भविष्य की जंग के लिए भारत तैयार: डाटा, ड्रोन और कॉग्निटिव वॉरफेयर फोर्स बनाने की योजना; सेना के लिए कितनी अहम?
भारत सरकार ने भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए सेना को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा बल विजन-2047 दस्तावेज में डाटा फोर्स, ड्रोन फोर्स और कॉग्निटिव वॉरफेयर एक्शन फोर्स बनाने की योजना है। इसके साथ स्पेस और साइबर कमांड भी बनाए जाएंगे।
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यह पहल रक्षा बल विजन-2047 दस्तावेज के तहत सामने आई है। हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह दस्तावेज जारी किया था। इसका लक्ष्य आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारतीय सेनाओं को पूरी तरह आत्मनिर्भर और भविष्य के युद्धों के लिए तैयार बनाना है। इसके तहत सेना की क्षमता को जल, थल और नभ से आगे बढ़ाकर साइबर, अंतरिक्ष और डाटा के क्षेत्र तक विस्तारित करने की योजना है।
The Defence Ministry has issued the Defence Forces Vision 2047, which talks about building military capabilities in a phased manner by 2047. The vision document talks about the creation of a dedicated Drone Force, separate Space and Cyber Commands, along with many other new ones.… pic.twitter.com/Pi3Q86q1X2
— ANI (@ANI) March 12, 2026
डाटा फोर्स का गठन क्यों किया जाएगा?
डाटा फोर्स युद्ध के मैदान में बड़ी मात्रा में मिलने वाले डाटा का विश्लेषण करेगी। सेंसर, सैटेलाइट, रडार और ड्रोन से जो जानकारी मिलेगी, उसे एआई तकनीक की मदद से युद्ध रणनीति में बदला जाएगा। इससे दुश्मन की गतिविधियों और उसकी अगली चाल का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी। इससे सेना को तेज और सटीक निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
ड्रोन फोर्स युद्ध के तरीके को कैसे बदलेगी?
ड्रोन फोर्स मानव रहित प्रणालियों का इस्तेमाल कर युद्ध की रणनीति को बदलने का काम करेगी। ड्रोन की मदद से दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर सटीक हमले भी किए जा सकेंगे। आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ रही है और इसी कारण भारत भी इस क्षेत्र में अपनी क्षमता मजबूत करना चाहता है।
सेना के लिए कितनी अहम?
- भविष्य के युद्ध की तैयारी... आधुनिक युद्ध अब सिर्फ जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं है। साइबर, स्पेस, डाटा और ड्रोन तकनीक युद्ध का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। नई फोर्स बनने से सेना इन क्षेत्रों में मजबूत होगी।
- तेज और सटीक फैसले... डाटा फोर्स सेंसर, सैटेलाइट और ड्रोन से मिले विशाल डाटा का विश्लेषण करेगी। इससे दुश्मन की गतिविधियों और उसकी अगली चाल का पहले ही अंदाजा लगाया जा सकेगा।
- कम जोखिम में ऑपरेशन... ड्रोन फोर्स की मदद से बिना सैनिकों को खतरे में डाले निगरानी और हमले किए जा सकेंगे। इससे सीमा पर सुरक्षा और ऑपरेशन दोनों ज्यादा प्रभावी होंगे।
- साइबर और स्पेस सुरक्षा... स्पेस और साइबर कमांड भारत के उपग्रहों और सैन्य नेटवर्क को दुश्मन के हमलों से बचाएंगे। आज के दौर में यह सुरक्षा बेहद जरूरी हो गई है।
- मनोवैज्ञानिक और सूचना युद्ध... कॉग्निटिव वॉरफेयर फोर्स दुश्मन की सोच और सूचना तंत्र को प्रभावित करने की क्षमता विकसित करेगी। इससे युद्ध केवल हथियारों से नहीं बल्कि सूचना और रणनीति से भी लड़ा जा सकेगा।
साइबर कमांड की क्या भूमिका होगी?
नई योजना के तहत स्पेस कमांड और साइबर कमांड भी स्थापित किए जाएंगे। स्पेस कमांड का काम अंतरिक्ष में भारत की उपग्रह संपत्तियों की सुरक्षा करना होगा। युद्ध की स्थिति में अंतरिक्ष का सैन्य उपयोग भी इसी कमांड के माध्यम से किया जाएगा। वहीं साइबर कमांड सेना के डिजिटल नेटवर्क को हैकिंग और साइबर हमलों से बचाने का काम करेगी।
कॉग्निटिव वॉरफेयर फोर्स क्या करेगी?
कॉग्निटिव वॉरफेयर एक्शन फोर्स मनोवैज्ञानिक और सूचना युद्ध पर काम करेगी। इस फोर्स का उद्देश्य दुश्मन की सोच और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करना होगा। एआई, एल्गोरिदम और आधुनिक कंप्यूटिंग तकनीक की मदद से सूचना युद्ध को और प्रभावी बनाया जाएगा। इससे दुश्मन के प्रचार, अफवाह और दुष्प्रचार का भी जवाब दिया जा सकेगा।
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