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एलएसी पर चीन के साथ 'लंबी दौड़' और भयंकर सर्दी में तैनाती के लिए तैयार है सेना
Tue, 11 Aug 2020 11:10 AM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Tue, 11 Aug 2020 11:10 AM IST
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भारत चीन गतिरोध
- फोटो : iStock
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भारतीय थलसेना के शीर्ष अधिकारियों ने एक संसदीय पैनल से कहा है कि वह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन के साथ सीमा विवाद हल करने के लिए लंबी दौड़ और पूर्वी लद्दाख सेक्टर में भयंकर सर्दी में भी तैनाती के लिए पूरी तरह से तैयार है। सूत्रों ने बताया कि चीफ ऑफ डिफेंस (सीडीएस) जनरल रावत के नेतृत्व में सेना के अधिकारियों ने पैनल को जानकारी दी कि एलएसी पर दोनों पक्षों के पीछे हटने की प्रक्रिया (डी-एस्केलेशन) में लंबा समय लग सकता है।
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सूत्रों ने बताया कि सैन्य अधिकारियों ने पैनल से कहा कि भारतीय सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है और लद्दाख में इसके लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। सीडीएस रावत और शीर्ष सैन्य अधिकारी संसदीय पैनल को एलएसी पर चीन की आक्रामकता की जानकारी दे रहे थे। चीनी सैनिक एक अभ्यास की आड़ में भारत के साथ सीमा का निर्माण कर रहे थे और शिनजियांग में तैनात उसके सैनिक बाद में तेजी से भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे।
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चीन की सेना अभी तक 40 हजार से ज्यादा सैनिकों को सीमा क्षेत्रों में तैनात कर चुकी है और अप्रैल-मई से ही क्षेत्र में अपनी ताकत बढ़ा रही है। सीमा विवाद के हल के लिए भारत और चीन के बीच सैन्य स्तरीय वार्ता के कई दौर हो चुके हैं लेकिन अभी तक इनका कोई सफल परिणाम नहीं निकला है। ऐसा इसलिए है कि चीन भारत पर दबाव बनाने के लिए टालमटोल कर रहा है। हालांकि, चीन की किसी भी कार्रवाई का जवाब देने के लिए भारत पूरी तरह से तैयार है।
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भारत ने चीन से गतिरोध वाले स्थानों से पीछे हटने को कहा है और चीन के किसी भी अनिष्टकारी कदम को रोकने के लिए वह पूरी तरह से तैयार है। इसे देखते हुए भारत ने भी सीमा पर सैनिकों और हथियारों की तैनाती में इजाफा किया है। बता दें कि 15 जून को गलवां घाटी में हुई दोनों सेनाओं के बीच झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। इस झड़प में चीन के सैनिक भी मारे गए थे, लेकिन चीन ने अभी तक इसे स्वीकार नहीं किया है।