कालेधन के खिलाफ अभियान तेज, स्विट्जरलैंड से मांगी 10 लोगों की अकाउंट डिटेल
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भारत ने स्विट्जरलैंड से 10 ऐसे लोगों और कंपनियों के बारे में जानकारी मांगी है जिनपर बिना टैक्स दिए स्विस बैंक में पैसे जमाए हैं। जिनकी जानकारी मांगी गई है उनमें दो टेक्सटाइल कंपनी है और बाकी कंपनियां आर्ट क्यूरेटर और कॉर्पेट एक्सपोर्ट के बिजनेस से जुड़ी हुई हैं।
पिछले हफ्ते स्विट्जरलैंड के टैक्स विभाग ने नोटिस जारी कर 30 दिन में जवाब मांगा है और भारत को बैंक अकाउंट डिटेल को सौंपने की बात कही है। ऐसा स्विट्जरलैंड के नियमों के मुताबिक किया गया है। स्विट्जरलैंड बैंक डिटेल देने से पहले अकाउंट होल्डर को मौका देता है कि वह अपनी दलील पेश करे। साथ ही अगर ये नोटिस संबंधित विभाग और शख्स के पास नहीं पहुंचता है तो नियम के मुताबिक पब्लिक पब्लिक गजट अधिसूचन के जरिए उन तक यह सूचना पहुंचाता है।
पिछले हफ्ते भारत के 10 लोगों या कंपनियों के खिलाफ यह नोटिस जारी किए गए हैं जो कि किसी देश के लिए एक हफ्ते में सबसे ज्यादा है। नोटिस में दो कंपनियों के नाम मुख्य तौर पर नियो कॉर्पोरेशन इंटरनेशनल और सेल मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी लिमिटड के नाम शामिल हैं।
कई देशों से जुड़े हुए हैं तार
पनामा और ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड जैसी कंपनियां भी शामिल हैं जिन कंपनियों के नाम सामने आए हैं उनमें से अधिकत्तर लोग या कंपनियां कॉर्पेट एक्सपोर्ट बिजनेस और आर्ट क्यूरेटर के बिजनेस से जुड़ी हैं। कई देशों में इनके तार जुड़े हुए हैं।
कुछ लोगों के नाम भी सामने आए हैं जिनमें अब्दुल राशीद मीर, अमीर मीर, साबेहा मीर, मुजीब मीर और तबस्सुम मीर हैं। नोटिस में कॉटेज इंडस्ट्रीज एक्सपोशन, मोडाले एसए और प्रोग्रेस वेंचर ग्रुप के नाम भी शामिल हैं।
इनमें से कुछ के नाम पनामा लीक दस्तावेजों में भी थे, लेकिन इनमें से ज्यादात्तर कंपनियों ने किसी भी गलत कारोबार की बात को नकारा है। वहीं इससे पहले स्विट्जरलैंड के संघीय कर प्रशासन (एफटीए) ने संबंधित कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाबदेही के लिए अपना प्रतिनिधि नियुक्त करने को कहा था।