भारत कॉरपोरेट धोखाधड़ी की 'मेरिट लिस्ट' में थर्ड
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क्रॉल और इकॉनामिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की ओर से कराए गए इस संयुक्त सर्वेक्षण में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों में काम करने वाले दुनियाभर के 768 एग्जक्यूटिव ने हिस्सा लिया।
यह सर्वेक्षण साल 2015 से मार्च 2016 के दौरान किया गया। सर्वेक्षण में शामिल तीन चौथाई लोगों ने पिछले साल अपनी कंपनियों में धोखाधड़ी का सामना करने की बात स्वीकार की। वहीं भारत में ऐसे लोगों की संख्या 80 फीसद थी।
2013-2014 में ऐसी कंपनियों की संख्या 69 फीसद थी। इस दौरान 92 फीसद कंपनियों में धोखाधड़ी का पता लगा
क्राल की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सर्वेक्षण में शामिल देशों में भारत उन देशों में शामिल है, जहां धोखाधड़ी की समस्या सबसे बड़ी है।
रिपोर्ट की मुताबिक साल 2015-2016 में भारत की 80 फीसद कंपनियां धोखाधड़ी का शिकार हुईं। 2013-2014 में ऐसी कंपनियों की संख्या 69 फीसद थी। इस दौरान 92 फीसद कंपनियों में धोखाधड़ी का पता लगा। 2013-2014 में ऐसी कंपनियों की संख्या 71 फीसद थी।
क्राल की प्रबंध निदेशक और दक्षिण एशिया मामलों की प्रमुख रश्मि खुराना ने एक बयान में कहा हैं, ''आंतरिक धोखाधड़ी के मामले में इंडिया इंक बहुत अधिक संवेदनशील है। मुझे लगता है कि कंपनियों ने अब इस बात को समझना शुरू कर दिया है कि इस खतरें को कम करने के लिए कुछ किया जाना चाहिए।''