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सुखद: भारत की 'वार्म' वैक्सीन का सार्स और सीओवी 2 के सभी रुपों पर असर, अब मानव पर परीक्षण का इंतजार

Fri, 16 Jul 2021 08:27 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Fri, 16 Jul 2021 08:27 PM IST
सार

आईआईएसी और बायोटेक फर्म माइनवैक्स के वैज्ञानिकों ने जिस 'वार्म' वैक्सीन का फॉर्मूलेशन तैयार किया है उसका चिंता के कारण बने सार्स और सीओवी 2 वेरिएंट पर असर हुआ है।

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India's ‘warm’ vaccine shows results against all variants of concern
कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock

विस्तार

ऑस्ट्रेलिया की सीएसआईआरओ ने फॉर्मूलेशन का एक स्वतंत्र मूल्यांकन किया है। यह वही एजेंसी है जिसने पिछले साल ऑक्सफोर्ड-कोविशील्ड वैक्सीन का एक पशु पर परीक्षण किया था।  इस मूल्यांकन का निष्कर्ष गुरुवार को पीयर-रिव्यू एसीएस इंफेक्शियस डिजीज जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं। प्रकाशित अध्ययन का नेतृत्व आईआईएससी के प्रोफेसर राघवन वरदराजन ने किया था। 
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शोध पत्र के मुताबिक शोधकर्ताओं ने दिखाया है कि फॉर्मूलेशन ने चूहों में एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्तेजित किया, और चूहे को वायरस से बचाया। उसक बाद भी वह 37 डिग्री सेल्सियस पर एक महीने तक और 100 डिग्री सेल्सियस पर 90 मिनट तक स्थिर रहा।  अधिकांश टीकों को प्रभावी रहने के लिए कोल्ड स्टोरेज में रखना जरूरी होता है।  ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका को 2-8 डिग्री सेल्सियस के बीच रखा जाना चाहिए,  फाइजर को -70 डिग्री सेल्सियस पर विशेष कोल्ड स्टोरेज की जरूरत होती है।
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चिंता का विषय और मानव परीक्षण

आगे क्या कदम उठाए जाएंगे इस बारे में  वरदराजन ने कहा कि उन्होंने भारत में पहले, दूसरे और तीसरे चरण के लिए  मानव परीक्षण के लिए अनुदान और धन के लिए सरकार को आवेदन किया है। हमें परीक्षणों के लिए कम से कम 30 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी और इस समय, मैं केवल इतना कह सकता हूं कि फंडिंग के लिए आवेदन किया गया है। 
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सीएसआईआरओ के कोविड -19 प्रोजेक्ट लीडर और सह-लेखक प्रो एसएस वासन ने कहा कि टीका लगाए गए चूहों ने जीवित वायरस के सभी प्रकारों के लिए एक मजबूत प्रतिक्रिया दिखाई। "हमारे डेटा से पता चलता है कि सभी फॉर्मूलेशन परीक्षण किए गए एंटीबॉडी में अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा एसएआरएस-सीओवी-2 सभी पर प्रभावी है। 

 
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