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Indian Navy: एंटी-सबमरीन वारफेयर को बढ़ाने के लिए नौसेना ने उतारे दो जहाज, समुद्र में बिछाएंगे बारूदी सुरंगें
Tue, 10 Sep 2024 03:19 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 10 Sep 2024 03:19 PM IST
सार
दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल वी. श्रीनिवास की पत्नी विजया श्रीनिवास ने इन दोनों जहाजों को लॉन्च किया। इन माइनस्वीपर्स जहाजों का नाम भारत के रणनीतिक महत्व के बंदरगाहों के नाम पर रखा गया है।
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नौसेना को मिले सबमरीन-रोधी जहाज।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता (एंटी-सबमरीन वारफेयर) को और बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट प्रोजेक्ट के तहत चौथे और पांचवे शिप 'माल्पे' और 'मुल्की' को समुद्र में उतारा है। इस प्रोजेक्ट के तहत आठ जहाज बनाए जाने हैं। केरल के कोच्चि में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) में बनाए जा रहे माहे क्लास के वारशिप में स्वदेश में ही विकसित किए एडवांस अंडरवाटर सेंसर्स लगाए जाएंगे। इन जहाजों की खूबी होगी कि ये तटीय इलाकों में एंटी-मरीन ऑपरेशंस के साथ कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों और समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने के अभियानों को अंजाम दे सकेंगे।
दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल वी. श्रीनिवास की पत्नी विजया श्रीनिवास ने इन दोनों जहाजों को लॉन्च किया। इन माइनस्वीपर्स जहाजों का नाम भारत के रणनीतिक महत्व के बंदरगाहों के नाम पर रखा गया है। रक्षा मंत्रालय और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के बीच 30 अप्रैल, 2019 को कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत किए गए थे।
क्या है एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट प्रोजेक्ट (ASW SWC)?
ये जहाज 78 मीटर लंबे हैं और इनका वजन लगभग 900 टन है। ये शिप 25 नॉट्स की अधिकतम रफ्तार और 1800 समुद्री मील तक की दूरी तक का सफर तय कर सकते हैं। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) भी विभिन्न चरणों में आठ और एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट का निर्माण कर रहा है।
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भारतीय नौसेना के जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन विवेक मधवाल ने बताया कि एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट जहाजों में 80 फीसदी से ज्यादा स्वदेश में ही बने पार्ट्स लगाए जाएंगे, जिनका बड़े पैमाने पर डिफेंस प्रोडक्शन किया जाएगा और भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां इन्हें बनाएंगी। जिससे देश में रोजगार बढ़ेगा और नए स्किल्स डेवलप होंगे।
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दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल वी. श्रीनिवास की पत्नी विजया श्रीनिवास ने इन दोनों जहाजों को लॉन्च किया। इन माइनस्वीपर्स जहाजों का नाम भारत के रणनीतिक महत्व के बंदरगाहों के नाम पर रखा गया है। रक्षा मंत्रालय और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के बीच 30 अप्रैल, 2019 को कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत किए गए थे।
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क्या है एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट प्रोजेक्ट (ASW SWC)?
ये जहाज 78 मीटर लंबे हैं और इनका वजन लगभग 900 टन है। ये शिप 25 नॉट्स की अधिकतम रफ्तार और 1800 समुद्री मील तक की दूरी तक का सफर तय कर सकते हैं। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) भी विभिन्न चरणों में आठ और एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट का निर्माण कर रहा है।
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भारतीय नौसेना के जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन विवेक मधवाल ने बताया कि एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट जहाजों में 80 फीसदी से ज्यादा स्वदेश में ही बने पार्ट्स लगाए जाएंगे, जिनका बड़े पैमाने पर डिफेंस प्रोडक्शन किया जाएगा और भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां इन्हें बनाएंगी। जिससे देश में रोजगार बढ़ेगा और नए स्किल्स डेवलप होंगे।