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सीमा विवाद: भारत चीन के बीच कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता शुरू
Tue, 14 Jul 2020 12:03 PM IST
Sneha Baluni
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Sneha Baluni
Updated Tue, 14 Jul 2020 12:03 PM IST
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लेह से एलएसी की तरफ जाता सेना का काफिला (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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पू्र्वी लद्दाख के चुशुल में भारत और चीन के बीच कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता शुरू हो गई है। यहां दोनों सेनाएं वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चरणबद्ध तरीके से सेनाओं के पीछे हटने के दूसरे चरण पर बातचीत करेंगे। यह जानकारी भारतीय सेना के अधिकारियों ने दी। माना जा रहा है कि इस बातचीत में फिंगर एरिया और डेपसांग पर तनाव करने और हथियारों वापस खींचने को जगह को लेकर चर्चा होगी।
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यह कॉर्प्स कमांडर स्तर की चौथी वार्ता है। इससे पहले दोनों सेनाओं ने विवादित सीमा पर तनाव को कम करने के लिए छह जून, 22 जून और 30 जून को बातचीत की थी। फिंगर एरिया में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की निरंतर उपस्थिति के कारण इस बार वार्ता के सख्त होने की उम्मीद है। डेपसांग क्षेत्र वार्ता का मुख्य बिंदु हो सकता है। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी। माना जा रहा है कि बैठक सुबह 11.30 बजे शुरू होगी।
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मंगलवार को होने वाली वार्ता में माना जा रहा है कि दोनों कमांडर एलएसी पर चरणबद्ध तरीके से हथियार और गतिरोध बिंदुओं पर सेनाओं के पीछे हटाने को लेकर बातचीत करेंगे। क्षेत्र में मिलिट्री बिल्डअप को कम किया जाएगा। इस सैन्य वार्ता के बाद वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कॉर्डिनेशन (डब्ल्यूएमसीसी) की सीमा को लेकर एक और बैठक होगी। डब्ल्यूएमसीसी प्रक्रिया की निगरानी करते हुए सैन्य कमांडरों ने समयसीमा और सेना के पीछे हटने के तरीके निर्धारित किए हैं।
उत्तरी सेना के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल डीएस हुड्डा (सेनानिवृत्त) ने कहा कि 14 जुलाई की वार्ता महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इसमें पैंगोंग त्सो और डेपसांग में फिंगर एरिया को लेकर चर्चा होगी जहां चीन ने एलएसी पर भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की है। उन्होंने कहा, 'इन दोनों क्षेत्रों में भारतीय पक्ष को यथास्थिति की बहाली पर जोर देना चाहिए। इससे कुछ भी कम होने पर हमें क्षेत्रीय नुकसान हो सकता है।'