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93 साल पहले अंग्रेजों ने बनवाया था पुराना संसद भवन, मध्यप्रदेश के इस मंदिर पर आधारित है डिजाइन!

Thu, 10 Dec 2020 07:02 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Thu, 10 Dec 2020 07:02 PM IST
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Indian parliament building by britishers know some interesting fact
भारतीय संसद - फोटो : ANI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार यानी आज नए संसद भवन का शिलान्यास किया है। यह नया संसद भवन पुराने वाले से काफी बड़ा होगा। इसकी बिल्डिंग आजादी के 75 साल पूरे होने तक तैयार हो जाएगी। इन सब के बीच जानते हैं पुराने संसद भवन के बारे में कुछ रोचक तथ्य। दरअसल, संसद भवन को 93 साल पहले अंग्रेजों ने बनवाया था। उस वक्त इसके निर्माण में 83 लाख रुपये खर्च हुए थे। ऐसा कहा जाता है कि अंग्रेजों ने संसद भवन का डिजाइन मध्य प्रदेश में स्थित मुरैना जिले के एक छोटे से गांव में बने बहुत पुराने मंदिर से लिया गया था। इस मंदिर का नाम मितावली-पड़ावली का चौसठ योगिनी मंदिर है।

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मध्य प्रदेश के मंदिर से मिलता-जुलता है संसद भवन

कई रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र किया गया है कि ब्रिटिश आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस ने इस मंदिर को आधार मानकर संसद भवन की निर्माण कराया था। हालांकि, कभी इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई, लेकिन यह मंदिर अंदर और बाहर से पुराने संसद भवन से मिलता-जुलता है।

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ब्रिटिश वास्तुविद ने बनाया था संसद का डिजाइन

संसद भवन के डिजाइन को बनवाने के लिए उस वक्त के मशहूर ब्रिटिश वास्तुविद एडविन लुटियन को बुलाया गया था। उन्होंने संसद का डिजाइन साल 1912-13 में बनाया था और इसका निर्माम 1921 से 1927 के बीच हुआ था। संसद के बनने के बाद इसका उद्घाटन भारत के तत्कालीन वायसराय लार्ड इरविन ने किया था। अंग्रेजों ने दिल्ली में नई प्रशासनिक राजधानी बनाने के लिए इस भवन का निर्माण किया गया था। आजादी के बाद यह भवन संसद भवन बन गया।

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Chausath Yogini Temple, Morena

मंदिर से काफी मिलता है संसद भवन

चौसठ योगिनी मंदिर और संसद भवन में कई समान्यताएं है। चौसठ योगिनि मंदिर 101 खंभो पर बना है जबकि संसद भवन 144 मजबूत स्तंभ पर टिका हुआ है। दोनों की संरचनाएं गोल हैं। चौसठ योगिनी मंदिर में 64 कक्ष हैं। वहीं संसद भवन में 340 कक्ष हैं। इस मंदिर के बीच में एक विशाल-सा कक्ष है जिसमें बड़ा शिव मंदिर है। संसद भवन के बीच में भी एक बड़ा-सा हॉल है।

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