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ISS: ‘एक्सिओम-4’ मिशन के लिए ISRO-NASA साथ में आए; भारतीय गगनयात्रियों ने प्रारंभिक प्रशिक्षण किया पूरा

Sat, 30 Nov 2024 11:57 AM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: काव्या मिश्रा Updated Sat, 30 Nov 2024 11:57 AM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर इसरो एवं अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के संयुक्त प्रयास को पूरा करने के लक्ष्य की दिशा में दो गगनयात्रियों ने अगस्त 2024 के पहले सप्ताह से अमेरिका में अपना प्रशिक्षण शुरू किया था। 

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Indian astronauts selected for joint ISRO-NASA mission to ISS complete initial training News updates
इसरो - फोटो : एक्स

विस्तार

भारत-अमेरिका के संयुक्त स्पेस मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की उड़ान के लिए इसरो ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को प्राइम पायलट के रूप में चुना है। वहीं ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालाकृष्णन नायर को बैकअप पायलट के रूप में चुना गया है। इन दोनों ने प्रशिक्षण के शुरुआती चरण को पूरा कर लिया है।

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के ‘एक्सिओम-4 मिशन’ के लिए चुने गए दो भारतीय गननयात्रियों ने प्रशिक्षण का प्रारंभिक चरण पूरा कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर इसरो एवं अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के संयुक्त प्रयास को पूरा करने के लक्ष्य की दिशा में ‘एक्सिओम मिशन 4’ के लिए चुने गए दो गगनयात्रियों ने अगस्त 2024 के पहले सप्ताह से अमेरिका में अपना प्रशिक्षण शुरू किया था। अब इन लोगों ने प्रशिक्षण का प्रारंभिक चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
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प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों को पूरा किया
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि प्रशिक्षण के इस चरण में गगनयात्रियों ने मिशन से संबंधित जमीन पर मौजूद सुविधा केंद्रों का भ्रमण, मिशन के प्रक्षेपण चरणों का प्रारंभिक अवलोकन, स्पेसएक्स सूट की फिटिंग जांच और अंतरिक्ष भोजन विकल्पों का चयन करने समेत प्रारंभिक प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों को पूरा कर लिया है। 
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ये ट्रेनिंग ली
इसके अलावा, प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न सत्रों में गगनयात्रियों को ‘स्पेसएक्स ड्रैगन’ अंतरिक्ष यान और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की विभिन्न प्रणालियों से अवगत कराया गया। उन्हें अंतरिक्ष से फोटोग्राफी, दैनिक परिचालन दिनचर्या और संचार प्रोटोकॉल के बारे में बताया गया। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि इस चरण में अंतरिक्ष में चिकित्सकीय आपात स्थितियों समेत विभिन्न प्रकार की आपात स्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया।

इससे आगे का प्रशिक्षण मुख्य रूप से अंतरिक्ष स्टेशन के अमेरिकी कक्षीय खंड के शेष मॉड्यूल पर केंद्रित होगा। इसके अलावा मिशन के दौरान सूक्ष्मगुरुत्व वातावरण में वैज्ञानिक अनुसंधान प्रयोगों के संचालन के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

एक्सिओम स्पेस के साथ समझौता
भारतीय अंतरिक्ष यात्री एक अमेरिकी मिशन के हिस्से के रूप में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की यात्रा करेंगे। इसरो ने वास्तव में एक्सिओम स्पेस के साथ एक अंतरिक्ष उड़ान समझौते (एसएफए) पर अगस्त में हस्ताक्षर किए थे। एक्सिओम स्पेस नासा की तरफ से संबद्ध सर्विस प्रोवाइडर है। यह यह समझौता आईएसएस के आगामी एक्सिओम-4 मिशन के लिए है। यह समझौता भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) भेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसरो के अनुसार नियुक्त चालक दल के सदस्यों को बहुपक्षीय चालक दल संचालन पैनल (MCOP) की तरफ से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर उड़ान भरने की मंजूरी दी जाएगी। इन गगनयात्रियों ने अगस्त के पहले सप्ताह से मिशन के लिए अपना प्रशिक्षण शुरू किया था। मिशन के दौरान ‘गगनयात्री’ आईएसएस पर साइंटिफिक रिसर्च और टेक्नोलॉजी प्रदर्शन प्रयोग करेंगे। इसके साथ ही अंतरिक्ष गतिविधियों में शामिल होंगे।

क्या है एक्सिओम-4 मिशन?
एक्सिओम-4 मिशन के तहत ही भारतीय अंतरिक्ष यात्री आईएसएस जाएंगे। यह नासा का चौथा निजी अंतरिक्ष यात्री मिशन है। इसे प्राइवेट अमेरिकी कंपनी एक्सिओम स्पेस मैनेज कर रही है। मिशन के तहत आईएसएस के साथ चौदह दिनों तक डॉक करने की उम्मीद है। पिछले साल जब एक्सिओम-4 मिशन की घोषणा की गई थी, तो नासा ने कहा था कि एक्स-4 चालक दल के सदस्य अपनी उड़ान के लिए नासा, अंतरराष्ट्रीय भागीदारों और स्पेसएक्स के साथ ट्रेनिंग करेंगे। एक्सिओम स्पेस ने स्पेसएक्स के साथ लॉन्च प्रोवाइड कराने के लिए कॉन्ट्रेक्ट किया है। इसमें अंतरिक्ष स्टेशन से ट्रांसपोर्टेशन के लिए, और प्राइवेट अंतरिक्ष यात्रियों को ड्रैगन अंतरिक्ष यान के लिए सिस्टम, प्रक्रियाओं और आपातकालीन तैयारी से परिचित कराना शामिल है।

मील का पत्थर साबित होगा सहयोग
इसरो कहा था कि मिशन के दौरान ‘गगनयात्री’ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर अंतरिक्ष गतिविधियों में शामिल होंगे। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि इस मिशन के दौरान प्राप्त अनुभव भारतीय मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए फायदेमंद होंगे। इससे इसरो और नासा के बीच मानव अंतरिक्ष उड़ान सहयोग भी मजबूत होगा। यह सहयोग भारत के स्पेस एक्सप्लोरेशन प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह स्पेस रिसर्च और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती साझेदारी को दर्शाता है। जैसे-जैसे मिशन आगे बढ़ता है, इसके राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी रुचि पैदा करने की संभावना है। संभावित रूप से स्पेस एक्सप्लोरेशन में भविष्य के संयुक्त उपक्रमों का रास्ता खोलेगा।

पिछले साल बाइडन ने दी थी जानकारी
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पिछले साल वाशिंगटन में प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक के बाद कहा था कि भारत और अमेरिका 2024 में एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर भेजने के लिए सहयोग कर रहे हैं। पिछले साल ही नासा के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान कहा था कि अंतरिक्ष एजेंसी 2024 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के मिशन के लिए एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री को ट्रेनिंग देगी। नासा की वेबसाइट के अनुसार यह मिशन इस साल अगस्त से पहले संभव नहीं हो सकेगा।

कौन हैं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को एक प्रधान अंतरिक्ष यात्री के रूप में चुना गया है। प्रधान अंतरिक्ष यात्री वह होता है, जिसे उड़ान भरने के लिए चुना जाता है। लेकिन एक बैकअप अंतरिक्ष यात्री को हमेशा रखा जाता है। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में अंतिम समय में अंतरिक्ष यात्री को बदलने की जरूरत होती है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 10 अक्तूबर 1985 को हुआ था। शुभांशु शुक्ला 17 जून 2006 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में नियुक्त हुए थे। शुभांशु फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक टेस्ट पायलट हैं, जिनके पास लगभग दो हजार घटे की उड़ान का अनुभव है। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) के पूर्व छात्र हैं।उन्होंने एसयू-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, जगुआर, हॉक, डोर्नियर, एएन-32 समेत कई तरह के विमान उड़ाए हैं। 


ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्ण के बारे में भी जानिए
बैकअप के लिए ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्ण नायर होंगे, जो उन अंतरिक्ष यात्रियों में सबसे उम्रदराज हैं, जिनके नामों की घोषणा की गई है। उनका जन्म केरल के तिरुवजियाड में 26 अगस्त 1976 को हुआ। 19 दिसंबर 1998 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में उन्होंने कमीशन दिया था। वह एनडीए के पूर्व छात्र हैं, वायुसेना अकादमी में उन्हें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। प्रशांत बालकृष्णन नायर एक कैट ए फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और टेस्ट पायलट हैं, जिनके पास लगभग 3000 घंटे की उड़ान भरने का अनुभव है। उन्होंने एसयू-30 एमकेआई, मिग-21, मिग-29, हॉक, डॉर्नियर, एएन-32 समेत कई विमान उड़ाए हैं। प्रशांत बालकृष्णन यूनाइटेड स्टेट्स स्टाफ कॉलेज के पूर्व छात्र भी रहे हैं। 
 

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