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पाकिस्तान के रवैये के चलते मुंबई या पठानकोट आतंकी हमलों में अब तक नहीं मिला इंसाफ: भारत
Wed, 30 Sep 2020 02:15 AM IST
Kuldeep Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 30 Sep 2020 02:15 AM IST
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विजय ठाकुर सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
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भारत ने कहा है कि पाकिस्तान के ढुलमुल रवैये और सहयोग न करने कारण 2008 के मुंबई और 2016 के पठानकोट आतंकी हमलों के पीड़ितों को अब तक इंसाफ नहीं मिल पाया है। आतंकवाद से पीड़ित लोगों के मित्र समूह की दूसरी मंत्रिस्तरीय बैठक में भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव (पूर्व) विजय ठाकुर सिंह ने कहा, ऐसे अपराधों में न्याय पाने के अधिकार से पीड़ित कहीं वंचित न हो जाएं, उनकी मदद करनी होगी। विश्व समुदाय को आतंक पीड़ितों के अधिकारों से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। उन्हें न्याय दिलाना चाहिए।
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विदेश मंत्रालय की सचिव ने विश्व बिरादरी से की आतंक पीड़ितों की मदद की अपील
विदेश मंत्रालय की सचिव ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर निशाना साधते हुए कहा, मैं उदाहरण के तौर पर बताना चाहूंगी कि 2008 के मुंबई आतंकी हमले और 2016 के पठानकोट आतंकी हमले के पीड़ितों को अभी तक न्याय नहीं मिला। इसकी वजह है एक देश का सहयोग न देना और उस देश की न्याय दिलाने की इच्छा न होना।
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दोनों हमलों के दोषियों को सीमापार आतंकी समूहों से बढ़ावा मिला और इस संबंध में दिए गए सुबूतों पर पड़ोसी देश ने कार्रवाई करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। इस वर्चुअल मीटिंग का आयोजन अफगानिस्तान और स्पेन के विदेश मंत्रियों, समूह के सह-अध्यक्षों और संयुक्त राष्ट्र आतंकरोधी कार्यालय ने किया था।
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कोरोना महामारी के बीच आतंकवाद शांति और सुरक्षा के लिए खतरा
उन्होंने कहा, आतंकवादी अपने नापाक मंसूबों में सफलता न मिलती देख आतंकी खूनी खेल खेलते हैं। मौजूदा कोरोना महामारी के बीच भी आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है।
आतंकवाद की परिभाषा तय करने की मांग कर रहा भारत
आतंकवाद पीड़ितों के मित्र संगठन की शुरुआत पिछले साल संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने की थी। भारत समेत 24 देश इसमें शामिल हैं। भारत 1996 से लगातार अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि के तहत संयुक्त राष्ट्र से आतंकवाद की परिभाषा तय करने की मांग कर रहा है। वैश्विक बिरादरी में अभी तक सहमति न बन पाने की वजह से अभी तक भारत की ये मांग पूरी नहीं हो पाई है।