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अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच की समस्या से मुक्त हो जाएगा देश 

Wed, 24 Jan 2018 08:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 24 Jan 2018 08:43 PM IST
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India will be free from the problem of Open Defecation Free by October 2019
स्वच्छ भारत अभियान ( प्रतीकात्मक तस्वीर)

पीएम मोदी का स्वप्निल स्वच्छ भारत अभियान अपने लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बढ़ रहा है। सरकार ने अभियान की रफ्तार पर अपनी संतुष्टि जताई है। तो देश-विदेश के नामी संस्थानों ने भी अभियान के जमीनी असर का आंकलन कर उसकी महिमा बढ़ाई है। विश्व संगठन यूनीसेफ और मिलिंडा गेटस फाउंडेशन ने स्वच्छ भारत अभियान के प्रभाव और असर को सही दिशा में करार दिया है। 

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स्वच्छ भारत अभियान (ग्रामीण) का लेखा-जोखा पेश करते हुए पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वरन अय्यर ने अभियान के रफ्तार पर संतुष्टि जताई है। उन्होंने कहा है कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत देश को खुले में शौच की समस्या से मुक्त करने का प्रयास निर्धारित समय यानि अक्टूबर 2019 तक पूरा हो जाएगा। 
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अभियान की रफ्तार ठीक दिशा में है। अय्यर के अनुसार देश के 3 लाख गांव और 300 से ज्यादा जिले खुले में शौच की समस्या से मुक्त हो गए हैं। 2 अक्टूबर 2014 को अभियान की शुरूआत के बाद देश के ग्रामीण इलाकों में अब तक 6 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए गए हैं। अब सरकार ने इसके दूसरे चरण की शुरूआत कर दी है। जिसके तहत शौचालयों की उपयोगिता बरकरार रखने के प्रयास होंगे। 

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8 राज्य और 2 केंद्र शासित प्रदेश हुए खुले में शौच से मुक्त

India will be free from the problem of Open Defecation Free by October 2019
swachh bharat abhiyan

पेयजल एवं स्वच्छत्ता सचिव अय्यर के अनुसार सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, केरल, हरियाणा, उत्तराखंड, गुजरात, अरूणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य पूरी तरह से खुले में शौच की समस्या से मुक्त घोषित हो चूके हैं। इनके अलावा चंड़ीगढ़ और दमन एवं द्वीव सरीखे केंद्र शासित प्रदेश भी इस श्रेणी में शूमार हो गए हैं। अय्यर के अनुसार मार्च तक खुले में शौच की समस्या से मुक्त राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या बढ़कर 15 हो जाएगी। 

अभियान के वजह से आई बाल मृत्यु दर में कमी 
अय्यर ने यूनीसेफ और मिलिंदा गेटस फाउंडेशन के अध्ययनों की रिपोर्ट को पेश करते हुए बताया कि स्वच्छ भारत अभियान का स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ा है। यूनीसेफ के अध्य्यन के अनुसार अभियान के शुरूआत के बाद बाल मृत्यु दर में गिरावट आई है। तो बिल एवं मिलिंदा गेटस फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार खुले में शौच से मुक्त हुए गांव के लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है। उनके स्वास्थ्य सूचकांक में सुधार देखने को मिला है। यूनीसेफ के एक दूसरे शोध के अनुसार खुले में शौच की समस्या से मुक्त गांवों में हर घर को करीब प्रतिवर्ष 50 हजार रूपए की बचत हुई है। 

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