AK-630: भारतीय नौसेना को मिला पहला स्वदेशी एके-630 तोप का गोला, दुश्मनों के छुड़ाएगा छक्के
नौसेना ने कहा कि यह पहली बार है कि सेना ने भारतीय निजी उद्योग को गोला-बारूद की डिलीवरी का ऑर्डर दिया और इसे 12 महीने के रिकॉर्ड समय के भीतर सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
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सशस्त्र बलों में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में आगे कदम बढ़ाते हुए भारतीय नौसेना ने शुक्रवार को युद्धपोतों पर लगे एके-630 (AK-630) तोपों के लिए अपना पहला पूरी तरह से भारत में निर्मित 30 मिमी गोला बारूद प्राप्त किया। भारतीय नौसेना ने एक विज्ञप्ति में कहा कि इकोनॉमिक एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड के सीएमडी सत्यनारायण नुवाल ने नौसेना के वाइस चीफ वाइस एडमिरल एसएन घोरमडे को गोला-बारूद की पहली खेप सौंपी। इस अवसर पर वाइस एडमिरल घोरमडे ने कहा कि यह देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि निजी उद्योग ने पूरी तरह से स्वदेशी गोला-बारूद विकसित किया है। यह 12 महीनों में किया गया है और सभी कंपोनेंट स्वदेशी हैं।
12 महीने के रिकॉर्ड समय के भीतर सफलतापूर्वक पूरा
नौसेना ने कहा कि यह पहली बार है कि सेनाओं ने भारतीय निजी उद्योग को पूर्ण बंदूक गोला-बारूद की डिलीवरी का ऑर्डर दिया और इसे 12 महीने के रिकॉर्ड समय के भीतर सफलतापूर्वक पूरा किया गया। नौसेना ने कहा कि भारतीय नौसेना ने उद्योग को बढ़ावा देकर आत्मानिर्भरता की खोज में ड्राइंग, डिजाइन निर्देशों, निरीक्षण उपकरण, और गोला-बारूद के परीक्षण के मामले में तकनीकी सहायता प्रदान की। नौसेना के अधिकारियों ने कहा कि सहयोगात्मक दृष्टिकोण के साथ भारतीय नौसेना 30 मिमी गोला-बारूद के लिए आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत को सफलतापूर्वक विकसित करने में सक्षम है।
स्वार्म ड्रोन भारतीय सेना के मशीनीकृत बलों में शामिल किए जा रहे हैं
अत्याधुनिक तकनीक से लैस स्वार्म ड्रोन सिस्टम जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से चलने वाले सॉफ्टवेयर का उपयोग करके लक्ष्य की पहचान कर सकता है, उन्हें भारतीय सेना के मशीनीकृत बलों में शामिल किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि स्वार्म ड्रोन में एक ही स्टेशन से नियंत्रित कई ड्रोन होते हैं जो निगरानी सहित विभिन्न कार्य करने के लिए एल्गोरिदम का उपयोग करके प्रोग्राम कर सकते हैं। भारतीय सेना ने शुक्रवार को ट्विटर पर कहा कि नई प्रणाली भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में उसे बढ़त देगी।
सेना के अतिरिक्त जन सूचना महानिदेशालय ने ट्वीट किया, "#SwarmDrones को मशीनीकृत बलों में शामिल किया जा रहा है, जो बेहतरीन तकनीकों को अपनाते हुए भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में भारतीय सेना को बढ़त प्रदान करेगा। #AtmaNirbharBharat #IndianArmy #InStrideWithTheFuture,"। सूत्रों ने कहा कि एल्गोरिदम का उपयोग करके इसे निगरानी जैसे कार्यों में लगाया जा सकता है। एक गतिशील संचार प्रणाली है और अगर कुछ ड्रोन बेकार भी हो जाते हैं, तो भी यह काम पूरा करेगा और वापस आ जाएगा।