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'हमारे आंतरिक मामलों में दखल न दें': संयुक्त राष्ट्र को भारत का जवाब; कहा- दुनिया के प्रदर्शनों पर ध्यान दें

Sun, 11 Oct 2026 08:06 AM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/जिनेवा।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/जिनेवा। Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 11 Oct 2026 08:06 AM IST
सार

दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय की टिप्पणी से भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है। भारत ने इसे देश के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप बताते हुए कहा कि भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित प्रतिबंध भी लागू होते हैं।

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India Slams UN Human Rights Office Over Delhi Detentions, Calls Remarks Unwarranted Interference
भारत ने UN को सुनाई खरी-खरी। - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

दिल्ली में शनिवार को हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ पर भारत और संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) के बीच जुबानी टकराव सामने आया है। भारत ने प्रदर्शनकारियों की सामूहिक हिरासत को लेकर संयुक्त राष्ट्र की चिंता पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे देश के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप करार दिया है।

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भारत ने कहा कि वह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार संविधान द्वारा सुनिश्चित है। साथ ही, देश में मजबूत संस्थागत व्यवस्था, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया मौजूद हैं, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हैं। भारत की ओर से यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया मंच एक्स पर उसके आधिकारिक अकाउंट 'इंडिया एट यूएन' के जरिए दी गई। नई दिल्ली ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय को निष्पक्षता बनाए रखने की नसीहत देते हुए कहा कि उसे दुनिया के अन्य हिस्सों में हो रहे बड़े प्रदर्शनों पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए।
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भारत ने OHCHR की चिंता को बताया अनुचित
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने दिल्ली में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताई थी। इसके जवाब में भारत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देश के संविधान के तहत सुरक्षित है, लेकिन लोकतंत्र में इस अधिकार का इस्तेमाल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित उचित प्रतिबंधों के अधीन होता है।
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भारत के अनुसार, कानून लागू करने वाली एजेंसियां कानूनी प्रावधानों के अनुरूप काम करती हैं और किसी भी शिकायत के समाधान के लिए देश की अदालतें उपलब्ध हैं। नई दिल्ली ने अपने बयान में कहा कि OHCHR की चिंताएं गलत संदर्भ पर आधारित हैं और भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करती हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय से आग्रह किया कि वह अपने निष्पक्षता और गैर-चयनात्मक रवैये के सिद्धांतों के अनुरूप अन्य स्थानों पर हो रहे बड़े प्रदर्शनों पर भी तुलनात्मक ध्यान दे।

दिल्ली में करीब 3,000 लोगों को हिरासत में लेने का दावा
यह पूरा विवाद दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने करीब 3,000 लोगों को हिरासत में लिया। इनमें प्रदर्शनकारी, संबंधित राजनीतिक संगठन के समर्थक और विपक्षी नेता शामिल थे। ये लोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पहुंचकर धरना देना चाहते थे।

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए दिए गए आवेदन को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद राजधानी में प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा और परिवहन संबंधी प्रतिबंध लगाए गए। प्रदर्शनकारियों की भीड़ को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए इंटरनेट और परिवहन सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई गईं। इनमें दिल्ली मेट्रो, बस और रेल सेवाओं से संबंधित प्रतिबंध शामिल थे।

दिल्ली पहुंचते ही प्रदर्शन से जुड़े नेताओं को हिरासत में लिया गया
शनिवार सुबह मुंबई से दिल्ली पहुंचे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और दो अन्य नेताओं, सौरव दास तथा आशुतोष रांका को उनकी उड़ान के उतरने के कुछ समय बाद हिरासत में ले लिया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद अधिकांश हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया गया।


UN ने कहा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान हो
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थामीन अल-खीथान ने शनिवार को जारी बयान में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान सामूहिक हिरासत की खबरों पर चिंता जताई। उन्होंने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान सुनिश्चित करने की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को आवश्यकता और आनुपातिकता की कड़ी कसौटियों पर खरा उतरना चाहिए। अल-खीथान ने कानून लागू करने वाले अधिकारियों से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए सार्थक संवाद शुरू करने की सलाह दी।

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