देश के दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 का 3 जनवरी को हो सकता है प्रक्षेपण
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देश के दूसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-2 को अगले साल 3 जनवरी को प्रक्षेपित किया जा सकता है लेकिन किसी कारणवश ऐसा नहीं होने पर इसके प्रक्षेपण का विस्तार मार्च 2019 तक किया जा सकता है। पहले इस साल के अंत तक इसका प्रक्षेपण किया जाना था। यह जानकारी रविवार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. सिवन ने दी।
उन्होंने बताया कि हमने 3 जनवरी को चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण की तिथि तय की है। इसी को ध्यान में रखकर अपनी तैयारियां कर रहे हैं लेकिन किसी कारणवश ऐसा नहीं हो सका है तो यह मार्च तक खिसकाया जा सकता है।
चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण को स्थगित करने कारण उन्होंने इसके डिजाइन में किए गए कुछ अहम बदलावों को बताया। उन्होंने कहा कि इन बदलाव से चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर आसानी से उतर सकेगा। वह भारतीय अंतरिक्ष मिशन के प्रणेता डॉ. विक्रम साराभाई की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम से इतर बोल रहे थे।
इसलिए बढ़ाया गया वजन
चंद्रयान-2 के वजन में 600 किलोग्राम बढ़ोतरी पर सिवन ने बताया कि एक्सपेरिमेंट के दौरान चंद्रयान के अलग होने के बाद सेटेलाइट हिला। इसलिए चंद्रयान के लैंडिंग के लिए डिजाइन में जरूरी बदलाव किए गए और इसका वजन बढ़ाया गया।
अगले तीन साल में 50 सेटेलाइट छोड़े जाएंगे
उन्होंने बताया कि इसरो की अगले तीन साल में 50 सेटेलाइट को छोड़े जाने की तैयारी है। इनमें से 22 सेटेटलाइट 2019 में प्रक्षेपित किए जाएंगे जोकि इसरो के इतिहास में एक साल में सबसे अधिक होंगे।
इस साल भी इसरो की योजना हर महीने कम से कम दो सेटेलाइट छोड़ने की है। हमारा अगला मिशन पीएसएलवी सी42 है जोकि नोवासैट और एस1-4 को प्रक्षेपित करेगा। ये दोनों कमर्शियल सेटेलाइट ब्रिटेन के हैं। इनको सितंबर में प्रक्षेपित करने की योजना है।