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India-Japan Ties: मेक इन इंडिया से मेक फॉर द वर्ल्ड तक...जापान से 170 से अधिक समझौते, 13 अरब डॉलर का निवेश

Sat, 30 Aug 2025 07:56 AM IST
दीपक कुमार शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sat, 30 Aug 2025 07:56 AM IST
सार

जापान का यह निवेश भारत के कई प्रमुख क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिसमें इस्पात, ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस शामिल हैं। निप्पॉन स्टील ने गुजरात और आंध्र प्रदेश में अपने इस्पात संयंत्रों का विस्तार करने के लिए भारी निवेश किया है। वहीं, सुजुकी मोटर और टोयोटा किर्लोस्कर ने क्रमशः गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र में नए संयंत्र स्थापित करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने का संकल्प लिया है।

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India Japan partnership under leadership of PM Narendra Modi from Make in India to Make for World
भारत-जापान फ्लैग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-जापान संबंधों का नया अध्याय शुरू हुआ है। दोनों देशों के बीच साझेदारी मेक इन इंडिया से लेकर मेक फॉर द वर्ल्ड तक का सफर तय करती है। यह रिश्ता सिर्फ निवेश से परे, साझा भविष्य की नींव रख रही है। दो वर्षों में 170 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनसे भारत में 13 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आया। यह आंकड़ा भारत के आर्थिक विकास की दिशा में जापान के अटूट विश्वास का प्रतीक है।

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जापान का यह निवेश भारत के कई प्रमुख क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिसमें इस्पात, ऑटोमोबाइल, नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और एयरोस्पेस शामिल हैं। निप्पॉन स्टील ने गुजरात और आंध्र प्रदेश में अपने इस्पात संयंत्रों का विस्तार करने के लिए भारी निवेश किया है। वहीं, सुजुकी मोटर और टोयोटा किर्लोस्कर ने क्रमशः गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र में नए संयंत्र स्थापित करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने का संकल्प लिया है। यह निवेश न केवल रोजगार के अवसर पैदा करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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यह सहयोग भारत में चीजों का निर्माण करने और उसे दुनिया के लिए बाजार में उतारने के दृष्टिकोण को भी साकार कर रहा है। भारत में जापानी संयुक्त उद्यमों से निर्मित उत्पाद अब वैश्विक बाजारों में निर्यात किए जाएंगे। टोयोटा और सुजुकी के भारत में निर्मित हाइब्रिड और ईवी वाहन अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया में निर्यात किए जाएंगे।

छोटे उद्योगों का हुआ सशक्तीकरण
साझेदारी का अहम पहलू भारतीय लघु और मध्यम उद्यमों (एसएमई) को मिल रहा लाभ है। एसएमई वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का हिस्सा बन रहे हैं। टोक्यो इलेक्ट्रॉन, फुजीफिल्म और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सहयोग से एक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण किया जा रहा है। इसमें भारतीय एसएमई उच्च-मूल्य वाले घटकों के आपूर्तिकर्ता बनेंगे। यह सहयोग उन्हें वैश्विक कार्यप्रणालियों और प्रौद्योगिकी से परिचित कराएगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।


किसानों की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त
दोनों देशों के बीच साझेदारी सिर्फ बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत को भी सशक्त कर रही है। सोजित्ज कॉरपोरेशन और इंडियन ऑयल मिलकर 30 बायोगैस संयंत्रों की स्थापना कर रहे हैं। इनमें किसान अपनी फसलों के अवशेष व कृषि-अपशिष्ट की आपूर्ति करके अतिरिक्त आय अर्जित कर पाएंगे। यह पहल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगी।

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मिलकर तैयार करेंगे सैन्य उपकरण
पूर्वी और दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की बढ़ती सैन्य ताकत और वर्तमान व भविष्य की जरूरतों को देखते हुए दोनों देश सैन्य उपकरण व प्रौद्योगिकी विकसित करेंगे। मोदी और इशिबा ने चार देशों के क्वाड के महत्वपूर्ण और स्थायी क्षेत्रीय समूह के रूप में विकसित होने का स्वागत किया। मोदी ने कहा कि रक्षा सहयोग के नए ढांचे के तहत, भारत और जापान ने अपने रक्षा बलों के बीच अंतर-संचालन और तालमेल को बढ़ावा देकर एक-दूसरे की रक्षा क्षमताओं में योगदान करने का निर्णय लिया। इसके लिए दोनों देश तीनों सेनाओं के बीच सैन्य अभ्यास बढ़ाएंगे। दोनों पक्षों ने खुफिया जानकारी और अनुभव-साझाकरण के माध्यम से आतंकवाद और संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने का भी संकल्प लिया। ऊर्जा और पर्यावरण सहयोग के लिए संयुक्त क्रेडिट तंत्र का समझौता हुआ।

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