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कानून तोड़ने वालों को मानवाधिकार के नाम पर नहीं छोड़ सकते : भारत
Wed, 21 Oct 2020 02:03 AM IST
Jeet Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/जिनेवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/जिनेवा
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 21 Oct 2020 02:03 AM IST
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human rights council
- फोटो : UN News
भारत ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (यूएनएचसीएचआर) मिशेल बाखलेट को नसीहत देते हुए कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों को मानवाधिकार के बहाने नहीं बख्शा जा सकता है। भारत ने यह जवाब विभिन्न एनजीओ पर प्रतिबंध लगाए जाने और कथित सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर बाखलेट की तरफ से प्रतिक्रिया के बाद दिया है।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, हमने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़े कुछ मुद्दों को लेकर यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त के कुछ बयान देखे हैं। भारत एक लोकतांत्रिक राज्य है, जो कानून और स्वतंत्र न्यायपालिका के शासन पर आधारित है।
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कानून बनाना निश्चित तौर पर एक संप्रभु विशेषाधिकार होता है। कोई भी कानून तोड़ना मानवाधिकार के बहाने बख्शा नहीं जा सकता है। इस मामले में यूएन की संस्था से ज्यादा जानकारी वाले दृष्टिकोण की अपेक्षा थी।
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इससे पहले बाखलेट ने भारत सरकार से मानवाधिकार रक्षकों व गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के अधिकारों और अहम कार्य करने की क्षमता को सुरक्षित रखने की अपील की थी। बाखलेट ने यह अपील बहुत सारे समूहों के प्रतिनिधि के तौर पर की थी।
बाखलेट ने कहा, भारत में लंबे समय तक एक मजबूत नागरिक समाज रहा है, जो देश और दुनिया भर में मानवाधिकारों की वकालत के मामले में सबसे आगे रहा है। लेकिन मुझे चिंता है कि अस्पष्ट रूप से परिभाषित कानून तेजी से इन आवाजों को दबाने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। उन्होंने खासतौर पर एफसीआर के उपयोग पर चिंता जताई थी।
बता दें कि केंद्र सरकार ने एफसीआरए में संशोधन करते हुए एनजीओ के पंजीकरण के लिए सभी पदाधिकारियों का आधार नंबर देना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही किसी भी एनजीओ द्वारा हासिल किए गए पैसे के प्रशासनिक उपयोग की सीमा 50 फीसदी से घटाकर 20 फीसदी वार्षिक कर दी गई है। इन प्रावधानों को विभिन्न एनजीओ ने खुद पर प्रतिबंध जैसा करार दिया है।