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वायुसेना की बड़ी तैयारी: खरीदे जाएंगे 600 शक्तिशाली बम, राफेल-सुखोई की बढ़ेगी मारक क्षमता

Sat, 04 Apr 2026 10:41 PM IST
राकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 04 Apr 2026 10:41 PM IST
सार

भारतीय वायुसेना ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देते हुए अमेरिका के एमके-84 की तर्ज पर 1000 किलोग्राम के 600 स्वदेशी एरियल बम खरीदने की प्रक्रिया शुरू की है। ढाई साल में पूरे होने वाले इस परियोजना से सेना की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

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indian air force to buy 600 indigenous 1000kg aerial bombs
एरियल बम खरीदेगी वायुसेना - फोटो : @अमर उजाला

विस्तार

भारतीय वायुसेना अब दुश्मन के मजबूत ठिकानों को धूल चटाने के लिए अपनी ताकत में बड़ा इजाफा करने जा रही है। वायुसेना ने 1000 किलोग्राम वजन वाले 600 शक्तिशाली एरियल बमों की खरीद की योजना बनाई है। खास बात यह है कि सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार विदेशी कंपनियों के बजाय देश की ही हथियार निर्माता कंपनियों पर भरोसा जता रही है। यह पूरा परियोजना 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया है।
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अमेरिकी 'MK-84' जैसा होगा दम
वायुसेना को जिस शक्तिशाली बम की तलाश है, वह ताकत के मामले में अमेरिका के मशहूर एरियल बम 'एमके-84' के बराबर होगा। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने देश की कंपनियों से रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) मांगी है। इस बम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इसे भारत के तेजस, राफेल के अलावा रूसी और अन्य विदेशी लड़ाकू विमानों से भी आसानी से दागा जा सकेगा।
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दो चरणों में पूरा होगा काम
इस पूरे प्रोजेक्ट को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले चरण में हथियार बनाने वाली कंपनियां इसके 6 प्रोटोटाइप यानी डमी और असली मॉडल तैयार करेंगी। इन बमों के कड़े परीक्षण किए जाएंगे। खास नियम यह है कि बम को बनाने में कम से कम 50 फीसदी सामग्री भारतीय होनी चाहिए। इस चरण में पास होने के बाद दूसरे चरण में वायुसेना कुल 600 बमों की बड़ी खरीद करेगी।

बंकर और रनवे होंगे तबाह
आपको बता दें कि 1000 किलो की श्रेणी वाले ये बम बेहद विनाशकारी होते हैं। इनका मुख्य काम युद्ध के समय दुश्मन के मजबूत बंकरों, सेना के बड़े गोदामों, इमारतों और एयरबेस के रनवे को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करना होता है। इस पूरी प्रक्रिया में करीब ढाई साल का समय लगेगा।

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