कमांडर अभिलाष टॉमी को बचाने में जुटी भारतीय नौसेना, संपर्क में बताया चलने में नहीं है सक्षम
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गोल्डन ग्लोब रेस 2018 में हिस्सा लेने वाले नाविकों को तूफान का सामना करना पड़ा। दक्षिणी हिंद महासागर के आसापास बीच रास्ते में ये तूफान आ गया। रक्षा प्रवक्ता ने शुक्रवार रात आयोजकों द्वारा जारी एक खबर का हवाला देते हुए बताया कि इस तूफान में भारतीय नौसेना के एक नाविक अभिलाष टॉमी भी घायल हो गए हैं।
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गोल्डन ग्लोब रेस 2018 में हिस्सा लेने वाले नाविकों को तूफान का सामना करना पड़ा। दक्षिणी हिंद महासागर के आसापास बीच रास्ते में ये तूफान आ गया। रक्षा प्रवक्ता ने शुक्रवार रात आयोजकों द्वारा जारी एक खबर का हवाला देते हुए बताया कि इस तूफान में भारतीय नौसेना के एक नाविक अभिलाष टॉमी भी घायल हो गए हैं।
उन्हें कमर में चोट आई है। टॉमी का सैटेलाइट फोन भी काम नहीं कर रहा है। उनकी इमरजेंसी किट में एक वीएचएफ रेडियो भी है लेकिन वह कमर में लगी भारी चोट के कारण हिल भी नहीं पा रहे हैं। उन्हें बचाने के लिए नेवी ने आईएनएस सतपुरा और चेतक हेलीकॉप्टर लगा दिया है। उनके बचाव मिशन के लिए आईएनएस ज्योती और पी-81 विमान को भी लगा दिया गया है।
भारतीय नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा ने कहा कि टॉमी को बचाने के लिए भारतीय नौसेना सभी प्रयास कर रही है। वह कीर्ति चक्र विजेता भी रह चुके हैं और स्वदेश निर्मित नौकायन पोत एस वी थुरिया पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
भारतीय नौसेना ने अपने बयान में कहा है कि वह दक्षिणी हिंद महासागर में फंसे हुए हैं। जो ऑस्ट्रेलिया के पर्थ से 1900 नॉटिल मील की दूरी पर है।
फ्रांस के ली सेबल्स डी ओलोन से जारी खबर के मुताबिक तेज हवाओं और 14 मीटर ऊंची लहरों और 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं ने भारतीय नौसेना के अभिलाष टॉमी के जहाज का मस्तूल पलट दिया। इसी वजह से भारतीय नौसेना के कमांडर टॉमी घायल हो गए।
वहीं दूसरे प्रतिभागी एसवी हानले एनर्जी एंडुरेंस भी एस वी थुरिया की तरफ बढ़ रहे हैं। वहीं इस पोत को भी नुकसान हुआ है। मछली पकड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाला ऑस्ट्रेलियन पोत ओशिरिस भी उस स्थान की तरफ बढ़ रहा है जहां टॉमी फंसे हुए हैं।
जानकारी में आगे कहा गया है कि ओशिरिस में एक चिकित्सा अधिकारी सवार हैं और उसमें एक बिस्तर वाला अस्पताल भी मौजूद है। एक रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी शिप भी वहां के लिए रवाना होगा और वह चार से पांच दिन में वहां पहुंचेगा।
गोल्डन ग्लोब रेस में नाव के माध्यम से 30,000 मील की एकल विश्व यात्रा की जाती है। इसमें वही नौकाएं इस्तेमाल की जाती हैं जो 50 साल पहले इस रेस में इस्तेमाल हुई थीं।
इसमें कोई भी नई तकनीक इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती, सिवाय संचार के उपकरणों के। अभिलाष का नौकायन पोत भी पहली गोल्डन ग्लोब रेस के विजेता रॉबिन नॉक्स जॉन्स्टन के पोत सुहेली की नकल है।