उलझे ट्रंप ने उलझाई भारत की कूटनीति
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विभिन्न देशों और वैश्विक संवदेनशील मुद्दों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति की अस्पष्टता ने भारत की कूटनीति को भी उलझा कर रख दिया है। खासतौर से पाकिस्तान और रूस के संदर्भ में नई सरकार के कभी नरम तो कभी गरम रुख से भारत उलझन में है। इसी बीच अपने चुनावी वादे के अनुरूप एच1 बी वीजा की शर्तें कड़ी कर भारत के परेशानी को बढ़ा दिया है।
इसके अलावा मुस्लिम देशों के अलावा रूस, पाकिस्तान के संदर्भ में ट्रंप प्रशासन का रुख स्पष्ट न होने के कारण भारत फिलहाल देखो और इंतजार करो की रणनीति अपना रहा है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ भी फिलहाल देखो और इंतजार करो की रणनीति को सही रणनीति मान रहे हैं।
दरअसल अमेरिकी चुनाव में ट्रंप के भाषणों से विश्व बिरादरी को यह संदेश गया था कि नए राष्ट्रपति न सिर्फ पाकिस्तान को आतंकवाद के मामले में कड़ा सबक सिखाएंगे, बल्कि चीन को साधने के लिए दशकों बाद रूस-भारत-अमेरिका की मजबूत तिकड़ी विश्व मंच पर खड़ी दिखाई देगी। इन संकेतों को तब बल मिला जब राष्ट्ररपति बनने के बाद ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से विस्तार से फोन पर बात की। हालांकि इस बातचीत के बाद हालांकि कई मुद्दों पर ट्रंप ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
अफगानिस्तान के संदर्भ में ट्रंप प्रशासन की स्थिति साफ नहीं
सिनेटर को वीजा न देने, आतंकी मौलाना मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्ररीय आतंकी घोषित कराने की पहल कर ट्रंप ने सकारात्मक संकेत दिया। मगर अफगानिस्तान के संदर्भ में ट्रंप प्रशासन की स्थिति अब भी साफ नहीं हो पाई है। इसके अलावा रूस और अमेरिका के भावी रिश्तों पर भी सस्पेंस बना हुआ है। पूर्व राजदूत जी पार्थसारथी कहते हैं कि फिलहाल कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन का नजरिया साफ नहीं है। ऐसे में निश्चित रूप से भारत के पास अमेरिका की नई सरकार का रुख भांपने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत अभी पाकिस्तान को ले कर ट्रंप के रुख को ले कर आश्वस्त नहीं है। जाहिर तौर पर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्ना होने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों को संवराने का प्रयास शुरू होने की संभावना है। मगर इस मुद्दे पर अमेरिका का रुख साफ नहीं होने से फिलहाल निकट भविष्य में इस दिशा में पहल की संभावना नहीं दिख रही।
गौरतलब है कि पाकिस्तान की ओर से मुंबई हमला मामले के मास्टर माइंड आतंकी हाफिज सईद पर शिकंजा कसने, राह भटक कर सीमा पार करने वाले फौजी चंदू बाबूलाल चव्हान को वापस भेज कर के पाकिस्तान के फैसले को इसी नजरिये से देखा जा रहा था।