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ईवीएम हैकिंग पर बैकफुट पर आईजेए, अध्यक्ष आशीष रे ने कहा शुजा ने गुमराह किया

Fri, 15 Feb 2019 06:20 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Fri, 15 Feb 2019 06:20 AM IST
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Indian Journalist Association on back foot on case of EVM Hacking

इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर भारतीय मूल के कथित हैकर के सनसनीखेज हैंकिग के खुलासे का पटाक्षेप हो गया है। लंदन की इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजेए) के अध्यक्ष आशीष रे बैकफुट पर आ गए हैं। उन्होंने कहा कि शुजा ने उन्हें गुमराह किया था। वह दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेसवार्ता को संबोधित कर रहे थे। आशीष ने कहा कि मेरे पास ईवीएम की असत्यता को साबित करने का आधार नहीं है। आयोग सही है और वह उसका समर्थन करता है।  

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भारत के चुनाव आयोग की कार्य प्रणाली और ईवीएम की प्रासंगिकता विश्व पटल पर प्रमाणिक है। आयोग के कामकाज को लेकर कोई आपत्ति या लांछन नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन उसने आयोग को वेरीफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी (वीवीपीएट) के ऑडिट को और प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
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मीडिया से रूबरू हुए आशीष ने भरसक कोशिश की वो इस पूरे प्रकरण में अपनी भूमिका को साफ कर दें। उसने कहा कि इस पूरे मामले की जांच करने की जरूरत है। आशीष ने कहा कि यह पता चलना चाहिए कि आखिर शुजा अमेरिका की शरण में मार्च 2018 से कैसे  है। आशीष ने कहा वह भारत के पत्रकारों से कहने आए हैं कि वह इस मामले की गहराई से जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी करें। शुजा की पहचान क्यों छुपाई गई इस पर आशीष ने कहा कि सुरक्षा कारणों के चलते ऐसा किया गया था। 
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आशीष रे ने कहा उसने लंदन में इस मसले पर सफाई दी थी। अब दिल्ली में भारतीय पत्रकारों से मिलकर अपना पक्ष रखना चाहता था। रे ने बताया कि शुजा तीन महीने से संपर्क में था। उसने आशीष से कहा कि वह ईवीएम बनाने वाली कंपनी से जुड़ा था। वह भारत में ईवीएम हैकिंग को लेकर लंदन में खुलासा करेगा। सबके सामने हैकिंग करके दिखाएगा इसके लिए उसने अपना परिचयपत्र और जरूरी कागजात दिखाए थे। लेकिन ऐन मौके पर वह गायब हो गया। आशीष ने कहा उसने मुझसे पहले बहुत से पत्रकारों से संपर्क किया था।

आईजेए ने एक बड़े स्कूप के चलते प्रेस कांफ्रेंस रखी थी, लेकिन उसने हैकिंग जैसा कुछ करके नहीं दिखाया। रे ने कांग्रेस की मौजूदगी पर सफाई देते हुए कहा कि इस वार्ता के लिए कांग्रेस के अलावा अन्य 6 पार्टियों के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया था। इसमें आम आदमी पार्टी का मेल उसे देर से मिला था। कपिल सिब्बल की मौजूदगी पर कहा कि सिर्फ कांग्रेस से कपिल सिब्बल ही पहुंचे। सिब्बल के पीछे बैठने को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए। वह मेरे मित्र हैं। इसलिए इसका कोई मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए।

भारत की प्रजातांत्रिक प्रणाली से लगाव : रे

रे कहा उन्हें भारत की प्रजातांत्रिक प्रणाली से लगाव है। भारत का चुनाव आयोग विश्व भर में प्रसिद्ध है। आयोग अच्छा काम कर रहा है। हालांकि वीवीपैट को उन्होंने 2010 से लागू न करने के मसले पर सवालिया निशान जरूर लगाया। उसने कहा वह चुनाव आयोग न गए हैं और न जाना चाहते हैं। पर वह यह अपेक्षा करते हैं कि आयोग को जरूर इस मामले में जांच करनी चाहिए।
                
बता दें कि आशीष रे ही वह व्यक्ति है जिसने 21 जनवरी को लंदन में बकायदा प्रेस वार्ता आयोजित की। उसमें उसने हैकर सईद शुजा को स्काइप लाइव चैट में पेश किया था। इसमें हैकर ने पत्रकारों को बताया था कि उसकी जान को खतरा है वह लंदन नहीं आ सकता वह अमेरिका में सशर्त शरण लिए है। हैकर ने दावा किया था कि वह उस टीम का हिस्सा था जिसने ईवीएम डिजाइन की थी। उसने दावा किया था कि गोपीनाथ मुंडे को इसलिए मारा गया क्योंकि वह 2014 के चुनाव के दौरान ईवीएम हैंकिग के मुद्दे से वाकिफ थे।

इस पर कार्रवाई करते हुए चुनाव आयोग ने हैकर पर प्राथमिकी दर्ज करा ईवीएम को तब ही क्लीन चिट देते हुए हैकिंग की संभावना से इंकार किया था। तब कांग्रेस ने हैकर के दावों की जांच की मांग की थी। उसने कहा था, क्योंकि यह मामला लोकतंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा है। इसलिए जांच होनी चाहिए।

इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने आशीष को घेरा

इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने बकायदा मेल पर बयान जारी कर आशीष को घेरा है। शरबानी बासु, मैंडी क्लार्क, रूपनजना दत्ता पूनम जोशी और प्रसून सोनवलकर ने कहा है कि यह प्रेस वार्ता बिना एसोसिएशन की पूर्ण सहमति से हुई थी। इसमें एसोसिएशन के न्यूनतम मानकों का पालन नहींहुआ था।  एसोसिएशन के लवीना टंडन और संजय सूरी ने कहा इस तरह की वार्ता पत्रकारिता के मूल सिदांतों के विरुद्ध है।

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