INDIA: पश्चिम बंगाल में टीएमसी-कांग्रेस-वामदलों में समझौता नहीं, पर BJP को इस फॉर्मूले से गठबंधन देगा चुनौती
INDIA: तृणमूल कांग्रेस सूत्रों से अमर उजाला को मिली जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी ने बेंगलुरु बैठक में जाने से पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे पश्चिम बंगाल में वामदलों के साथ समझौता नहीं करेंगी...
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विपक्षी दलों ने बेंगलुरु में बैठक कर भाजपा को हराने का फॉर्मूला खोज लेने का दावा किया है। इसके अंतर्गत इंडिया (INDIA) नाम के गठबंधन से भाजपा को चुनौती देने की रणनीति पर सहमति बनी गई है। दावे के अनुसार 26 विपक्षी दल देश की सभी लोकसभा सीटों पर विपक्ष का एक साझा उम्मीदवार खड़ा कर भाजपा को चुनौती देंगे। लेकिन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी दलों और कांग्रेस के बीच आधिकारिक समझौता नहीं हो सकता है। लेकिन इन दलों ने भाजपा को कड़ी चुनौती देने के लिए यह फॉर्मूला निकाला है कि बिना औपचारिक गठबंधन के ही पश्चिम बंगाल की सीटों पर भाजपा को चुनौती दी जाएगी।
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तृणमूल कांग्रेस सूत्रों से अमर उजाला को मिली जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी ने बेंगलुरु बैठक में जाने से पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे पश्चिम बंगाल में वामदलों के साथ समझौता नहीं करेंगी। सीताराम येचुरी का तृणमूल कांग्रेस से बंगाल में कोई समझौता न होने की बात कहना उसी फॉर्मूले का हिस्सा है। लेकिन समझौता न होने के बाद भी भाजपा को कड़ी चुनौती देने का फॉर्मूला तय कर लिया गया है।
तय फॉर्मूले के अनुसार बंगाल में तीनों दलों के बीच एक फ्रेंडली फाइट का फॉर्मूला तय किया गया है। इसके अंतर्गत ममता बनर्जी बंगाल की 32 सीट अपने पास रखेंगी, जबकि शेष 10 सीटें वे कांग्रेस और वामदलों के लिए छोड़ेंगी। इन सीटों पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से कमजोर डमी कैंडिडेट उतारे जाएंगे। इन सीटों में छह से सात सीटें कांग्रेस अपने पास रख सकती है। कांग्रेस अपने कोटे से दो से तीन सीट वामदलों को दे सकती है। जानकारी के मुताबिक इस फॉर्मूले पर तीनों दलों के नेताओं के बीच प्राथमिक स्तर पर सहमति बन गई है। तृणमूल कांग्रेस कौन सी सीटें कांग्रेस और वामदलों को देंगी, इस पर बाद में निर्णय लिया जायेगा।
समझौता क्यों नहीं
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस वामदलों को पटखनी देकर ही पश्चिम बंगाल की सत्ता में आई हैं। आज भी पश्चिम बंगाल की राजनीतिक जमीन पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का सबसे ज्यादा टकराव वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं से ही है। बीते पंचायत चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस और वामदलों के बीच जमकर टकराव हुआ है। यही कारण है कि ममता बनर्जी किसी भी तरह वामपंथी दलों के साथ खड़े होते हुए नहीं दिखना चाहती हैं। वे पहले दिन से इस रुख पर कायम हैं।
जहां तृणमूल कांग्रेस को वामदलों के साथ खड़ी होने में परेशानी है, वहीं कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और वाम दलों के नेता भी तृणमूल कांग्रेस पर अपने कार्यकर्ताओं की हत्या कराने का आरोप लगाती रही हैं। अधीर रंजन चौधरी के आक्रामक बयानों ने भी इशारा कर दिया था कि बंगाल में ये दल एक साथ खड़े होने का जोखिम नहीं उठाएंगे। आंतरिक राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उनके लिए भी ममता बनर्जी के साथ खड़े दिखना आसान नहीं है। यही कारण है कि बंगाल में भाजपा को मात देने के लिए इस 'फ्रेंडली फाइट' का रास्ता अपनाया जायेगा।