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खुलासा: बिना सफर कराए रेलवे ने यात्रियों से कमाए 8 हजार करोड़  

Mon, 29 May 2017 08:44 PM IST
कमलेश रतन भारद्वाज/ अमर उजाला, मंडी 
कमलेश रतन भारद्वाज/ अमर उजाला, मंडी  Updated Mon, 29 May 2017 08:44 PM IST
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Indian Railway collected 8 thousand crores without Travel, reveals RTI

भारतीय रेलवे ने यात्रियों को बिना सफर कराए ही बीते तीन वर्षों में आठ हजार करोड़ रुपये की कमाई की है। हर साल रेलवे को बिना सफर कराए 2500 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी हो रही है। इसका खुलासा केंद्र द्वारा दिए गए आरटीआई के जवाब में हुआ है।           

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रेलवे ने यह रकम रिजर्वेशन कैंसिलेशन, विंडो वेटिंग टिकट, आंशिक कंफर्म ई-टिकट के रद न कराए जाने से कमाई है। रेलवे ने तीन वर्षों में सबसे अधिक कमाई विंडो वेटिंग टिकट के रद न हो पाने से की है।
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बता दें कि विंडो वेटिंग टिकट के कंफर्म होने की जानकारी ट्रेन छूटने के चार घंटे पहले मिलती है। ऐसे में यात्रियों को टिकट रद कराने के लिए ट्रेन छूटने के आधे घंटे पहले तक का समय ही मिलता है। संभवत: इसी वजह से करीब आठ करोड़ 89 लाख 24 हजार 414 यात्री बीते तीन वर्षों में टिकट रद नहीं करा पाए।
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इससे रेलवे को 4404 करोड़ रुपये की कमाई हुई। जबकि आंशिक कंफर्म ई-टिकट रद न हो पाने के चलते रेलवे ने 162 करोड़ एक लाख 95 हजार रुपये कमाए। यही नहीं टिकट रद कराए जाने पर भी रेलवे को 3439 करोड़ 29 लाख 56 हजार रुपये मिले।

नहीं माना टिकट फार्म में अकाउंट नंबर लिंक करने का सुझाव    

Indian Railway collected 8 thousand crores without Travel, reveals RTI
उक्त आरटीआई ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ ह्यूमन राइट्स लिबरटीज एंड सोशल जस्टिस के सदस्य सुजीत स्वामी की ओर से डाली गई थी। कोटा, राजस्थान के सुजीत आईआईटी मंडी में नॉन टीचिंग स्टाफ के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

नहीं माना टिकट फार्म में अकाउंट नंबर लिंक करने का सुझाव                 
सुजीत स्वामी ने पीएमओ को पत्र लिख कर विंडो टिकट फार्म में अकाउंट नंबर लिंक करने का सुझाव दिया था। सुझाव में कहा गया था कि जिस तरह ऑनलाइन वेटिंग टिकट के अपने आप रद होने की स्थिति में पैसा आवेदक के अकाउंट में आ जाता है, उसी तरह विंडो वेटिंग टिकट भी अपने आप रद हो जाया करे और पैसा आवेदक के खाते में आ जाए तो परेशानी हल हो जाएगी।

सुझाव पर पीएमओ ने कहा कि आपका सुझाव अच्छा है, लेकिन विंडो वेटिंग टिकट में रकम नकद ली जाती है। इस रकम को खाते में ट्रांसफर करने में गलती की गुंजाइश है।

बिना सेवाएं दिए रेलवे को पैसा लेने का अधिकार नहीं
सुजीत ने विंडो टिकट फार्म में अकाउंट नंबर लिंक के लिए फार्म की रि-डिजाइनिंग पीएमओ भेजी थी। उन्होंने सवाल किया कि पीएमओ ने जब यह मान लिया है कि नोटबंदी के दौरान उनके डिजाइन फार्म से विंडो टिकट रद कराए जाने के मामलों में आवेदकों के खातों में पैसा डाला गया तो इस व्यवस्था को लागू करने में क्या हर्ज है। उन्होंने कहा कि बिना सेवाएं दिए रेलवे को आम लोगों का पैसा अपने पास रखने का अधिकार नहीं है। मैं जल्द ही रेलवे की इस व्यवस्था को बदलने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करूंगा।
 
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