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Astra: भारत ने हवा से हवा में मार करने वाली 'अस्त्र' मिसाइल का किया सफल परीक्षण, इन खासियतों से है लैस
Fri, 11 Jul 2025 09:47 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 11 Jul 2025 09:47 PM IST
सार
Astra: भारत ने ओडिशा तट से ‘अस्त्र’ एयर-टू-एयर मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो 100 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य भेद सकती है। इसका परीक्षण सुखोई-30 एमके-1 विमान से किया गया और यह मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : एक्स/आकाशवाणी
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विस्तार
भारत ने शुक्रवार को ओडिशा तट से 'अस्त्र' नामक एयर-टू-एयर मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल 'बियॉन्ड विजुअल रेंज' यानी देखने की सीमा से बाहर के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है और इसका परीक्षण सुखोई-30 एमके-1 लड़ाकू विमान से किया गया।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की ओर से संयुक्त रूप से किया गया। मिसाइल की रेंज 100 किलोमीटर से अधिक है और इसमें अत्याधुनिक गाइडेड और नेविगेशन प्रणाली लगी है।
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परीक्षण के दौरान दो मिसाइलें अलग-अलग दूरी, लक्ष्य की दिशा और अलग परिस्थितियों में छोड़ी गईं और दोनों बार उन्होंने अपने लक्ष्य को बिल्कुल सटीकता से नष्ट किया। मंत्रालय ने कहा कि मिसाइल में लगा रेडियो फ्रिक्वेंसी सीकर भी पूरी तरह स्वदेशी है और इसे डीआरडीओ ने डिजाइन और विकसित किया है। परीक्षण के दौरान सभी उप-प्रणालियों ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया।
चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज में लगाए गए उपकरणों से उड़ान के दौरान सभी आंकड़े दर्ज किए गए, जिससे यह साबित हुआ कि अस्त्र मिसाइल प्रणाली पूरी तरह सटीक और भरोसेमंद है। इस हथियार प्रणाली के विकास में डीआरडीओ की कई प्रयोगशालाओं के अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) सहित 50 से अधिक सार्वजनिक और निजी कंपनियों ने योगदान दिया।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिसाइल प्रणाली में लगे स्वदेशी रेडियो फ्रिक्वेंसी सीकर को विकसित करने में डीआरडीओ, वायुसेना और सभी साझेदारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर है।
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रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की ओर से संयुक्त रूप से किया गया। मिसाइल की रेंज 100 किलोमीटर से अधिक है और इसमें अत्याधुनिक गाइडेड और नेविगेशन प्रणाली लगी है।
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परीक्षण के दौरान दो मिसाइलें अलग-अलग दूरी, लक्ष्य की दिशा और अलग परिस्थितियों में छोड़ी गईं और दोनों बार उन्होंने अपने लक्ष्य को बिल्कुल सटीकता से नष्ट किया। मंत्रालय ने कहा कि मिसाइल में लगा रेडियो फ्रिक्वेंसी सीकर भी पूरी तरह स्वदेशी है और इसे डीआरडीओ ने डिजाइन और विकसित किया है। परीक्षण के दौरान सभी उप-प्रणालियों ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया।
चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज में लगाए गए उपकरणों से उड़ान के दौरान सभी आंकड़े दर्ज किए गए, जिससे यह साबित हुआ कि अस्त्र मिसाइल प्रणाली पूरी तरह सटीक और भरोसेमंद है। इस हथियार प्रणाली के विकास में डीआरडीओ की कई प्रयोगशालाओं के अलावा हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) सहित 50 से अधिक सार्वजनिक और निजी कंपनियों ने योगदान दिया।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिसाइल प्रणाली में लगे स्वदेशी रेडियो फ्रिक्वेंसी सीकर को विकसित करने में डीआरडीओ, वायुसेना और सभी साझेदारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर है।