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50 साल पहले भारत को निकाला गया था OIC से, तब क्या किया था पाकिस्तान ने?

Sun, 03 Mar 2019 12:59 PM IST
अभिषेक त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अभिषेक त्यागी Updated Sun, 03 Mar 2019 12:59 PM IST
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India was disinvited at Pakistan instance in OIC meeting before 50 years
ओआईसी की बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज - फोटो : अमर उजाला

इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की हाल ही में हुई बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शिरकत की है। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित विदेश मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन सत्र को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित किया। स्वराज ने इस्लामिक देशों के संगठन में इस्लाम के मतलब पर अपनी बात रखी।


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इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) की हाल ही में हुई बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शिरकत की है। उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित विदेश मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन सत्र को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित किया। स्वराज ने इस्लामिक देशों के संगठन में इस्लाम के मतलब पर अपनी बात रखी।


57 सदस्यीय इस्लामिक समूह की बैठक में स्वराज ने कहा, "जैसे की इस्लाम का मतलब अमन है और अल्लाह के 99 नामों में से किसी का मतलब हिंसा नहीं है। इसी तरह दुनिया के सभी धर्म शांति, करुणा और भाईचारे का संदेश देते हैं।" 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज जिस भारत को यहां इतना सम्मान मिला है, उसी को यहां 50 साल पहले बेइज्जत किया गया था। जिसका कारण पाकिस्तान था। इस संगठन की स्थापना साल 1969 में हुई थी। पाकिस्तान इसके संस्थापक सदस्यों में से एक था। इस संगठन की पहली बैठक 1969 में मोरक्को के रबात शहर में हुई।

उस वक्त इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं। उन्होंने मोरक्को में भारत के राजदूत गुरबचन सिंह से कहा कि किसी भी तरह से भारत को इस संगठन का न्योता मिलना चाहिए। इसके लिए प्रयास किए जाएं। जिसके बाद गुरबचन सिंह के प्रयासों से भारत को ओआईसी के पहले स्थापना सम्मेलन में आमंत्रित किया गया। इस आमंत्रण को इंदिरा गांधी ने स्वीकार किया और अपनी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री फखरुद्दीन अली अहमद (जो भारत के राष्ट्रपति भी रह चुके हैं) को इस सम्मेलन में भारत के प्रतिनिधि के तौर पर भेजा।

पाकिस्तान की धमकी

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

जब फखरुद्दीन अली अहमद सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मोरक्को पहुंचे तो पाकिस्तान के तत्कालीन तानाशाह याहया खान ने ओआईसी को धमकी दे दी। उन्होंने कहा कि अगर भारत को इस सम्मेलन में बुलाया गया तो पाकिस्तान सम्मेलन का बहिष्कार कर देगा। पाकिस्तान इस संगठन का संस्थापक सदस्य था, इस कारण सम्मेलन शुरू होने से कुछ देर पहले ही भारत को दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया गया। लेकिन इस बात से अहमद तब अवगत हुए जब वह रबात शहर के अपने होटल से सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए निकल चुके थे। पाकिस्तान की हरकत के कारण उन्हें दरवाजे से ही वापस लौटना पड़ा।  

लेकिन आज इस घटना को 50 साल हो गए हैं। हालात बिलकुल उलट गए हैं। इस बार ओआईसी ने पाकिस्तान के बहिष्कार की धमकी को दरकिनार कर दिया है। इसके साथ ही मेजबान संयुक्त अरब अमीरात ने ना केवल भारत को इसमें शामिल होने का न्योता दिया बल्कि उसे विशिष्ठ अतिथि का दर्जा भी दिया। वहीं एक अनोखी बात ये भी है कि इस बार स्म्मेलन में पाकिस्तान की कुर्सी खाली रही।

खाड़ी देशों से अच्छे संबंध

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और खाड़ी देशों में अच्छे संबंध हैं। यहां मौजूद देशों से भारत के गहरे रिश्ते हैं। इराक, फिलिस्तीन से अच्छे संबंध हैं। हममें से कई ने आजादी और आशा की रौशनी एक ही समय पर देखी है। हम गरिमा और समानता की अपनी खोज में एकजुटता के साथ खड़े हुए हैं।

विदेश मंत्री ने यहां ओआईसी के सचिव युसूफ बिन अहमद और चेयरमैन शेख अब्दुल्ला बिन जायद से भी मुलाकात की।
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