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Indian Organ Donation Day: अमेरिका और चीन के बाद देश में सर्वाधिक अंग प्रत्यारोपण, मंडाविया ने कही यह बड़ी बात
Sat, 27 Nov 2021 09:03 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sat, 27 Nov 2021 09:03 PM IST
सार
मनसुख मांडविया ने बताया कि वर्ष 2012-13 के मुकाबले देश में अंगदान चार गुना हो चुके हैं। वर्ष 2013 में देश में 4990 अंगदान हुए थे, जबकि 2019 में यह तादाद 12746 रही। इसी तरह अंगदान की दर में भी 2013 के मुकाबले चार गुना बढ़ोतरी हुई है।
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मनसुख मंडाविया
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि अंगदान में अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। ग्लोबल ऑब्जरवेटरी ऑन डोनेशन एंड ट्रांसप्लांटेशन (जीओडीटी) वेबसाइट पर उपलब्ध डाटा से यह जानकारी मिली है।
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12वें भारतीय अंगदान दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि हमारे जीवन का लक्ष्य ‘जीते-जी रक्तदान और मृत्यु के बाद अंगदान’ होना चाहिए। अंगदान का महत्ता बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति में ‘शुभ’ और ‘लाभ’ को महत्व दिया जाता है, जो व्यक्तिगत के साथ समाज की भी बेहतरी का रास्ता है। अंगदान करने वालों और उनके परिवारों को सम्मान देने के लिए वर्ष 2010 से भारतीय अंगदान दिवस मनाया जा रहा है।
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मनसुख मांडविया ने बताया कि वर्ष 2012-13 के मुकाबले देश में अंगदान चार गुना हो चुके हैं। वर्ष 2013 में देश में 4990 अंगदान हुए थे, जबकि 2019 में यह तादाद 12746 रही। इसी तरह अंगदान की दर में भी 2013 के मुकाबले चार गुना बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि अंग प्रत्यारोपण की जरूरत वाले और मृत्यु के बाद अंगदान के लिए राजी होने वालों की संख्या में अब भी बड़ा फासला है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 महामारी के कारण अंगदान और प्रत्यारोपण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। उम्मीद है कि हम जल्द ही इन हालात से उबर जाएंगे।
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सम्मान की नजर से देखे जाएंगे अंगदान का संकल्प लेने वाले
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि समाज तेजी से बदल रहा है। हरेक जीवन अनमोल है। जल्द ही अंगदान का संकल्प लेने वाले लोगों को उसी सम्मान की नजर से देखा जाएगा, जिससे अपनी गाढ़ी कमाई दान करने वालों को देखा जाता है। अंगदान के लिए राजी होकर लोग इनकी कमी को लेकर भी जागरूकता फैलाते हैं। इससे अन्य लोगों को भी आगे आने की प्रेरणा मिलती है। चिकित्सकों, जागरूक नागरिकों और मीडिया को इसमें अपनी भूमिका का निर्वाह करना चाहिए।