फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   India Objects on UN intervention petition on CAA , said should not interfere in internal matters

सीएए पर संयुक्त राष्ट्र ने दी हस्तक्षेप याचिका भारत की दो टूक, आंतरिक मामले में दखल न दें

Tue, 03 Mar 2020 11:15 PM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Tue, 03 Mar 2020 11:15 PM IST
विज्ञापन
India Objects on UN intervention petition on CAA , said should not interfere in internal matters
सीएए एनआरसी एनपीआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन - फोटो : PTI

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त ने सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) मामले में दखल आवेदन दाखिल किया है। आवेदन में सीएए के जरिए धार्मिक आधारों पर कुछ लोगों के संरक्षण दिए जाने का स्वागत किया है लेकिन मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों को इससे बाहर रखने पर सवाल उठाया गया है।

विज्ञापन


संयक्त राष्ट्र उच्चायुक्त माइकल बेचलेट जेरिया ने आवेदन के जरिए इस मामले में अमाइकस क्यूरी के तौर पर दखल देने की इजाजत मांगी है। आवेदन में माइकल ने कहा कि उच्चायुक्त की भूमिका अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का संरक्षण करना है। लिहाजा उन्होंने अदालत को सहयोग देने के इरादे से आवेदन दाखिल किया है, जिससे कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी बाध्यताओं का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
विज्ञापन


आवेदन में कहा कि सीएए मामला प्रवासियों समेत सभी रिफ्यूजी से जुड़ा मामला है और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून व उसके मानकों के मद्देनजर इसे देखने की जरूरत है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने सीएए पर जो परीक्षण करने का निर्णय लिया है, उसमें उच्चायुक्त का भी हित जुड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियम व मानकों के आलोक में इसे देखने की जरूरत है। सभी प्रवासी कानून की नजरों में एक हैं, लिहाजा सभी को एकसमान कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए। आवेदन में कहा गया है कि सभी प्रवासी एकसमान हैं और सभी के अधिकार समान है। उनके साथ धर्म, नागरिकता, प्रजाति आदि के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।

आवेदन में कहा गया है कि सीएए में इस बात को नजरअंदाज कर दिया गया है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश में और भी कई धर्म व प्रजाति हैं जिन्हें धर्म के आधार पर प्रताड़ित किया जाता है। मसलन पाकिस्तान में अहमदिया, शिया आदि को भी प्रताड़ित किया जाता है, लेकिन सीएए में इन्हें शामिल नहीं किया गया है।

भारत की दो टूक, आंतरिक मामले में दखल न दें

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर कर जेनेवा स्थित भारत के स्थायी मिशन को इसकी जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दो टूक कहा, सीएए भारत का आंतरिक मामला है और यह कानून बनाने वाली भारतीय संसद के संप्रभुता के अधिकार से संबंधित है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने मंगलवार को कहा, जेनेवा में हमारे स्थायी मिशन को सोमवार शाम को यह बताया गया कि यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बेश्लेट के कार्यालय ने सीएए के खिलाफ भारतीय सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है।

हमारा स्पष्ट रूप से मानना है कि कोई भी विदेशी पक्ष का भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दे पर कोई अधिकार नहीं बनता। हमारा रुख एकदम स्पष्ट है कि सीएए सांविधानिक रूप से वैध है और सांविधानिक मूल्यों का अनुपालन करता है। कुमार ने कहा, यह भारत के विभाजन की त्रासदी में सामने आए मानवाधिकार के मुद्दों के संबंध में हमारी ओर से जताई गई राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत लोकतांत्रिक देश है, जो कानून के मुताबिक चलता है। हम अपनी स्वतंत्र न्यायपालिका का सम्मान करते हैं और हमें उसमें पूरा भरोसा है। सुप्रीम कोर्ट में हमारी मजबूत व कानूनी लिहाज से टिकने वाली स्थिति को जीत मिलेगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed