फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   India won’t change security policy under pressure Nishikant Dubey sets to Musk battle erupts over Starlink row

‘भारत दबाव में नहीं बदलेगा सुरक्षा नीति’: मस्क को निशिकांत दुबे ने दिखाया आईना, स्टारलिंक विवाद पर छिड़ी जंग

Sun, 11 Oct 2026 01:08 PM IST
प्रशांत तिवारी एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Sun, 11 Oct 2026 01:08 PM IST
सार

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने स्टारलिंक की भारत में एंट्री को लेकर एलन मस्क को जवाब देते हुए कहा कि भारत किसी दबाव में अपनी सुरक्षा नीति नहीं बदलेगा। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरों पर चिंता जताई और कहा कि रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा जांच एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से देख रही हैं।

विज्ञापन
India won’t change security policy under pressure Nishikant Dubey sets to Musk battle erupts over Starlink row
निशिकांत दुबे, सांसद, भाजपा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की एंट्री को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच भाजपा सांसद और संसदीय आईटी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने एलन मस्क को दोटूक जवाब देते हुए कहा है कि भारत किसी भी तरह के दबाव में अपनी सुरक्षा नीति नहीं बदलेगा। उन्होंने साफ कहा कि देश की सुरक्षा किसी भी कारोबारी हित से ऊपर है। दुबे के मुताबिक, स्टारलिंक से जुड़ी चुनौतियों को लेकर देश की सुरक्षा एजेंसियां गंभीर हैं और रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय तथा जांच एजेंसियां भी इनसे जुड़े संभावित खतरों पर चिंता जता रही हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में स्टारलिंक की व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की मंजूरी और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चा चल रही है।

विज्ञापन


‘पहले अपने देश के गरीबों को सस्ता इंटरनेट दो’ 
निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एलन मस्क को जवाब देते हुए कहा कि भारत एक संप्रभु और लोकतांत्रिक देश है। यहां सुरक्षा से जुड़े फैसले किसी दबाव या सोशल मीडिया पर चलने वाली बहस के आधार पर नहीं लिए जाते। उन्होंने मस्क को नसीहत देते हुए कहा कि पहले वे अपने देश अमेरिका के गरीब लोगों को सस्ती दरों पर इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध कराएं, फिर भारत पर सवाल उठाएं। दुबे ने जोर देकर कहा कि देश की सुरक्षा नीति तय करते समय राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखा जाएगा।
विज्ञापन


‘सुरक्षा एजेंसियों की चिंताओं को समझ चुकी है संसदीय समिति’
दुबे ने अपने पोस्ट में कहा कि संसदीय समिति स्टारलिंक के कारण देश की सुरक्षा एजेंसियों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझ चुकी है। उन्होंने रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और जांच एजेंसियों का जिक्र करते हुए कहा कि इन संस्थाओं को ऐसे मामलों से जुड़े संभावित खतरों को लेकर चिंता है। दुबे ने आरोप लगाया कि इन चुनौतियों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और देश की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर पूरी गंभीरता के साथ विचार करना जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मनमोहन सिंह सरकार के समय भी उठ चुका था यह मुद्दा
भाजपा सांसद ने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार का भी जिक्र किया। दुबे के मुताबिक, 2013-14 में तत्कालीन सरकार ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) को इन खतरों के बारे में जानकारी दी थी। इस संदर्भ को सामने रखते हुए उन्होंने संकेत दिया कि सैटेलाइट संचार सेवाओं से जुड़े सुरक्षा सवाल नए नहीं हैं, बल्कि पहले भी सरकार और संबंधित संस्थाओं के स्तर पर इन पर चर्चा हो चुकी है।

‘पैसा ही प्राथमिकता होता तो मस्क का रेड कार्पेट से स्वागत करते’
निशिकांत दुबे ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर भारत के लिए पैसा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होता, तो सुरक्षा एजेंसियों की आपत्तियों के बावजूद एलन मस्क का स्वागत रेड कार्पेट बिछाकर किया जाता। उन्होंने मस्क से सवाल किया कि क्या अमेरिका से लेकर ब्रिटेन तक राजनीतिक दलों को ज्यादा समर्थन नहीं दिया जाता? दुबे की इस टिप्पणी का मकसद यह स्पष्ट करना था कि भारत में स्टारलिंक की एंट्री का फैसला केवल कारोबारी फायदे के आधार पर नहीं हो सकता। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को नजरअंदाज करके किसी कंपनी को आगे बढ़ने की छूट नहीं दी जा सकती।

स्टारलिंक की एंट्री पर मस्क ने भी उठाए सवाल
स्पेसएक्स और स्टारलिंक के प्रमुख एलन मस्क ने शनिवार को भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में अपनी कंपनी की व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की वकालत की थी। उनका तर्क है कि बाजार में ज्यादा कंपनियों के आने से ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलेंगे। मस्क ने भारत के एक बड़े कारोबारी समूह के प्रमुख पर निशाना साधते हुए स्टारलिंक की एंट्री का विरोध करने वाले तर्कों को ‘बेतुका पाखंड और बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई बातें’ बताया। उन्होंने मौजूदा बाजार व्यवस्था का बचाव करने वालों को इंटरनेट कंपनियों के पक्ष में प्रचार करने वाली फौज तक कह दिया।

अंबानी के कारोबारी दबदबे पर मस्क का तंज
एक्स पर अपनी पोस्ट में मस्क ने लिखा कि अंबानी की ओर से इंटरनेट बाजार के समर्थन में दिए जा रहे तर्कों में विरोधाभास है। उन्होंने कहा कि एक तरफ यह दावा किया जाता है कि भारत में अंबानी के दबदबे वाले बाजार में पहले से ही इंटरनेट की कीमतें इतनी कम हैं कि स्टारलिंक मुकाबला नहीं कर पाएगी। वहीं, दूसरी तरफ यह भी कहा जाता है कि स्टारलिंक इतनी मजबूत प्रतिस्पर्धी साबित होगी कि मौजूदा कंपनियों को खतरा पैदा हो जाएगा। मस्क ने इन दोनों दलीलों को पाखंड और अतिशयोक्ति करार दिया।

‘महंगी सेवा होगी तो ग्राहक खरीदेंगे ही नहीं’ 
एलन मस्क ने माना कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से मौजूदा कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है, लेकिन इससे यह जरूरी नहीं हो जाता कि उनका पूरा कारोबार खतरे में पड़ जाए। उन्होंने कहा कि अगर भारत में स्टारलिंक की सेवा बहुत महंगी होगी, तो लोग इसे खरीदेंगे ही नहीं। ऐसे में स्पेसएक्स को अपनी सेवाओं की कीमतें ग्राहकों की पहुंच के भीतर रखनी होंगी। मस्क के इस बयान से साफ है कि भारत में कारोबार शुरू करने के लिए कीमतें भी एक अहम मुद्दा होंगी।

पहले भी भारतीय कारोबारी समूह पर निशाना साध चुके हैं मस्क
स्टारलिंक की भारत में एंट्री को लेकर एलन मस्क पहले भी सोशल मीडिया पर भारतीय कारोबारी जगत के एक बड़े नाम पर तंज कस चुके हैं। उनकी हालिया टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब कंपनी भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया से गुजर रही है। इस पूरे मामले में एक तरफ मस्क प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों के विकल्प बढ़ाने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ भारत में सेवा शुरू करने के लिए नियामकीय शर्तों और सुरक्षा संबंधी मंजूरियों का पालन करना जरूरी है।

'भारत का नियम सभी कंपनियों के लिए समान'
स्टारलिंक की एंट्री को लेकर चल रही बहस के बीच संचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए नियामकीय व्यवस्था निष्पक्ष है और सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होती है। मंत्रालय ने 8 अक्टूबर को जारी बयान में कहा कि सरकार ने दूरसंचार सेवाओं, जिनमें सैटेलाइट संचार भी शामिल है, के लिए निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण मंजूरी व्यवस्था तैयार की है। मंत्रालय के मुताबिक, गैर-भूस्थिर उपग्रह कक्षा (NGSO) पर आधारित सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए तीन वैश्विक कंपनियों को लाइसेंस दिए जा चुके हैं।

सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही अगला कदम उठा सकेंगी कंपनियां
संचार मंत्रालय ने बताया कि लाइसेंस प्राप्त तीनों कंपनियों की सुरक्षा संबंधी जांच अभी चल रही है। किसी कंपनी की जांच पूरी होने के बाद ही वह स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए अगली प्रक्रिया में आगे बढ़ सकती है। मंत्रालय के मुताबिक, फिलहाल तीनों कंपनियां नियामकीय प्रक्रिया के लगभग एक ही चरण में हैं। ऐसे में यह कहना कि सरकार किसी कंपनी के साथ भेदभाव कर रही है या नियमों को असमान तरीके से लागू किया जा रहा है, गलत और तथ्यों से परे है।


ये भी पढ़ें: तमिलनाडु को करोड़ों की सौगात: पीएम ने चेन्नई मेट्रो के फेज टू कॉरिडोर का किया उद्घाटन; सीएम के साथ किया सफर

स्टारलिंक की भारत में एंट्री के लिए सुरक्षा और मंजूरी दोनों अहम
भारत में स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत को लेकर अब बहस दो प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित है। पहला, सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से ग्राहकों को कितने विकल्प और किस कीमत पर सेवाएं मिलेंगी। दूसरा, इस सेवा से जुड़े सुरक्षा मानकों और सरकारी मंजूरियों का पालन किस तरह किया जाएगा। एलन मस्क प्रतिस्पर्धा और किफायती सेवाओं पर जोर दे रहे हैं, जबकि निशिकांत दुबे ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। संचार मंत्रालय के अनुसार, कंपनियों को सुरक्षा जांच पूरी होने और नियामकीय प्रक्रिया के अगले चरणों की मंजूरी मिलने के बाद ही आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed