फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Indian Politics Voters judge leadership not by age but ability capability and vision being young no priority

Indian Politics: 'नेतृत्व की उम्र नहीं, योग्यता-क्षमता और विजन परखता है मतदाता'; अब युवा होना प्राथमिकता नहीं

Wed, 24 Sep 2025 07:49 AM IST
अशोक मलिक Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Wed, 24 Sep 2025 07:49 AM IST
सार

पीएम मोदी के 75 साल का होने के साथ ही भाजपा और संघ परिवार में इस आयु में कथित रूप से सेवानिवृत्त संबंधी नियम की चर्चा फिर से होने लगी है। आडवाणी, जोशी जैसे नेताओं का जिक्र कर मोदी के सक्रिय रहने या पद छोड़ने की मीडिया और सियासी हलकों में अटकलें लगने लगीं लेकिन दुनियाभर में इसके अपवाद थे, हैं और आगे भी रहेंगे। भारत में मौजूदा समय में मोदी सबसे सक्रिय नेता हैं। वैसे भी राजनीतिक सफलता के लिए सिर्फ शारीरिक क्षमता ही काफी नहीं होती है। मतदाता अपना नेतृत्व चुनते समय नेतृत्व की उम्र नहीं बल्कि उसकी योग्यता, क्षमता और विजन को देखता है।

विज्ञापन
Indian Politics Voters judge leadership not by age but ability capability and vision being young no priority
चुनावी रैली में भाजपा समर्थक और अशोक मलिक - फोटो : एएनआई/अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के साथ ही आलोचकों ने सवाल किया कि आखिर मोदी के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है? ये सभी सवाल अच्छे हैं। जन्मदिन समारोह के आयोजन में लोगों की प्रतिक्रियाएं काफी तीखी और स्पष्ट थीं। वे राजनीतिक धारणाओं से प्रभावित थे, चाहे वह किसी भी तरह की हो, तथ्यों और राजनीतिक रुझानों की समझ से नहीं।  अब जब पीएम मोदी का जन्मदिन बीत चुका है तो इसका गहराई से विश्लेषण करना आवश्यक है। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भारत में आधुनिक राजनीतिक संस्कृति और मोदी के व्यक्तिगत रिकॉर्ड का आकलन शामिल होगा। 1990 के दशक में राजनीतिक संचार और प्रतीकों में एक उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। जब शीत युद्ध खत्म हुआ तो व्यापक व्यावसायिक और नागरिक समाज की स्वायत्तता के बीच एक नई उम्मीद आर्थिक समृद्धि और राजनीति को एक तकनीकी या गौण गतिविधि के रूप में देखने का दृष्टिकोण सामने आया। यह बात बेशक पश्चिम के लिए सबसे ज्यादा सही थी लेकिन जैसा उम्मीद थी, इसका प्रभाव और भी व्यापक स्तर पर महसूस किया गया, अन्य लोकतांत्रिक देशों में भी। यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में अगर कोई व्यक्ति काफी कम और एक निश्चित उम्र की सीमा पार कर लेता था तो उसे चुनाव जीतने लायक नहीं माना जाता था। कुछ उदाहरणों से समझते हैं। अमेरिका में बिल क्लिंटन ने 54 साल की उम्र में अपना दूसरा कार्यकाल पूरा किया, जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने 62 साल की उम्र में और बराक ओबामा ने 55 साल की उम्र में। बेशक, कार्यकाल की सीमा ने इन्हें तीसरे कार्यकाल से रोका, लेकिन मुख्य बात यह है कि किसी पुराने प्रतिद्वंद्वी के लिए पार्टी के प्राथमिक चुनाव भी जीतना असंभव था। राजनीतिक प्रतिभा की एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो गई या उनके करिअर खत्म हो गए, जबकि वे अभी भी बहुत कुछ योगदान दे सकते थे। यूके का मामला थोड़ा अलग था। टोनी ब्लेयर 54 साल की उम्र में सेवानिवृत्त हुए, कैमरून 49 साल की उम्र में 10 डाउनिंग स्ट्रीट से चले गए और ऋषि सुनक 44 साल की उम्र में।

विज्ञापन


योग्य नेतृत्व क्षमता वाले लोग कम होते हैं, समय के साथ आया सुधार
वैसे भी, सार्वजनिक जीवन में सीमित संख्या में ही योग्य नेतृत्व क्षमता वाले लोग उपलब्ध होते हैं। इसे विधायिका और सरकार में वर्षों के अनुभव से आने वाली समझ और परिपक्वता से जोड़कर देखें तो यह साफ हो जाता है कि कैसे पश्चिम एक आकर्षक छवि वाले, मीडिया के प्रभाव वाले युवा जोश के आगे घुटने टेककर अपनी नेतृत्व क्षमता खो बैठा। धीरे-धीरे, ब्रिटेन और अमेरिका ने भी अपनी नीति में सुधार किया। 1997 से 2013 के बीच, पदभार संभालने के समय अमेरिकी राष्ट्रपति की औसत आयु 52 वर्ष थी। 2017 से 2025 के बीच यह बढ़कर 75 वर्ष हो गई। 79 साल के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उम्र क्लिंटन जितनी ही है और ओबामा से डेढ़ दशक बड़े हैं। यूके में, कीर स्टार्मर 61 साल की उम्र में पद पर आए। जब ब्लेयर प्रधानमंत्री के तौर पर दस साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त हुए तो तब स्टार्मर उनसे सात साल बड़े थे।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Seat Ka Samikaran: पिछले सात में से छह चुनाव रहे भाजपा के नाम, एक बार कोर्ट ने बदल दिया था सीतामढ़ी का नतीजा
विज्ञापन
विज्ञापन


युवा होना महत्वपूर्ण प्राथमिकता नहीं रही
साफ है कि जैसे-जैसे राजनीतिक अर्थव्यवस्था अधिक जटिल और चुनौतीपूर्ण होती गई, वैसे-वैसे मतदाताओं की सरकार के प्रति धारणा भी बदलती गई। नेताओं में वे जो कौशल ढूंढते हैं, वे उम्र से संबंधित नहीं होते। दूसरे शब्दों में, युवा होना अब उतनी महत्वपूर्ण प्राथमिकता नहीं रही। चातुर्यपूर्ण और दृढ़ नेतृत्व, जिसमें विचारों (या विचारधारा) का आधार हो, उम्र की परवाह किए बिना अधिक मायने रखता है। भारत में कई प्रधानमंत्री ऐसे हुए हैं जो निर्धारित सीमा से कहीं अधिक समय तक प्रभावी रहे। पीवी नरसिंह राव जब 70 साल के थे, तब उन्होंने 1991 में देश में आर्थिक सुधारों को लागू किया था। मोदी से ठीक पहले प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह 81 साल की उम्र तक सत्ता में रहे। आज भी, कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे या एनसीपी के शरद पवार जैसे नेता अस्सी की उम्र के बाद भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


भाजपा का तो इतिहास रहा है
भाजपा के इतिहास को भी यह बात दर्शाती है। 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी ने 79 वर्ष की उम्र में चुनाव के लिए प्रचार किया और 84 वर्ष की उम्र तक सांसद रहे। आडवाणी ने 80 साल की उम्र के बाद भी लगातार चुनाव प्रचार किया और अंत में 91 साल की उम्र में संसदीय कार्यकाल पूरा किया। मुरली मनोहर जोशी ने 85 वर्ष की आयु तक अपने कार्यकाल के अंत तक प्रभावशाली संसदीय समितियों का नेतृत्व किया और शिक्षा तथा ऊर्जा जैसे विषयों पर बहस को आकार दिया।

ये भी पढ़ें: Seat Ka Samikaran: यहां राजद ने जीते पिछले पांच में से चार चुनाव, ऐसा है ओबरा विधानसभा का चुनावी इतिहास

2014 में बदलाव पीढ़ीगत था न कि उम्र संबंधी
2014 में जो बदलाव आया, वह भाजपा के किसी उम्र संबंधी नियम के कारण नहीं, बल्कि यह पार्टी में एक पीढ़ीगत बदलाव था, जिससे पार्टी मोदी को मिले भारी जनादेश को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित कर सके। यह कभी भी कोई ऐसा नियम नहीं था जिसे बिना सोचे-समझे लागू किया जा सके। इसलिए, मुख्य बात उम्र नहीं, बल्कि क्षमता और काबिलियत है। हालांकि अपनी बढ़ती उम्र के बावजूद मोदी ने 2024 आम चुनाव प्रचार के तीन महीनों के दौरान 200 से अधिक जनसभाओं को संबोधित किया। अधिकांश दिनों में, गर्मियों के मौसम में तीन-चार भाषण देने के बाद वह सरकारी बैठकों, नीति समीक्षा और निर्णय लेने के लिए दिल्ली वापस लौट जाते थे। दूसरे शब्दों में, वह इस काम के लिए पूरी तरह से सक्षम थे और आज भी हैं। (लेखक द एशिया ग्रुप के भारत चैप्टर के चेयरमैन हैं)

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed