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भारत ने खारिज की अमेरिकी रिपोर्ट, सस्ती दवाईयों पर बताया हमला

Sun, 28 Apr 2019 08:16 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 28 Apr 2019 08:16 AM IST
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India rejected allegations made in US report, called it attack on low cost generic drugs
दवाएं (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media

भारत ने अमेरिका की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि भारत दुनिया में नकली दवाओं का मुख्य स्रोत है। भारत का कहना है कि यह जेनरिक दवाओं पर हमला है और इसकी वजह से देश में स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती हुई हैं। 

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यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजनटेटिव (यूएसटीआर) की स्पेशल 301 रिपोर्ट ने भारत और चीन की आलोचना करते हुए उन्हें दुनिया में बिकने वाली नकली दवाओं का मुख्य स्रोत बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय बाजार में बिकने वाली लगभग 20 प्रतिशत दवाएं नकली होती हैं।
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स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूडान ने कहा, 'यूएसटीआर द्वारा की गई टिप्पणियों से हम पूरी तरह असहमत हैं। हम उनके निष्कर्षों और कार्यप्रणाली के बारे में नहीं जानते हैं। इसके बजाय, हम इसे कम लागत वाली जेनरिक दवाओं के विरोध के रूप में देखते हैं। साथ ही भारतीय दवा इंडस्ट्री जो दुनिया की फार्मेसी हब के रूप में है, उसके विरोध में भी देखते हैं।'
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यूएसटीआर रिपोर्ट को अमेरिका सालाना जारी करता है। रिपोर्ट को अमेरिका अपनी उस नीति के तहत जारी करता है जिसमें वह दुनिया के दूसरे देशों पर दबाव बनाकर अपनी फार्मास्यूटिकल्स कंपनियों को उन देशों में पेटेंट दिला सके ताकि मरीजों को सस्ती दवाएं आसानी से मिल सकें।

इस रिपोर्ट में अमेरिका ने भारत को बौद्धिक संपदा अधिकारों का उल्लंघन करने के मामले में प्राथमिकता की सूची में रखा है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'विशेष रूप से भारत और चीन दुनिया में बिकने वाली नकली दवाओं के मुख्य स्रोत हैं। इसका एक सटीक आंकड़ा निर्धारित करना संभव नहीं है। अध्ययन बताते हैं कि भारतीय बाजार में बिकने वाली 20 फीसदी दवाएं नकली हैं जो मरीज के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।'


रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अफ्रीका, कनाडा, द कैरिबियन, यूरोपियन यूनियन, दक्षिण अमेरिका और अमेरिका में नकली दवाओं को भेजता है। सूडान ने इस बात पर जोर दिया कि जेनरिक दवाएं कम लागत वाली लेकिन गुणवत्ता वाले उत्पाद हैं। उन्होंने कहा कि केवल प्रमाणित दवा उत्पादों का निर्यात किया जाता है। स्थानीय तौर पर 75 प्रतिशत से अधिक बिक्री जेनेरिक दवाओं की होती है।


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