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अध्ययन: भारत के बड़े इलाकों में जंगलों को फिर से बढ़ाने का दिखा लाभ, जलवायु परिवर्तन में 80 फीसदी तक हुआ सुधार

Mon, 26 Aug 2024 03:52 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 26 Aug 2024 03:52 AM IST
सार

अध्ययन में पाया गया कि एक ही लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई दोबारा बहाल करने की योजनाएं अन्य लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाती हैं। हालांकि, ये योजनाएं एक ही बार में तीनों क्षेत्रों में 80 फीसदी से अधिक लाभ पहुचाएंगी। इसमें यह भी पाया गया कि सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों को इस नजरिये से असमान रूप से फायदा हो सकता है। 

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India large areas reforestation shown benefits improvement in climate change
जलवायु परिवर्तन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

जंगलों को दोबारा लगाने उनका संरक्षण करने से लोगों को लाभ, जैव विविधता में बढ़ोतरी और जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद मिल सकती है। एक्सेटर और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालयों की ओर से किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है।

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अध्ययन में पाया गया कि एक ही लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई दोबारा बहाल करने की योजनाएं अन्य लक्ष्यों को हासिल नहीं कर पाती हैं। हालांकि, ये योजनाएं एक ही बार में तीनों क्षेत्रों में 80 फीसदी से अधिक लाभ पहुचाएंगी। इसमें यह भी पाया गया कि सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों को इस नजरिये से असमान रूप से फायदा हो सकता है। अध्ययन के नतीजे जर्नल प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुए हैं। शोधकर्ताओं ने वास्तविक परिणाम प्राप्त करने के लिए नेचर्स कंट्रीब्यूशन टू पीपल (एनसीपी) नामक एक ढांचे का उपयोग किया जो समानता सहित मानवता के लिए बहाली और फायदों के बीच एक व्यापक संबंध पर जोर देता है।
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एनसीपी ढांचे को भारत में लागू किया गया
एनसीपी ढांचे को भारत के बड़े इलाकों में लागू किया गया और उपयुक्त हिस्सों पर प्राकृतिक जंगलों के प्राकृतिक तौर से फिर से बहाली के फायदों की जांच पड़ताल की गई। शोधकर्ताओं के अनुसार, दोबारा बहाली परियोजनाओं का कभी-कभी सीमित लक्ष्य होता है, जिसके कारण समझौता करना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए यदि कार्बन भंडारण पर ध्यान केंद्रित किया जाता है तो पेड़ की विशेष प्रजातियों को लगा सकते हैं और उन्हें बचाने के लिए जंगलों को बाड़ से घेर सकते हैं। यदि जैव विविधता पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो विशेष प्रजातियों के लिए जंगलों का प्रबंधन कर सकते हैं जैसे बंगाल टाइगर या एशियाई हाथी। यदि लोगों की आजीविका पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो ऐसी प्रजातियां लगाई जा सकती हैं जो आवास संबंधित सामग्री और खाना पकाने के लिए ईंधन प्रदान करती हैं।
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एकीकृत योजना का फायदा
अध्ययन से पता चलता है कि एनसीपी को ध्यान में रखकर बनाई गईं योजनाएं अन्य लक्ष्यों को पूरा नहीं कर पाती हैं। हालांकि, एक एकीकृत योजना तीनों को कुशलतापूर्वक पूरा कर सकती है। शोधकर्ताओं ने घास के मैदानों और खेती की जमीन जैसे क्षेत्रों को छोड़कर, संभावित जंगलों की बहाली वाले क्षेत्र के 38.8 लाख हेक्टेयर के मानचित्र बनाने के लिए एक अनुकूलन एल्गोरिदम का उपयोग किया। परिणामों से पता चला कि कई लक्ष्यों पर आधारित जंगलों की बहाली करने की योजनाएं जलवायु परिवर्तन को कम करने से एनसीपी का औसतन 83.3 फीसदी, जैव विविधता मूल्य एनसीपी का 89.9 फीसदी और मात्र एक उद्देश्य वाली योजनाओं की ओर से वितरित सामाजिक एनसीपी का 93.9 फीसदी प्रदान करती हैं।

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