भारतीय सेना का 'तीस्ता प्रहार': युद्ध समन्वय और तत्परता का प्रदर्शन, आकर्षण का केंद्र बने नए पीढ़ी के हथियार
भारतीय सेना ने 8-10 मई को तीस्ता फील्ड फायरिंग रेंज में 'तीस्ता प्रहार' अभ्यास किया। इसमें नई पीढ़ी के हथियारों, लड़ाकू विमानों व विभिन्न सैन्य इकाइयों ने भाग लिया। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि अभ्यास का उद्देश्य नदी क्षेत्रों में युद्धक क्षमता और समन्वय की यथार्थपरक जांच था।
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भारतीय सेना ने आठ, नौ और दस मई को तीस्ता फील्ड फायरिंग रेंज में तीस्ता प्रहार नाम से बड़े पैमाने पर अभ्यास किया। इस अभ्यास के दौरान नदी के इलाकों में लड़ाकू विमान समेत अन्य हथियारों की जांच की गई। अभ्यास में पैदल सेना, तोपखाना, बख्तरबंद कोर, पैदल सेना, अर्ध विशेष बल, सेना के विमान, इंजीनियर्स और सिग्नल सहित प्रमुख लड़ाकू विमानों ने अपना जौहर दिखलाया। हालांकि अभ्यास का सबसे बड़ा आकर्षण रहा भारतीय सेना के आधुनिकीकरण पर जोर देने वाले नई पीढ़ी के हथियार।
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रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने दी जानकारी
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुवाहाटी में बताया कि चुनौतीपूर्ण नदी क्षेत्र में आयोजित इस बड़े पैमाने के एकीकृत फील्ड अभ्यास में विभिन्न इकाइयों और सेवाओं की युद्धक प्रभावशीलता और समन्वय को यथार्थपरक युद्ध
क्षेत्रीय परिस्थितियों में परखा गया। इस अभ्यास में इन्फैंट्री, आर्टिलरी, बख्तरबंद कोर, मशीनीकृत इन्फैंट्री, पैरा स्पेशल फोर्सेज, आर्मी एविएशन, इंजीनियर्स और सिग्नल्स जैसे प्रमुख युद्धक और सहायक घटकों ने सक्रिय भागीदारी की।
आधुनिक हथियार बने आकर्षण का केंद्र
अभ्यास का एक प्रमुख आकर्षण हाल ही में शामिल की गई अगली पीढ़ी की हथियार प्रणालियों, सैन्य प्लेटफॉर्मों और अत्याधुनिक युद्ध क्षेत्र प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन और परीक्षण रहा, जो भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की दिशा में लगातार बढ़ते कदम को दर्शाता है। अभ्यास का केंद्र बिंदु संयुक्तता, तालमेल और निर्बाध समन्वय रहा, जिससे यह साबित हुआ कि सेना विभिन्न प्रकार की भौगोलिक और मौसमीय चुनौतियों में भी त्वरित और प्रभावी ढंग से अभियान चला सकती है।
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साथ ही इस दौरान सामरिक अभ्यास, युद्ध पूर्वाभ्यास और अनुकूलनात्मक रणनीति तैयार की गईं, ताकि वास्तविक समय युद्ध स्थितियों में प्रतिक्रिया क्षमताओं को और बेहतर बनाया जा सके। 'तीस्ता प्रहार' ने भारतीय सेना की युद्धक उत्कृष्टता, तकनीकी प्रगति और हर प्रकार के क्षेत्र में संचालन की तैयारियों को दोहराया, जो सेना की मिशन तत्परता और एकीकृत युद्ध क्षमता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है।