{"_id":"6aedf0f04f04d4fbae0c067c","slug":"india-joins-eur-billion-horizon-europe-research-programme-2026-11-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूरोप देगा भारत के वैज्ञानिकों को मोटा पैसा: रिसर्चर संभालेंगे बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट; क्या है योजना?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
यूरोप देगा भारत के वैज्ञानिकों को मोटा पैसा: रिसर्चर संभालेंगे बड़े अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट; क्या है योजना?
Fri, 06 Nov 2026 08:54 PM IST
राकेश कुमार
एएनआई, ब्रसेल्स/ बेल्जियम।
एएनआई, ब्रसेल्स/ बेल्जियम।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 06 Nov 2026 08:54 PM IST
सार
भारत और यूरोपीय संघ ने 93.5 अरब यूरो के हॉराइजन यूरोप रिसर्च प्रोग्राम में भारत की भागीदारी को लेकर बातचीत पूरी कर ली है। इसके बाद भारतीय वैज्ञानिकों, कंपनियों और शोध संस्थानों को यूरोपीय संघ से सीधे शोध अनुदान मिल सकेगा। वे अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं की अगुवाई भी कर सकेंगे। समझौते पर हस्ताक्षर और दोनों पक्षों की मंजूरी के बाद जनवरी 2027 से इसकी शुरुआत होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
भारत-यूरोप संबंध
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत और यूरोपीय संघ के बीच विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में बड़ी पहल हुई है। दोनों पक्षों ने यूरोपीय संघ के 93.5 अरब यूरो (करीब 9,000 करोड़ यूरो से अधिक) के हॉराइजन यूरोप कार्यक्रम में भारत की भागीदारी को लेकर बातचीत पूरी कर ली है। इस समझौते के बाद भारतीय शोधकर्ताओं, कंपनियों और शोध संस्थानों के लिए यूरोप में बड़े स्तर पर शोध करने और उसके लिए सीधे आर्थिक मदद पाने के रास्ते खुलेंगे। यूरोपीय आयोग के मुताबिक, समझौते पर हस्ताक्षर और दोनों पक्षों से मंजूरी मिलने के बाद जनवरी 2027 से यह व्यवस्था लागू करने की योजना है।
बड़े अंतरराष्ट्रीय शोध प्रोजेक्ट की अगुवाई
इस समझौते के तहत भारत के वैज्ञानिक और शोध संस्थान हॉराइजन यूरोप के दूसरे स्तंभ यानी पिलर-2 के तहत आने वाली परियोजनाओं में हिस्सा ले सकेंगे। उन्हें यूरोपीय संघ से सीधे अनुदान मिलेगा। खास बात यह है कि भारतीय शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं का नेतृत्व और समन्वय भी कर सकेंगे। इस कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, उद्योग, अंतरिक्ष, जलवायु, ऊर्जा और जैव अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में शोध को आर्थिक मदद दी जाती है।
क्या है हॉराइजन यूरोप कार्यक्रम?
हॉराइजन यूरोप यूरोपीय संघ का प्रमुख शोध और नवाचार कार्यक्रम है। यह 2021 से 2027 तक चल रहा है और इसका कुल बजट 93.5 अरब यूरो है। इसके तहत अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक और संस्थान मिलकर नई तकनीक विकसित करने और बड़ी वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए काम करते हैं। अभी इसमें ब्रिटेन, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड समेत यूरोपीय संघ से बाहर के 23 देश जुड़े हुए हैं।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: दिल्ली में दमघोंटू हवा, देश में डीपफेक का डर: संसद की समिति ने क्यों उठाए ये मुद्दे? जानिए
भारत को क्या होगा फायदा?
इस साझेदारी से भारतीय शोध संस्थानों को यूरोपीय आयोग से सीधे अनुदान मिल सकेगा। भारतीय वैज्ञानिक यूरोपीय देशों के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर बड़े प्रोजेक्ट चला सकेंगे। उन्हें परियोजनाओं की अगुवाई करने का भी मौका मिलेगा। समझौते के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में भारतीय संस्थानों को यूरोपीय संघ के साझेदारों के समान शर्तों पर भाग लेने का अवसर मिलेगा। इसके बदले भारत को कार्यक्रम के बजट में अपना उचित आर्थिक योगदान देना होगा।
पहले से जारी है भारत-यूरोप का तकनीकी सहयोग
भारत और यूरोपीय संघ के बीच वैज्ञानिक सहयोग की शुरुआत 2001 में हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते से हुई थी। इसे 2030 तक के लिए बढ़ाया गया है। इस साल 27 जनवरी को हुए भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में 2030 तक के लिए व्यापक रणनीतिक एजेंडा भी अपनाया गया था। इसके अलावा भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद के जरिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सार्वजनिक ढांचे, सेमीकंडक्टर, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, डिजिटल कौशल और 6जी तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
यूरोपीय संघ की स्टार्टअप, रिसर्च और इनोवेशन आयुक्त एकातेरिना जखारिएवा ने इस समझौते का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों पक्षों के कारोबारियों, शोधकर्ताओं और नवाचार करने वालों के लिए नए अवसर खुलेंगे। यूरोप और भारत मिलकर भविष्य की तकनीक विकसित करने में साझेदार बन सकते हैं।
विज्ञापन
बड़े अंतरराष्ट्रीय शोध प्रोजेक्ट की अगुवाई
इस समझौते के तहत भारत के वैज्ञानिक और शोध संस्थान हॉराइजन यूरोप के दूसरे स्तंभ यानी पिलर-2 के तहत आने वाली परियोजनाओं में हिस्सा ले सकेंगे। उन्हें यूरोपीय संघ से सीधे अनुदान मिलेगा। खास बात यह है कि भारतीय शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं का नेतृत्व और समन्वय भी कर सकेंगे। इस कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य, डिजिटल तकनीक, उद्योग, अंतरिक्ष, जलवायु, ऊर्जा और जैव अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में शोध को आर्थिक मदद दी जाती है।
विज्ञापन
क्या है हॉराइजन यूरोप कार्यक्रम?
हॉराइजन यूरोप यूरोपीय संघ का प्रमुख शोध और नवाचार कार्यक्रम है। यह 2021 से 2027 तक चल रहा है और इसका कुल बजट 93.5 अरब यूरो है। इसके तहत अलग-अलग देशों के वैज्ञानिक और संस्थान मिलकर नई तकनीक विकसित करने और बड़ी वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए काम करते हैं। अभी इसमें ब्रिटेन, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड समेत यूरोपीय संघ से बाहर के 23 देश जुड़े हुए हैं।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें: दिल्ली में दमघोंटू हवा, देश में डीपफेक का डर: संसद की समिति ने क्यों उठाए ये मुद्दे? जानिए
भारत को क्या होगा फायदा?
इस साझेदारी से भारतीय शोध संस्थानों को यूरोपीय आयोग से सीधे अनुदान मिल सकेगा। भारतीय वैज्ञानिक यूरोपीय देशों के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर बड़े प्रोजेक्ट चला सकेंगे। उन्हें परियोजनाओं की अगुवाई करने का भी मौका मिलेगा। समझौते के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में भारतीय संस्थानों को यूरोपीय संघ के साझेदारों के समान शर्तों पर भाग लेने का अवसर मिलेगा। इसके बदले भारत को कार्यक्रम के बजट में अपना उचित आर्थिक योगदान देना होगा।
पहले से जारी है भारत-यूरोप का तकनीकी सहयोग
भारत और यूरोपीय संघ के बीच वैज्ञानिक सहयोग की शुरुआत 2001 में हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते से हुई थी। इसे 2030 तक के लिए बढ़ाया गया है। इस साल 27 जनवरी को हुए भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में 2030 तक के लिए व्यापक रणनीतिक एजेंडा भी अपनाया गया था। इसके अलावा भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद के जरिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल सार्वजनिक ढांचे, सेमीकंडक्टर, हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, डिजिटल कौशल और 6जी तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा रहा है।
यूरोपीय संघ की स्टार्टअप, रिसर्च और इनोवेशन आयुक्त एकातेरिना जखारिएवा ने इस समझौते का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों पक्षों के कारोबारियों, शोधकर्ताओं और नवाचार करने वालों के लिए नए अवसर खुलेंगे। यूरोप और भारत मिलकर भविष्य की तकनीक विकसित करने में साझेदार बन सकते हैं।