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Crude Oil: सरकार बोली- भारत रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंध की आशंका से चिंतित नहीं, वैकल्पिक जगहों से खरीदेंगे

Fri, 18 Jul 2025 07:39 AM IST
शुभम कुमार अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी
अमर उजाला ब्यूरो/एजेंसी Published by: शुभम कुमार Updated Fri, 18 Jul 2025 07:39 AM IST
सार

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत रूसी तेल पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंध को लेकर चिंतित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के पास पर्याप्त वैकल्पिक स्रोत हैं और भारत हर तरह की तेल आपूर्ति बाधा से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। सरकार ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

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Indian Government said India is not worried about the possibility of US sanctions on Russian oil News In Hindi
हरदीप सिंह पुरी (फाइल) - फोटो : एएनआई

विस्तार

अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार वार्ता के बीच भारत ने रूस से कच्चे तेल की आपूर्ति पर अमेरिकी प्रतिबंध लगने की आशंका को ज्यादा महत्व नहीं देते हुए कहा, वह अपनी तेल आयात की जरूरतें पूरी करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों से खरीदारी बढ़ाएगा।  पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को कहा, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक भारत रूस से तेल की आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा से निपटने के लिए अन्य देशों से तेल खरीद सकता है।
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पुरी ने रूस पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों के असर को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा, मेरे दिमाग में इसे लेकर किसी तरह का दबाव नहीं है। भारत तेल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाया है। हम पहले 27 देशों से तेल खरीदते थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब करीब 40 हो गई है। रूस तीन वर्षों में भारत के प्रमुख तेल स्रोत के रूप में उभरकर सामने आया है। भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी अब 40 फीसदी है। पुरी ने कहा, रूस के अलावा ब्राजील, कनाडा और गुयाना जैसे देशों से भी कच्चे तेल की आपूर्ति को बढ़ाया जा सकता है।
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घरेलू खोज और उत्पादन बढ़ा रहा भारत
हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) की ओर से आयोजित सालाना सम्मेलन ऊर्जा वार्ता में पुरी ने कहा, भारत घरेलू तेल खोज और उत्पादन को भी तेजी से बढ़ा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा, मैं बिलकुल भी चिंतित नहीं हूं। अगर कुछ होता है तो हम उससे निपट लेंगे। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के चेयरमैन एएस साहनी ने कहा, अगर रूस से तेल आपूर्ति बाधित होती है तो भारत उस व्यवस्था की तरफ लौट सकता है, जो यूक्रेन युद्ध से पहले लागू थी। उस समय रूस से आयात दो फीसदी से भी कम था।

अमेरिकी दबाव को खारिज करे भारत : जीटीआरआई
शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) का कहना है, भारत को रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद करने के अमेरिकी दबाव में नहीं आना चाहिए और उसका विरोध करना चाहिए। रूसी तेल आयात से भारत को महंगाई को काबू में करने और अस्थिर वैश्विक माहौल में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदारों पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाने की चेतावनी दी है।
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, भारत को इस दबाव को खारिज करते हुए अपनी रूस रणनीति पर टिके रहना चाहिए। इस नीति में बदलाव से अमेरिकी चेतावनी नहीं रुकेगी और यह बढ़ती रहेगी। यह कोई अलग मामला नहीं है। ट्रंप विभिन्न कारणों से शुल्क को लेकर नियमित चेतावनी देते रहे हैं।


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अमेरिका से व्यापार समझौते में अपनी शर्तों पर बात करे भारत: ईएसी-पीएम
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेंद्र देव ने कहा, भारत को राष्ट्रीय हित का ध्यान रखते हुए अपनी शर्तों पर अमेरिका से व्यापार समझौते पर बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर हस्ताक्षर के बाद भारत को शुल्क के मामले में अन्य देशों की तुलना में बढ़त मिलेगी और निर्यात को समर्थन मिलेगा। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौता उसी तर्ज पर होगा, जैसा अमेरिका ने इंडोनेशिया से किया है। इसके तहत इंडोनेशियाई वस्तुओं पर अमेरिका में 19 फीसदी शुल्क लगेगा।

महंगाई लक्ष्य बढ़ाने की जरूरत नहीं
क्या भारत को विकासशील अर्थव्यवस्था के लिहाज से महंगाई लक्ष्य को थोड़ा अधिक रखना चाहिए...इस पर देव ने कहा, जब मौजूदा ढांचा मुद्रास्फीति और वृद्धि लक्ष्यों को लेकर अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, तो लक्ष्य बढ़ाने की जरूरत नहीं है। आरबीआई को लक्ष्य के लिए मुख्य मुद्रास्फीति का उपयोग करना चाहिए। ध्यान देने वाली बात है कि उच्च महंगाई मुख्यतः गरीब और मध्य वर्ग को प्रभावित करती है। चेयरमैन ने कहा, अन्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता होने पर पीएलआई योजना प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित करेगी।
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