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कब तक वायु सेना ढोएगी इन उड़ने वाले ताबूतों को, 45 साल के इतिहास में 465 मिग हुए दुर्घटनाग्रस्त

Thu, 19 Jul 2018 03:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 19 Jul 2018 03:46 PM IST
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Indian air force has lost its 465 mig fighter jets in 45 years and more then 30 fighter pilots
पिछले चार सालों में इंडियन एयफोर्स के फाइटर प्लेन की दुर्घटनाओं और हुई मौतों का अांकड़ा

बुधवार को एक और इंडियन एयरफोर्स मिग-21 फाइटर प्लेन क्रैश हो गया। हादसे में सेना ने एक जाबांज पायलट भी खो दिया है। फिलहाल लापता पायलट की तलाश जारी है। पंजाब के पठानकोट एयरबेस से उड़ा मिग-21 कांगड़ा के फतेहपुर में क्रैश हुआ था। मिग-21 के क्रैश होने की खबर आई और चली गई क्योंकि यह कोई पहली घटना नहीं है।

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अगर पिछले प्लेन क्रैश की घटनाओं पर नजर डालें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। महज साढ़े तीन सालों में देश ने न केवल इन विमान दुर्घटनाओं में हजारों करोड़ का नुकसान झेला है बल्कि 45 बेहतरीन फाइटर पायलट भी खोए हैं। 
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दो महीने में तीन फाइटर प्लेन क्रैश

देश में एयर फोर्स के फाइटर एयरक्राफ्ट के गिरने का यह सिलसिला सा बन गया है। अगर पिछले कुछ सालों में गिरे फाइटर प्लेन के गिरने की बात करें तो इसकी शुरुआत 2002 से हुई थी। जब जालंधर में 3 मई 2002 को मिग-21 मिकोयन-गुरेविच क्रैश हुआ था। यह प्लेन एक ऑफिस बिल्डिंग में गिरा था जिसमें आठ लोगों की मौत और 17 लोग घायल हो गए थे लेकिन पायलट ने खुद को बचा लिया था।  
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 जून महीने में ही दो जगुआर और सुखोई विमान हादसे का शिकार होना यह आम घटना नहीं है। इसपर सरकार और एयरफोर्स को गंभीरता से सोचने की जरूरत है। दो महीने में तीन फाइटर जेट का गिरना यह बताता है कि कहीं न कहीं कुछ कमी है जिसे हम समझने में नाकाम हो रहे हैं। अगर सुखोई और मिग के क्रैश होने वाली घटनाओं पर नजर डालें तो यह आंकड़ा चौंकाने वाला है। सिर्फ साढ़े तीन सालों में देश ने न केवल 45 जवानों को खोया है बल्कि हजारों करोड़ रुपये के 30 फाइटर प्लेन दुर्घटना ग्रस्त हुए हैं। 

Indian air force has lost its 465 mig fighter jets in 45 years and more then 30 fighter pilots
दुर्घटनाग्रस्त मिग-27 लड़ाकू विमान - फोटो : ANI

लोकसभा की एक रिपोर्ट में हुआ खुलासा

मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा में एयर फोर्स के दुर्घटना का शिकार हुए फाइटर प्लेनों की एक सूची जारी की गई है। जिसमें बताया गया है कि सिर्फविमानों के गिरने से देश को आर्थिक नुकसान नहीं हुआ है बल्कि देश ने 43 जवानों को भी खोया है जो किसी विकट परिस्थिति में देश के लिए जान गंवा सकते थे लेकिन उन्होंने जान तब गंवाई है जब वह महज प्रैक्टिस करने निकले।
  
आंकड़ों की मानें तो देश ने पिछले 45 साल में 465 मिग विमान बिना किसी युद्ध में शामिल हुए जमीदोज हो चुके हैं। लेकिन यही जाबांज जब युद्ध के मैदान में दुश्मनों की दांत खट्टे करते हुए क्रैश होने वाले मिग की संख्या  महज 11 है। सूत्रों के अनुसार एक आंकड़े के मुताबिक 946 मिग विमानों में से दो 1965 की लड़ाई में, आठ 1971 की लड़ाई में और 1 मिग विमान 1999 में कारगिल की लड़ाई में क्रैश हुआ है। 

सूचि में बताया गया है कि 2015-16 में आठ, 2016-17 में 11, 2017-18 में आठ और 2018-19 में जुलाई 18 तक चार क्रैश हो चुके हैं। यही नहीं एयर फोर्स के आठ सुखाई विमान भी क्रैश हो चुके हैं। 
हेलिकॉप्टर की बात करें तो चेतक और एमआई-17 सरीखे हेलिकॉप्टर भी क्रैश हो चुके हैं।  एक एमआई-17 हेलिकॉप्टर तो हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में क्रेश हुआ था। मार्च 2017 में राजस्थान में एक हेलिकॉप्टर गिरा था। 

Indian air force has lost its 465 mig fighter jets in 45 years and more then 30 fighter pilots
mig crash

 2013 की रिपोर्ट के अनुसार 3 सालों में 29 जेट क्रैश हुए थे जिसमें 12 मिग-21

लगातार क्रैश हो रहे विमानों पर न्यू यॉर्क टाइम्स ने 2013 की अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि जब भी कोई फाइटर जेट क्रैश होता है तो उसकी वजह पायलट को बताया जाता है। लेकिन एयरफोर्स से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि प्लेन क्रैश होने की वजह इसका रख-रखाव है। 

न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट में बताया गया है तत्कालीन भारत के रक्षा मंत्री एके एंटनी ने बताया था कि उस दौरान भी महज तीन सालों में 29 जेट क्रैश हुए थे जिसमें 12 मिग-21 था और जब एंटनी रिपोर्ट दे रहे थे उसी दौरान देश में और दो मिग 21 दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। 

मिग की लगातार हो रही दुर्घटनाओं की बड़ी वजह इसका रख-रखाव बताया था। लगातार विमान की हो रही दुर्घटना की वजह से इसे फ्लाइंग कॉफीन और विडो मेकर कहा जाने लगा था। 1970 से 2013 के आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो मिग-21 की दुर्घटना की वजह से देश ने 170 से ज्यादा फाइटर पायलट को खोया जबकि 40 आम नागरिकों ने भी जान गंवाई। 

बता दें मिग का बेड़ा भारतीय वायु सेना में 1963 में शामिल किया गया जिसमें 1,200 से अधिक मिग शामिल किए गए। इस समय सेना के बेड़े में करीब 200 मिग बचे हैं।

Indian air force has lost its 465 mig fighter jets in 45 years and more then 30 fighter pilots
एयर चीफ धनोआ ने मिग21 उड़ाया

सरकार ने 138 मिग-21 अपग्रेड किया जिसे 2022 तक उड़ाया जा सकेगा

मामला और गंभीर तब हो जाता है जब आपको यह पता चलता है कि दुश्मन आपके देश पर घात लगाए हुए बैठे हैं और  आपके फाइटर पायलट जान गंवा रहे हैं। लोकसभा कि रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने 138 मिग-21 अपग्रेड किया है जिसे  2022 तक उड़ाया जा सकेगा। मिग की जगह सरकार एचएएल निर्मित तेजस को लाने की तैयारी में जुटी है। लेकिन यह भी इतना आसान होने वाला नहीं है क्योंकि पिछले दिन तेजस भी विवादों में आ गया है।

वहीं फाइटर विमानों के क्रैश होने के बारे में सेवानिवृत सेना के अधिकारी बताते हैं एयर फोर्स में पायलट की ट्रेनिंग एकदम युद्ध के हालातों जैसी ही होती है। इसलिए विमानों का गिरना कोई चौंकाने वाली बात नहीं है।

अधिकारी ने बताया कि अब पायलटों को नई तकनीक की जानकारी भी दी जा रही है पहले विमान क्रैश होने की संख्या बहुत अधिक थी लेकिन अब यह  कम हो चुकी है। लेकिन सरकार को अब पायलटों के बारे में सोचना होगा। सरकारी नीतियों ने आर्मी और एयरफोर्स को आधुनिकीकरण से दूर रखा है जिसकी वजह से न केवल हमारे जाबांज पुराने हो चुके विमानों को उड़ा रहे हैं बल्कि जान भी गंवा रहे हैं। 

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