सिंधु जल संधि: स्थायी आयोग की सालाना बैठक के लिए एक से तीन मार्च तक पाकिस्तान का दौरा करेगा भारतीय प्रतिनिधिमंडल
बैठक के दौरान भारतीय पक्ष अपनी स्थिति को पाकिस्तान के सामने स्पष्ट करेगा और पाकिस्तान की आपत्तियों को संबोधित करेगा।
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स्थाई सिंधु आयोग की वार्षिक बैठक के लिए भारत की ओर से एक 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल एक से तीन मार्च तक पाकिस्तान का दौरा करेगा। यह जानकारी जल शक्ति मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को दी। दोनों देशों की ओर से सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद पहली बार भारतीय प्रतिनिधिमंडल में तीन महिला अधिकारी भी शामिल रहेंगी। यह प्रतिनिधिमंडल भारतीय आयुक्त को बैठक के दौरान विभिन्न मुद्दों पर सलाह देगा। पिछले साल पाकिस्तानी आयुक्त की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने वार्षिक बैठक के लिए भारत का दौरा किया था।
सिंधु जल के लिए भारतीय आयुक्त प्रदीप कुमार सक्सेना ने बताया कि यह वार्षिक बैठक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक से तीन मार्च के बीच आयोजित होगी। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय जल आयोग, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, राष्ट्रीय जलविद्युत ऊर्जा निगम और विदेश मंत्रालय के सक्सेना के सलाहकार शामिल होंगे। उधर, पाकिस्तानी पक्ष का नेतृत्व वहां के आयुक्त सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह करेंगे। इस अहम बैठक के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान के लिए 28 फरवरी को रवाना होगा और चार मार्च को वापस लौटेगा।
अधिकारियों ने बताया कि बैठक के एजेंडा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। चर्चा के एजेंडा में भारत की जम्मू-कश्मीर में चिनाब बेसिन में पाकल दुल (1000 मेगावाट), लोअर कलनई (48 मेगावाट), किरू (624 मेगावाट) और लद्दाख में कुछ छोटी जलविद्युत परियोजनाओं पर पाकिस्तान की आपत्तियों के होने की संभावना है। बता दें कि सिंधु जल संधि के अनुसार, भारत को डिजाइन और संचालन के लिए विशिष्ट मानदंडों के अधीन पश्चिमी नदियों पर रन-ऑफ-दि-रिवर परियोजनाओं के माध्यम से जलविद्युत उत्पन्न करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
यह समझौता पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों पर भारतीय जलविद्युत परियोजनाओं के डिजाइन पर आपत्ति जताने का अधिकार भी देता है। इन परियोजनाओं के डिजाइन पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है। हालांकि, भारत का दावा है कि परियोजना का डिजाइन पूरी तरह से सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुरूप है और केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की ओर से प्रमाणित है। यह दोनों जल संसाधनों और ऊर्जा के क्षेत्र में देश के शीर्ष संगठन हैं। इस बैठक में भारतीय पक्ष अपनी स्थिति को पाकिस्तान के सामने स्पष्ट करेगा और पाकिस्तान की आपत्तियों को संबोधित करेगा।