नए कोच डिजाइन कर रही है। वर्तमान में पांच कोचों में यह सुविधा प्रदान की जा रही है और इसके प्रदर्शन का फीडबैक प्राप्त होने के बाद आने वाले समय में निर्माण किए जाने वाले डिब्बों में लगाया लाएगा...
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ट्रेनों में आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए भारतीय रेलवे ट्रेनों के कोच में नए सुरक्षा उपायों को अपनाने जा रहा है। जल्द ही ट्रेनों में इस तरह के कोच लगाए जाएंगे जिनमें जैसे ही धुआं उठेगा या आग लगेगी तो आटोमैटिक फायर अलार्म बजाने लग जाएंगे। इसके अलावा ट्रेनों में लाइट फिटिंग, टर्मिनल बोर्ड, कनेक्टर इत्यादि को ओर भी बेहतर किया जा रहा है।
रेल कोच फैक्ट्री कपूरथला ट्रेनों के लिए नए कोच तैयार कर रही हैं। नए कोचों में अग्निरोधी सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए डिब्बों में फायर अलार्म के साथ आग बुझाने वाले यंत्र भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा ट्रेनों के एलएचबी एयर कंडीशनर कोचों में अग्नि सुरक्षा में सुधार और हीटिंग व्यवस्था के लिए रिवर्स साइकिल सुविधा के साथ रूफ माउंटेड एसी पैकेज यूनिट लगाना शुरू कर दिया है।
रेल कोच फैक्ट्री के अधिकारियों ने अमर उजाला से कहा कि वर्तमान में कोचों की छत में लगाए जा रहे रूफ माउंटेड एसी पैकेज यूनिट में सर्दियों के दिनों में कोच में हीटिंग के उद्देश्य से रेजिस्टेंस-आधारित हीटिंग काइल का प्रावधान किया गया है। रिवर्स साइकिल फीचर के साथ इसमें किसी भी हीटिंग तत्व की आवश्यकता नहीं होती है। वहीं इसी रेफ्रिजरेंट सर्किट का उपयोग सर्दियों के मौसम में रिवर्स मोड में कोच के अंदर हीटिंग के लिए भी किया जा सकेगा।
अधिकारियों ने आगे कहा, ट्रेनों में शार्ट सर्किट और आगजनी की घटना कैसे कम हो सकें, इसे देखते हुए रेल कोच फैक्ट्री नए कोच डिजाइन कर रही है। वर्तमान में पांच कोचों में यह सुविधा प्रदान की जा रही है और इसके प्रदर्शन का फीडबैक प्राप्त होने के बाद आने वाले समय में निर्माण किए जाने वाले डिब्बों में लगाया लाएगा।
गौरतलब है कि 13 मार्च को दिल्ली-देहरादून शताब्दी एक्सप्रेस में आग लगने की घटना हुई थी। एक कोच में लगी आग देखते ही देखते सात कोचों तक फैल गई थी। हालांकि इस दौरान किसी भी यात्रियों को कोई नुकसान नहीं हुआ था। सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। घटना के बाद रेलवे ने जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी। इसमें ये बात सामने आई थी कि चार्जिंग सॉकेट के कारण ही रेलवे के डिब्बों में आग लगी थी।
इस घटना के बाद रेलवे ने ये फैसला लिया था कि रात 11 बजे से लेकर सुबह पांच बजे तक ट्रेनों में चार्जिंग प्वॉइंट में बिजली आपूर्ति बंद की जाएगी। ऐसे में यात्री रात में अपना मोबाइल या लैपटॉप चार्ज नहीं कर सकेंगे।
ट्रेन में धुंआ उठा तो रुक जाएगी ट्रेन
रेलवे एक अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि ट्रेनों में ब्रेक बाइंडिंग या किसी कारण से आग लगने पर तुरंत बचाव का तरीका निकाल लिया गया है। रेलवे ने राजधानी, शताब्दी और सभी प्रीमियम के ट्रेनों के एसी कोच में एडवांस मल्टी लेवल फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाए हैं। आग लगने की स्थिति में कोच में जैसे ही धुंआ उठेगा, एडवांस फायर सिस्टम अपना काम शुरू कर देगा। कोच में हूटर बजने लगेगा, जिससे यात्री सतर्क हो जाएंगे। धुआं अधिक होने पर या लपटें बढ़ने पर ट्रेन में स्वत: ही ब्रेक लग जाएगा ताकि यात्री कोच के बाहर उतर सकें।
उन्होंने आगे कहा, ट्रेनों के सभी एसी कोच, पैंट्रीकार, पावर कार में एडवांस फायर फाइटिंग सिस्टम लगाए गए हैं। पूरे सिस्टम को ट्रेन के पावर कार में स्थापित सेंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा गया है। हर ट्रेन में सेंट्रल मॉनिटिरिंग सिस्टम की निगरानी के लिए दो तकनीकी कर्मचारी तैनात किए गए हैं। दिल्ली से देहरादून जा रही शताब्दी एक्सप्रेस के चेयरकार कोच सी-5 में अलार्म (स्मोक डिटेक्टर) बजने के बाद ही ट्रेन की चेन खींच दी गई और यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया था।