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Digital India: 'भारत की डिजिटल क्रांति दुनिया के लिए मिसाल', नोबेल विजेता अर्थशास्त्री ने की सरकार की तारीफ

Mon, 21 Oct 2024 01:24 AM IST
निर्मल कांत एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 21 Oct 2024 01:24 AM IST
सार

Digital India: भारत की यात्रा पर आए नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर पॉल माइकल रोमर ने आम लोगों तक डिजिटल पहुंच को आगे बढ़ाने और इसे देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल क्रांति बहुत दिलचस्प है क्योंकि इसका उपयोग सरकार की ओर से समाज के सभी सदस्यों को लाभ प्रदान करने के लिए किया जा रहा है।

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India's digital revolution example for world Nobel laureate economist Paul Michael Romer
Paul Michael Romer - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर पॉल माइकल रोमर ने भारत की डिजिटल क्रांति सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इसके माध्यम से लोगों के जीवन को न सिर्फ आसान और सरल बनाया है, बल्कि दुनिया के सामने भी एक मिसाल पेश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया पहल को 1 जुलाई, 2015 को लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ना और डिजिटल साक्षरता में सुधार करना है।

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भारत की यात्रा पर आए नोबेल पुरस्कार विजेता ने आम लोगों तक डिजिटल पहुंच को आगे बढ़ाने और इसे देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल क्रांति बहुत दिलचस्प है क्योंकि इसका उपयोग सरकार की ओर से समाज के सभी सदस्यों को लाभ प्रदान करने के लिए किया जा रहा है। यह दुनिया के अधिकांश देशों से बहुत अलग है, जहां कुछ ही लोगों को इसका लाभ मिलता है। भारत की कहानी अनूठी है क्योंकि यहां सभी को इसका लाभ मिल रहा है।
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प्रोफेसर पॉल ने भारत के डिजिटल परिवर्तन के एक अनूठे पहलू की ओर इशारा किया और कहा कि इसका अनुकरण करके दक्षिण एशियाई राष्ट्र भारी लाभ उठा सकते हैं। इस सवाल पर कि भारत की डिजिटल सफलता दक्षिण एशियाई देशों के लिए एक आदर्श कैसे बन सकती है, उन्होंने कहा कि यूपीआई, आधार, डीबीटी और डिजिलॉकर जैसी अन्य ऑनलाइन सेवाओं ने जबरदस्त सफलता दिखाई है। दक्षिण एशियाई देश इनका अनुकरण कर अपने यहां भी इस तरह की सफलता की कहानी लिख सकते हैं। उन्होंने कहा कि अन्य देशों, विशेष रूप से दक्षिण एशियाई देशों को यह विश्वास होना चाहिए कि अगर भारत यह कर सकता है तो हम भी कर सकते हैं।
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आधार दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी
उन्होंने कहा कि आधार इस समय दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी प्रणाली है और इसने लोगों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण सहित सरकारी लाभ पाने में मदद की है। बकौल रोमर, भारत में लोगों ने देखा कि आधार को एक ऐसा मंच बना सकते हैं जो सरकार नियंत्रित हो और जिसका उपयोग लोगों के लाभ के लिए किया जाए, न कि केवल कुछ लोगों की कमाई के लिए। रोमर ने एक कार्यक्रम में कहा कि अमेरिका में ऐसा मंच सफलतापूर्वक स्थापित नहीं किया जा सका क्योंकि वहां निजी क्षेत्र का एकाधिकार था। उन्होंने कहा, किसी व्यक्ति को मेरे सामने पेश करें, और मैं बता दूंगा कि उसका नंबर क्या है। उन्होंने कहा कि भारत में सरकार यह बताने से कतराती नहीं है कि यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसी सेवाओं में इसका उपयोग कैसे किया जाएगा। 


2018 में संयुक्त रूप से मिला नोबेल पुरस्कार
बोस्टन कॉलेज में अर्थशास्त्र के विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पॉल एक अमेरिकी अर्थशास्त्री और नीति उद्यमी हैं। वह अक्टूबर 2016 में विश्व बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री बने और जनवरी 2018 तक इस पद पर रहे। उन्हें अर्थशास्त्र के लिए 2018 नोबेल पुरस्कार (विलियम नॉर्डहॉस के साथ साझा) से नवाजा गया।

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