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G20: ड्रैगन के दांव से ही भारत ने चीन को किया चित, ग्लोबल साउथ के कारण चीन ने किया एयू का समर्थन
Sat, 09 Sep 2023 04:54 AM IST
जलज मिश्रा
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Sat, 09 Sep 2023 04:54 AM IST
सार
जी-20 के विस्तार के लिए भारत ने इसी तर्ज पर जापान, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, ब्रिटेन जैसे सदस्य देशों को साधने के बाद एयू को इस समूह में शामिल करने का प्रस्ताव रखा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत के प्रस्ताव पर अमेरिका सैद्धांतिक तौर पर सहमत था।
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जी20 सम्मेलन
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
जी-20 शिखर सम्मेलन में अफ्रीकन यूनियन (एयू) के समूह में शामिल होने की पूरी संभावना है। रूस-चीन कूटनीतिक मजबूरी में एयू को शामिल करने पर राजी हुए हैं। जी-20 के विस्तार के लिए भारत ने वही कूटनीतिक तरीका अपनाया जो तरीका चीन ने ब्रिक्स के विस्तार को ले कर अपनाया था। चीन ने रूस, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका को साधने के बाद ब्रिक्स के विस्तार का प्रस्ताव रखा और अपनी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) में शामिल देशों अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब और ईरान को इस समूह में शामिल कराने का प्रस्ताव रखा। चूंकि इन देशों से भारत की अदावत नहीं है, ऐसे में भारत को प्रस्ताव का समर्थन करना पड़ा, हालांकि भारत ने संयुक्त अरब अमीरात का नाम शामिल कराने में सफलता हासिल की।
जी-20 के विस्तार के लिए भारत ने इसी तर्ज पर जापान, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, ब्रिटेन जैसे सदस्य देशों को साधने के बाद एयू को इस समूह में शामिल करने का प्रस्ताव रखा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत के प्रस्ताव पर अमेरिका सैद्धांतिक तौर पर सहमत था। चूंकि एयू ग्लोबल साउथ में है और चीन दक्षिणी गोलार्ध में पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, इसलिए वह प्रस्ताव को न नहीं कर सका।
श्रेय लेने की कोशिश में बीजिंग-मॉस्को
एयू को जी-20 में शामिल करने का प्रस्ताव हालांकि भारत का था, मगर कूटनीतिक कारणों से चीन और रूस इसका श्रेय लेना चाहते हैं। दोनों देशों ने कहा है कि वे इसके लिए पहले से ही सहमत थे। चीन ने तो इसके लिए चीन-अफ्रीका लीडर्स संवाद का हवाला दिया और कहा कि उसने इसी संवाद में एयू को जी-20 में शामिल करने की वकालत की थी।
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विस्तार के बाद जी-21 होगा नाम
शिखर सम्मेलन में एयू को जी-20 में शामिल किया जाता है तो समूह का नाम जी-21 हो सकता है। एयू में 55 अफ्रीकी देश शामिल हैं। एयू को इस समूह में शामिल करने के बाद समूह की सामूहिक अर्थव्यवस्था और ताकत में भी इजाफा होगा। भारत एयू को समूह में शामिल कराने का प्रस्ताव पारित कराना चाहता है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि साझा घोषणापत्र जारी नहीं होने पर भारत की अगुवाई में समूह के विस्तार सहमति का संदेश जाएगा। रूस और चीन को साझा घोषणापत्र के मसौदे में यूक्रेन युद्ध से जुड़ी पंक्तियों को शामिल करने पर आपत्ति है।
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जी-20 के विस्तार के लिए भारत ने इसी तर्ज पर जापान, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, ब्रिटेन जैसे सदस्य देशों को साधने के बाद एयू को इस समूह में शामिल करने का प्रस्ताव रखा। सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत के प्रस्ताव पर अमेरिका सैद्धांतिक तौर पर सहमत था। चूंकि एयू ग्लोबल साउथ में है और चीन दक्षिणी गोलार्ध में पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, इसलिए वह प्रस्ताव को न नहीं कर सका।
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श्रेय लेने की कोशिश में बीजिंग-मॉस्को
एयू को जी-20 में शामिल करने का प्रस्ताव हालांकि भारत का था, मगर कूटनीतिक कारणों से चीन और रूस इसका श्रेय लेना चाहते हैं। दोनों देशों ने कहा है कि वे इसके लिए पहले से ही सहमत थे। चीन ने तो इसके लिए चीन-अफ्रीका लीडर्स संवाद का हवाला दिया और कहा कि उसने इसी संवाद में एयू को जी-20 में शामिल करने की वकालत की थी।
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विस्तार के बाद जी-21 होगा नाम
शिखर सम्मेलन में एयू को जी-20 में शामिल किया जाता है तो समूह का नाम जी-21 हो सकता है। एयू में 55 अफ्रीकी देश शामिल हैं। एयू को इस समूह में शामिल करने के बाद समूह की सामूहिक अर्थव्यवस्था और ताकत में भी इजाफा होगा। भारत एयू को समूह में शामिल कराने का प्रस्ताव पारित कराना चाहता है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि साझा घोषणापत्र जारी नहीं होने पर भारत की अगुवाई में समूह के विस्तार सहमति का संदेश जाएगा। रूस और चीन को साझा घोषणापत्र के मसौदे में यूक्रेन युद्ध से जुड़ी पंक्तियों को शामिल करने पर आपत्ति है।